सूख गये बिचड़े, धान की खेती पर संकट

Updated at : 15 Jul 2015 1:04 AM (IST)
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सूख गये बिचड़े, धान की खेती पर संकट

रूठा मॉनसून : आकाश की ओर टकटकी लगाये हैं किसान, नहीं हो रही बारिश कहीं झमाझम बारिश तो कहीं बूंदा-बूंदी के बाद अब तेज धूप के कारण धान का बिचड़ा लगा रहे किसानों की परेशानी बढ़ गयी है़ कहीं नहरों में पर्याप्त पानी नहीं है तो कहीं नहरों में सिल्ट भरा है़ ढाका क्षेत्र की […]

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रूठा मॉनसून : आकाश की ओर टकटकी लगाये हैं किसान, नहीं हो रही बारिश
कहीं झमाझम बारिश तो कहीं बूंदा-बूंदी के बाद अब तेज धूप के कारण धान का बिचड़ा लगा रहे किसानों की परेशानी बढ़ गयी है़ कहीं नहरों में पर्याप्त पानी नहीं है तो कहीं नहरों में सिल्ट भरा है़ ढाका क्षेत्र की अधिकांश नहरे जीर्णाेद्धार के अभाव में नकारा बन गयी है़ निजी नलशय नकारा बन गयी है़ यानि 264 में 180 नलकूप खराब है़ ऐसे में निजी नलकूप से महंगी सिंचाई कर किसान आकाश की ओर बारिश के लिए टकटकी लगाये हुए है़
कहने को प्रखंड में नलकूप का जाल, ऑपरेटर फरार
प्रखंड के किसानों का हाल बुरा है़ सिंचाई के नाम पर तो नलकूप का जाल बिछाया गया, लेकिन चालू नहीं हो सका़ ज्यादातर नलकूप से आलटनेटर, बैट्री की चोरी हो गयी़ प्रखंड में एक मात्र नलकूप ऑपरेटर है, जिसके प्रभार में 21 नलकूप है़ एक पर मौसमी चालक के मानदेय पर काम कर रहा है़ निजी पंपसेट से धान की खेती करना बहुत ही महंगा साबित हो रही है़
किसान मडपा मोहन निवासी यदुनाथ कुमार प्रसाद ने कहा कि सिंचाई का कोई साधन नहीं है़ यहां तो भगवान भरोसे खेती करने को हम किसान मजबूर है़
फेनहारा निवासी किसान मोहम्मद तैयब हुसैन ने कहा कि अब खेती जुआ हो गया है़ डीजल का दाम ज्यादा है़ समय पर पानी नहीं होना़ कभी ज्यादा तो बर्बाद, कम तो सुखाड़ ऐसी स्थिति में खेती करना आसान नहीं है़
छह नलकूप पर काम शुरू किया गया है़ पाइप बिछाया जा रहा है, रूम बनाया जा रहा है तथा बिजली की व्यवस्था की जा रही है़ एक मात्र खान पिपरा नलकूप चालू हालत में है, लेकिन बिजली के अभाव एवं खराबी के कारण काम नहीं कर रहा है़
एक एकड़ पर पड़ रहा है चार हजार रुपये खर्च
महंगाई को लेकर प्रखंड क्षेत्र के किसानों की धान की रोपनी आधी अधूरी ही है़ बताते चले कि धान की रोपनी अभी तक 60 प्रतिशत भी नहीं हो पायी है़ प्रखंड के नौवाडीह पंचायत के कृषक मुखदेव सिंह, अमर सिंह, अभय सिंह, रामाशंकर प्रसाद बताते है कि समय से बरसात नहीं होने के कारण धान का बिचड़ा जलकर नष्ट हो गया़ पुन: पंपसेट से पानी पटाकर दुबारा धान का बिचड़ा तैयार किया गया है़ रोपनी अपने-अपने निजी नलकूपों, बोरिंग पंपसेट से भी की जा रही है,जो काफी महंगी पड़ रही है़
बात-चीत के क्रम में इन किसानों ने बताया कि तीन से चार हजार रुपये प्रति एकड़ धान की रोपनी के लिए सिंचाई पर खर्च आ रही है़ प्रखंड के नहरों की बात करें तो नहरों में पानी तो है, परंतु किसानों के खेतों तक वह नहीं पहुंच पा रहा है़ क्योंकि छोटी-छोटी नहरे मिट्टी से भर गयी है़
वहीं दूसरी तरफ सरकारी नलकूप प्रखंड क्षेत्रों में दर्जनों की संख्या में है परंतु एक दो को छोड़कर सभी खराब पड़े है़ इस बाबत प्रखंड कृषि पदाधिकारी तारकेश्वर प्रसाद ने बताया कि इन बंद नलकूपों का रिपोर्ट जिला कार्यालय को दे दिया गया है़
कृषि पदाधिकारी ने यह भी बताया कि धान की बीज प्रखंड कार्यालय को देर से प्राप्त होने के कारण धान की रोपनी में थोड़ी देरी हो रही है, लेकिन अब किसानों के धान की बीज तैयार हो गये है़ अब धान की रोपाई जल्द ही पूरी कर ली जायेगी़
सरोत्तर नहर बंद, नलकूप बने नकारा, जो चालू हैं उसके संचालक फ रार
डुमरियाघाट क्षेत्र अंतर्गत सिंचाई के नलकूपों की संख्या सात है़ रामपुर खजुरिया में दो , सेमुआपुर में तीन, उत्तरी हुसैनी में एक तथा दक्षिणी हुसैनी में एक नलकूप है़ सरोत्तर पंचायत में नहीं है़
सिंचाई के लिए नहर दरियापुर से सरोत्तर की तरफ जाने वाली नहर में पानी आना बंद है़ स्थानीय किसान राजू ठाकुर व रविंद्र सहनी ने बताया कि नहर से किसानों को कोई लाभ नहीं है़ बंद पड़ा है़
पानी आना भी बंद है़ वहीं किसानों के लिए रामपुर खजुरिया में दो नलकूप है़ एक रामपुर खजुरिया मठ के पास, जो आज तक संचालक के अभाव में बंद है, जिसमें तेल डालकर मठ की जमीन की सिंचाई होती है़ रामपुर खजुरिया बाजार के पास नलकूप बंद पड़ा है़ वहीं हाल सेमुआपुर के तीनों नलकूप का है़
वहीं दक्षिणी हुसैनी के नलकूपों का है़ सरोत्तर में आज तक नलकूप लगा ही नहीं़ वर्षा से किसानों का सिंचाई संभव नहीं है़ वहीं सरोत्तर के किसान राजु ठाकुर एवं रविंद्र सहनी से पूछने पर बताते है कि दस प्रतिशत रोपनी हुआ है़ कहीं पर बीज छोटा है तो कहीं पर पानी का अभाव है़
वहीं रामपुर खजुरिया के किसान राधु सिंह ने बताया कि वहां पर 20 प्रतिशत रोपनी हुआ है़ वहीं दक्षिणी हुसैनी के किसान चंदन पांडेय व धर्म प्रसाद यादव व संजय यादव ने बताया कि बीज छोटा होने के कारण रोपनी नहीं हुआ है़ वहीं सेमुआपुर के किसान सुदामा तिवारी व रामनाथ सिंह ने बताया कि हमारे पंचायत में 40 प्रतिशत रोपनी हो गया है़
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