दिल में अपनों के खोने का दर्द तो सिर से आशियाना छिन जाने का अफसोस

Updated at : 28 Apr 2015 3:15 AM (IST)
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दिल में अपनों के खोने का दर्द तो सिर से आशियाना छिन जाने का अफसोस

मोतिहारी : प्राकृतिक आपदा कब, कहां और किस वक्त दस्तक देगी, यह कहना जितना मुश्किल है, उतना ही उसके प्रभाव से होने वाले बर्बादी के मंजर का अंदाजा लगाना. नेपाल में आये भूकंप से काठमांडू सहित अन्य शहरों में हुई तबाही इसका साक्ष्य है. भूकंप का केंद्र बिंदु रहे नेपाल व इसके प्रभाव में आनेवाला […]

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मोतिहारी : प्राकृतिक आपदा कब, कहां और किस वक्त दस्तक देगी, यह कहना जितना मुश्किल है, उतना ही उसके प्रभाव से होने वाले बर्बादी के मंजर का अंदाजा लगाना. नेपाल में आये भूकंप से काठमांडू सहित अन्य शहरों में हुई तबाही इसका साक्ष्य है. भूकंप का केंद्र बिंदु रहे नेपाल व इसके प्रभाव में आनेवाला राज्य बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान सहित कई प्रदेश में हजारों की संख्या में लोगों की मौत हुई है तो कई लोग बेघर हो गये हैं.
भूकंप के झटकों ने लोगों की रची-बसी दुनिया को उजाड़ दिया है. लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई से एक-एक तिनका जोड़ आशियाना बनाया था. लेकिन आज वे सड़क पर आ गये हैं. ऐसे लोगों के दिल में अपनों के बिछड़ने का दर्द है तो सामान्य जन-जीवन होने पर सिर छिपाने की चिंता भी. आखिर इतनी जल्दी फिर से कोई भला लाखों रुपये कहां से लायेगा, ताकि वह सिर छिपाने के लिए फिर से नया आशियाना बना सके. मकान का बीमा नहीं कराने वाले लोगों के लिए स्थिति सामान्य होने पर ऐसे कई सवाल बड़ी चिंता बन गयी है.
बीमा को ले नहीं हैं संजीदा
आपदा जैसी समस्याओं में होने वाले नुकसान को लेकर शहरवासी भी गंभीर नहीं है. मिली जानकारी के मुताबिक मोतिहारी शहर की जो आबादी है और जितने आशियाने हैं, उसका महज एक प्रतिशत ही लोगों ने निजी तौर पर अपने भवन का बीमा कराया है. यह अलग बात है कि होम लोन लेने पर बैंक के दबाव में आकर लोगों को मकान का बीमा करना पड़ता है. चूंकि इसके लिए ऋण देने वाली बैक द्वारा एग्रिमेंट में ही बीमा का प्रावधान अनिवार्य कर दिया जाता है. लेकिन निजी तौर पर मकान का बीमा कराना लोग फिजूल खर्च ही समझते हैं. लेकिन अब सवाल यह है कि अगर इस तरह के भूकंप आते हैं तो कितने ऐसे लोग हैं, जो फिर से मकान खड़ा कर सकते हैं.
आपदा में बीमा देगा राहत
हाल में आये भूकंप में भले ही आपके मकान धराशायी नहीं हुआ हो, लेकिन झटका के प्रभाव से मकान के दीवार व छत की आयु जरू र कम हो जाती है. ऐसे में अगर आज नहीं, कुछ वर्ष बाद ही मकान क्षतिग्रस्त हो जाये तो आपको भारी आर्थिक खामियाजा भुगतना पड़ सकता है. इसके लिए जरूरी है कि लोगों को जागरूक होकर अभी भी मकान का बीमा करा लेना चाहिए.
नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के मोतिहारी शाखा के प्रबंधक एस आर ठाकुर बताते हैं कि मकान बीमा से लोगों को आपदा जैसी स्थिति में काफी राहत मिल सकती है. इसके लिए हाउस होल्ड बीमा की एक योजना है. इसमें मकान बीमा पर निर्धारित कीमत पर प्रति लाख 70 रुपये का प्रीमियम हर वर्ष देना पड़ता है.
वहीं पांच व उससे अधिक अवधि के लिए बीमा कराने पर प्रीमियम राशि में कुछ रियायत भी मिलेगी. बताया कि गृहस्वामी बीमा के तहत आग, भूकंप, बाढ़ आदि के दौरान घर में चोरी जैसी घटना पर भी मुआवजा देने का प्रावधान है. इस पॉलिसी में मकान के साथ गुड्स की भी बीमा होती है.
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