समस्या. जिले की कई एकड़ भूमि है अितक्रमण की िशकार, प्रशासन मौन

Updated at : 17 Feb 2016 6:36 AM (IST)
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समस्या. जिले की कई एकड़ भूमि है अितक्रमण की िशकार, प्रशासन मौन

मोतीझील पर बढ़ रहा कब्जा निर्देश, मापी और जांच में फंस कर रह गयी है मोतीझील व अन्य स्थानों पर सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाओ अभियान. वरीय अधिकारियों के जांच व निर्देश से कुछ दिन के लिए अतिक्रमणकारियों में हड़कंप तो जरूर मचती है, लेकिन कनीय स्तर के अधिकारी व कर्मी इस निर्देश को नजरअंदाज […]

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मोतीझील पर बढ़ रहा कब्जा

निर्देश, मापी और जांच में फंस कर रह गयी है मोतीझील व अन्य स्थानों पर सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाओ अभियान. वरीय अधिकारियों के जांच व निर्देश से कुछ दिन के लिए अतिक्रमणकारियों में हड़कंप तो जरूर मचती है, लेकिन कनीय स्तर के अधिकारी व कर्मी इस निर्देश को नजरअंदाज कर कागजों के फेरे में पड़ अधिकारी को बरगलाने लगते हैं. मामला मोतीझील का हो या हरसिद्धि या बंजरिया व मोतिहारी बाजार क्षेत्र का. सभी जगह हाल एक जैसा ही है. कई एकड़ भूमि पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा है, लेकिन इन्हें खाली करने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो रही है.
मोतिहारी : शहर के मोतीझील के सौन्दर्यीकरण व इसको अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराने के लिए अभियान चल रहा है, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा है.
पिछले वर्ष करीब 158 अतिक्रमणकारी चिह्नित किये गये थे, लेकिन अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई नहीं हो सकी. इस वर्ष जनवरी माह में डीएम और एसपी के साथ अधिकारियों की टीम ने स्थल पर पहुंच झील में हो रहे अतिक्रमण पर रोक लगा जांच टीम गठित करने के साथ मापी का निर्देश दिया. मापी भी आरंभ हुई. इस बीच कई लोगों ने कर्मियों से मिलीभगत से खेल आरंभ किया. नतीजा शुरुआती दौर में मापी में जो तेजी थी वह अब धीमी हो गयी है. इसको ले लोग सवाल उठाने लगे हैं .
रोहिनिया में झील में मिट्टी भर हो रही है खेती
जिले के बंजरिया प्रखंड अंतर्गत रोहिनिया गांव के पास खाता 468 खेसरा 211-1-265 करीब 80 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा कर लोग खेती कर रहे हैं. उक्त खेती से सरकार को कोई राजस्व भी नहीं मिल रहा है. स्थानीय लोग बताते हैं कि कलांतर में वहां झील व तलाब था. धीर-धीरे आस पास के लोगों ने अतिक्रमण कर खेती आरंभ की. एक-एक व्यक्ति के कब्जे में एक से दो एकड़ व पांच से 10 कट्ठा जमीन है. तत्कालीन अपर समाहर्त भरत कुमार दूबे के निर्देश पर उक्त भूमि की जांच कर रिपोर्ट सीओ के द्वारा कब्जाधारक के साथ वरीय अधिकारियों को सौंपी गयी. मापी वर्ष 2013 में हुई थी, लेकिन अब तक नतीजा सिफर है .
रोक के बाद भी मीना बाजार में बन रहे हैं पक्के मकान
शहर का मीना बाजार बेतिया राज की भूमि बतायी जाती है. इस पर पक्का मकान बनान नियम विरुद्ध है, लेकिल दर्जनों की संख्या में पक्का दूकान बन चुके हैं तो कुछ का निर्माण अब भी हो रहा है. इसके पीछे अंचलकर्मी की मिलीभगत बतायी जाती है . जो स्वयं में जांच का विषय है.
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