पुलिस के नाम पर हो रही वसूली

Updated at : 06 Oct 2016 6:10 AM (IST)
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पुलिस के नाम पर हो रही वसूली

अनदेखी. ट्रक चालकों ने रक्सौल इंस्पेक्टर के सामने लगाया था आरोप पिछले कई महीनों से गम्हरीया चौक से लेकर वॉयरलेस टॉवर तक चल रहा है खेल चालकों के गुस्से ने किया खुलासा, जाम के कारण बनते हैं िबचौलिये रक्सौल : त्योहार के मौसम में जाम की समस्या ने लोगों को अभी से डराना शुरू कर […]

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अनदेखी. ट्रक चालकों ने रक्सौल इंस्पेक्टर के सामने लगाया था आरोप

पिछले कई महीनों से गम्हरीया चौक से लेकर वॉयरलेस टॉवर तक चल रहा है खेल
चालकों के गुस्से ने किया खुलासा, जाम के कारण बनते हैं िबचौलिये
रक्सौल : त्योहार के मौसम में जाम की समस्या ने लोगों को अभी से डराना शुरू कर दिया है. भारत-नेपाल सीमा के दोनों तरफ के लोग रक्सौल के जाम से वर्षों से परेशान रहे हैं.
शहरवासियों के आंदोलन के बाद एक व्यवस्था अधिकारियों द्वारा बनायी गयी कि शहर में उन्हीं गाड़ियों को प्रवेश दिलाया जायेगा, जिनका कस्टम से सारी प्रक्रिया पूरी कर ली गयी हो. लेकिन विगत कुछ महीनों से यह व्यवस्था समाप्त हो गयी है और शहर के बाहर कतार में खड़ी वाहनों को शहर में प्रवेश दिलाने के नाम पर बड़े पैमाने पर वसूली की जा रही है.
ऐसे में जो चालक पुलिस के नाम पर वसूलने वाले लोगों को 400 रुपये प्रति वाहन देते हैं, उनके वाहन को शहर में आने की अनुमति दी जाती है और बाकी वाहन लाइन में खड़े रह जाते हैं. यहीं कारण है कि ट्रक चालक भारी संख्या में प्रवेश करते हैं और शहर में जाम की समस्या उत्पन्न हो जाती है. मंगलवार को जब शहर के लोगों ने कोइरीया टोला चौक के पास अपनी नाराजगी व्यक्त की तो चालकों ने पूरे खेल को उजागर किया और बताया कि उनसे चार-चार सौ रुपये प्रति गाड़ी लिया गया है
और उसके बाद उन्हें शहर में जाने का अनुमति दी गयी है. मौके पर नगर थानाध्यक्ष उग्रनाथ झा पहुंचे और उनके सामने ही चालकों ने इस खेल का खुलासा किया. प्रत्यक्षदर्शी तो यहां तक बताते हैं कि वसूली करने वाले तीन लोगों में एक मौके पर पहुंच कर मामला समाप्त करने अपने तरफ से प्रयास भी किया. लेकिन लोगों के आक्रोश को देखते हुए उसे वहां से भागना पड़ा. शहर के लोगों के साथ-साथ आम लोगों को पता है कि गम्हरीया चौक पर कौन-कौन लोग पुलिस के नाम पर पैसा वसूलते हैं.
लेकिन थानाध्यक्ष जब कोइरीया टोला पहुंचे तो उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया से अनभिज्ञता जाहिर की. लेकिन चालकों के इस खुलासे के बाद अनिभिज्ञता जाहिर करने वाली पुलिस अब तक उन तीन दलालों को खोजने का कोई प्रयास नहीं किया है. अब सवाल उठता है कि यदि रक्सौल पुलिस का संबंध इन दलालों से नहीं है तो क्या उन्हें पकड़ने की कार्रवाई पुलिस करेगी.
क्या पुलिस का हाथ इतना लंबा नहीं है कि थाने से चंद किलोमिटर दूरी पर पुलिस के नाम पर वसूली करने वाले इन तीन लोगों को गिरफ्तार कर सके. चालकों की माने तो गम्हरीया चौक का एक व्यक्ति जो रामगढ़वा से रक्सौल के बीच में पुलिस के नाम पर भारी मात्रा में वसूली करता है. ऐसे में क्या हमारी पुलिस इन्हें बेनकाब नहीं कर सकती है.
क्यों ध्वस्त हुयी व्यवस्था
तीन साल पहले तत्कालीन पुलिस अधीक्षक द्वारा रक्सौल की समस्या को देखते हुए पुलिस की तीन टीमों का गठन किया गया. तीनों टीम को वॉकी-टॉकी दी गयी थी. जिन्हें यह निर्देश था कि शहर के बाहर से जवान कोइरीया टोला की टीम से बात करेंगे कि कोइरीया टोला में कोई गाड़ी नहीं है तो शहर के लिए गाड़ी छोड़ी जायेगी.
तीसरी टीम बाटा चौक के पास थी जो कोइरीया टोला टीम के साथ समन्वय बनाती थी और वह बताती थी कि कस्टम के पास कोई गाड़ी नहीं है तो कोइरीया टोला से शहर में गाड़ी छोड़ी जाती थी. लेकिन कुछ दिनों से यह व्यवस्था समाप्त हो गयी और कुछ अधिकारियों की मर्जी के हिसाब से वाहनों को शहर में प्रवेश मिलने लगा.
इधर, त्योहार के मौसम में जाम की समस्या को देखते हुए शहर के लोग अपने आक्रोश को कई तरह से इजहार करने लगे है और वक्त रहते पुलिस जाम की समस्या पर कारगर समाधान नहीं निकाल सकी तो लोगों का गुस्सा फूट जायेगा.
बहरहाल लोग यह मांग कर रहे है कि यह जांच की जाये कि जाम चालक लगाते हैं या पुलिस व्यवस्था में शामिल लोगों की वजह से ऐसा हो रहा है. सांसद प्रतिनिधि राजकिशोर राय उर्फ भगत जी ने कहा कि चालकों ने खुलेआम यह आरोप लगाया कि पुलिस के नाम पर पैसा वसूली की जाती है.
प्रति गाड़ी 400 लेकर कराया था पास
मुकेश ने की है वसूली
चालकों ने आरोप लगाया था, हमलोगों ने जांच की तो पता चला कि मुकेश नामक कोई व्यक्ति ने पैसे की वसूली की है. लेकिन 400 रुपये नहीं बल्कि 50-50 रुपये, हमलोगों ने उसे कहा है कि वह अपने क्लीयरिंग के नाम पर पैसा ले पुलिस के लिए पैसा नहीं ले.
उग्रानाथ झा, पुलिस इंस्पेक्टर, रक्सौल
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