हुक्मरानों ने किसानों के साथ नहीं किया बेहतर सलूक

Updated at : 28 Apr 2017 2:23 AM (IST)
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हुक्मरानों ने किसानों के साथ नहीं किया बेहतर सलूक

चंपारण में तब और अब विषय पर व्याख्यानमाला आयोजित वक्ताओं ने किसानों की हालत को किया रेखांकित मोतिहारी : प्रभात खबर द्वारा गुरुवार को शहर के गांधी संग्रहालय में चंपारण में तब और अब,विषय पर व्याख्यानमाला आयोजित की गयी. वक्ताओं ने विस्तार से सौ साल पहले किसानों की क्या स्थिति थी,और किसानों की क्या हालत […]

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चंपारण में तब और अब विषय पर व्याख्यानमाला आयोजित

वक्ताओं ने किसानों की हालत को किया रेखांकित
मोतिहारी : प्रभात खबर द्वारा गुरुवार को शहर के गांधी संग्रहालय में चंपारण में तब और अब,विषय पर व्याख्यानमाला आयोजित की गयी. वक्ताओं ने विस्तार से सौ साल पहले किसानों की क्या स्थिति थी,और किसानों की क्या हालत थी व अब कैसी है,विस्तार से अपनी बात रखी,जो इस प्रकार है.
हुक्मरानों ने किसानों के साथ बेहतर सलूक नहीं किया. इतिहासकार के अनुसार,चंपारण ने गांधी के जीवन को नई दिशा दी और सत्याग्रह से सीख लेकर गांधी ने किसानों पर विशेष ध्यान दिया. इसी चंपारण ने गांधी को महात्मा गांधी बनाया और भारतीय किसानों को अपनी असली ताकत का एहसास दिलाया.उक्त विचार रेड क्रॉस सोसाइटी के सचिव ई.विभूतिनारायण सिंह का है.उन्होंने कहा कि इसी का नतीजा था कि अंग्रेजों के 150 साल हुकूमत अगले 30 वर्षों में समाप्त हो गया.
देश के अन्य हिस्सों की तरह चंपारण के किसान भी बदहाल हो गये. आकड़ों पर ध्यान दिलाते हुए ई सिंह ने कहा कि रोजगार के अभाव में किसानों का पलायन हो रहा है और इसका असर शहरों पर भी पड़ रहा है. सवाल खड़ा करते हुए कहा कि क्या 1917 में गांधी जी ने जो सपना किसानों के लिए देखा था वह पूरा हो पाया.
नहीं निकला पानी
लघु सिंचाई विभाग द्वारा जो नलकूप लगाया गया उसमें से पानी नहीं निकला.अरबों रुपये खर्च किये गये लेकिन सरकारी व्यवस्था सिंचाई का संसाधन ठीक नहीं कर पायी.उक्त विचार सपही के किसान विनोद कुमार का है.किसानों की हालत में सुधार के लिए कृषि के साथ-साथ पशुपालन पर भी जोर देने की बात उन्होंने कही.
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उनके श्रद्धांजलि दी जा सकती है. लेकिन भाषणबाजी के सिवाय उनके सपनों को पूरा करने में हमारी सरकारें विफल हैं.
बिचौलियों व नेताओं से परेशान हैं किसान
सौ साल पहले किसान अंग्रेजों से परेशान थे और अब नेताओं व दलालों से परेशान हैं.किसानों को क्या अधिकार है उन्हें इसकी जानकारी नहीं है और इसका लाभ दलाल व नेता उठाते हैं.जिस तरह डाॅक्टर को दूसरा भगवान कहा जाता है उसी तरह से अन्नदाता किसानों को भगवान मानना चाहिए.उनके अधिकारों को पूरी ईमानदारी से उनतक पहुंचाना चाहिए.उक्त विचार समाजसेवी मीना दुबे का है.
किसानों की हालत पर विशेष ध्यान देने की जरूरत
अभी के समय में जो किसानों की हालत है वही हालत वर्ष 1917 में थी.गांधी जी ने किसानों की समस्या पर जिस तरह से आंदोलन किया था और आजादी के बाद किसानों के लिए जो सपना देखा था वह पूरा नहीं हो पाया.उक्त विचार डाॅ. रंभा पांडेय का है.उन्होंने सवाल खड़ा किया कि आखिर किसान मुलभूत सुविधाओं से आखिर दूर क्यों है. किसानों के लिए यहां एक और सत्याग्रह होने की जरूरत बताया.
अपनी जमीन बेचकर भूमिहिन हो गये किसान
सौ वर्ष बाद किसानों हालत तो नहीं बदली लेकिन उनकी सूरत बदल गयी.मजबूर हो कई किसान अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए जमीन बेचकर भूमिहिन हो गये.धनी किसान गरीब किसान के रूप में बदल गये.उक्त विचार जिला विद्यिज्ञ संघ के महासचिव डाॅ. शंभु शरण सिंह का है.उन्होंने कहा कि चंपारण में सौ साल पूर्व जो किसानों की स्थिति थी,उसमें यही बदलाव हुआ है.
मेहनत के अनुसार किसानों को नहीं मिलता है लाभ
किसानों को मेहनत के अनुसार लाभ नहीं होता.उनकी हालत में जो सुधार होनी चाहिए थी वह सौ साल बाद भी नहीं हो पाया.किसानों को भी अपना अधिकार लेने के लिए संगठित होना पड़ेगा.उक्त विचार चन्दलाता वर्मा का है.गांधी जी चंपारण आए और सत्याग्रह चलाकर आजादी तो दिला दी लेकिन किसानों पर किसी ने ध्यान नहीं दिया.
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