जिले में 264 में 18 नलकूप खराब, किसान बेहाल

Updated at : 14 Jul 2015 7:05 AM (IST)
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जिले में 264 में 18 नलकूप खराब, किसान बेहाल

सिंचाई व्यवस्था नकारा, निजी नलकूप से किसान कर रहे धान की रोपनी कहने को पूवीं चंपारण जिले में गंडक नदी, ढाका नहर नवीकरण, गोविंदापुर केनाल के नाम से नहरों का जाल बिछा है़ विभिन्न प्रखंडों में 264 सरकारी नलकूप है़ बावजूद रोपनी के लिए निजी नलकूप का सहारा लेना पड रहा है़ कृषि विभाग के […]

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सिंचाई व्यवस्था नकारा, निजी नलकूप से किसान कर रहे धान की रोपनी
कहने को पूवीं चंपारण जिले में गंडक नदी, ढाका नहर नवीकरण, गोविंदापुर केनाल के नाम से नहरों का जाल बिछा है़ विभिन्न प्रखंडों में 264 सरकारी नलकूप है़ बावजूद रोपनी के लिए निजी नलकूप का सहारा लेना पड रहा है़ कृषि विभाग के अनुसार धान खेती का लक्ष्य एक लाख 85 हजार हेक्टेयर था और अब तक एक लाख 59.88 हेक्टेयर खेती ही हो पाया है़
नलकूप खराब, पंपसेट से हो रही धान की रोपनी
खरीफ का मौसम शुरू है़ किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है़ कारण इंद्र देव की कृपा दृष्टि नहीं है़ सरकार प्रायोजित सिंचाई योजनाओं की हालत भी खस्ताहाल है़ प्रखंड क्षेत्र में नहर की सुविधा नहीं है़ नलकूप यांत्रिकी कारणों, संसाधनों को अभाव में बंद पड़े है़ ऐसी परिस्थिति में किसान निजी नलकूपों(पंपसेट) के सहारे धान की रोपनी आरंभ करते है़
पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण फ सल चौपट हो जाती है़
डीजल संचालित नलकूपों से प्रति कठ्ठा 200 रुपये खर्च आता है़ फि र भी पर्याप्त पानी खेतों को नहीं मिल पाता है़, जबकि राजकीय नलकूपों से सिंचाई खर्च काफ ी कम आता है़
प्रभारी बीएओ चक्रधारी राम ने कहा कि नलकूपों की अद्यतन स्थिति की रिपोर्ट जिला को सौंप दिया गया है़
22 टय़ूबवेल में 18 है खराब
प्रखंड क्षेत्र में 22 ट्यूबवेल सरकार के द्वारा लगा है, जिसमें चार टय़ूबवेल सुचारू हालत में चल रहा है़ शेष खराब है़ दुधही गांव में लगे टय़ूबवेल एक वर्ष तक ठिक-ठाक चला, परंतु एकाएक मोटर खराब होने से टय़ूबवेल नहीं चल रहा है, जिससे किसानों की सिंचाई में प्रत्येक एकड़ में 2500 रुपये का लागत आता है़ लोग पंपसेट चलाकर धान की रोपनी किये है़
नहर की हालत भी खराब है़ दस वर्षो से नहर में पानी नहीं आया़ किसान पूण्यदेव प्रसाद कुशवाहा ने बताया कि यादवपुर पंचायत के दुधही गांव में नहरों में पानी नहीं आता है़ लोग पंपसेट चलाकर सिंचाई करते है़ धान की रोपाई बहुत महंगी साबित हो रही है़ वहीं बीएओ आशुतोष प्रकाश ने बताया कि इस क्षेत्र में धान की रोपाई का लक्ष्य 4925 हेक्टेयर है, जबकि 35000 हजार हेक्टेयर धान की रोपनी अभी तक हुई है़ बड़ी नहर के अलावा इस प्रखंड में छोटी नहरों में पानी वर्षो से नहीं आता है, जिससे किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है़
क्षेत्र में लगे कुल 69 नलकूपों एवं नहरों से वर्तमान की स्थिति के अनुसार किसानों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है़ किसानों को 130 रुपये घंटे पंपसेट से पानी खरीद कर खेती करना पड़ रहा है़ पंप ऑपरेटर के अनुसार 5-10 रुपये कठ्ठा सिंचाई शुल्क लिया जाता है पर किसानों को यह सुविधा नहीं मिलने से 10-12 गुणा अधिक खर्च करना पड़ रहा है़ किसान रामचंद्र यादव करमवा रघुनाथपुर ने बताया कि 1986 के बाढ से नहर का बांध अधिकतम क्षतिग्रस्त हो चुका है़ तब से पानी नहीं आता है़
रोपनी का लक्ष्य 3500 एकड़, 50 प्रतिशत रोपनी हो चुका है़ 60-65 प्रतिशत सिंचाई पर आधारित है़ 35 प्रतिशत के करीब मौसम आधारित है़
प्रखंड में नलकूप की स्थिति
नलकूप पूर्व से – 7
चालू- 5
बंद – 2
चालू नलकूपों में : बंगर सुगौली, फ ुलवरिया, श्रीपुर, सुगाव तथा बेलक्ष्ठ
बंद नलकूपों : छेगराहा, भरगावां,
चालू पांच नलकूप एक ऑपरेटर सुरेंद्र सिंह के जिम्म़े
नया लगा नलकूप
नाबार्ड फेज- 8- 48
नाबार्ड फेज-11-14 सभी बंद है
स्थिति
पूर्व से लगे नलकूपों में बिजली नहीं मिलने, लो वोल्टेज या तकनीकी गड़बड़ी के कारण बंद़
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