समय से आते वन विभाग के अधिकारी को पकड़ा जाता बाघ

Updated at : 24 Feb 2015 2:54 AM (IST)
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समय से आते वन विभाग के अधिकारी को पकड़ा जाता बाघ

अरेराज : अगर समय पर वन विभाग के आलाधिकारी पहुंचे होते तो ससमय बाघ को पकड़ लिया जाता़ अगर बाघ पकड़ में आ गया होता तो दहशत में रहनेवाले ग्रामीण राहत की सांस लेते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ़ सूचना के आठ घंटे बाद वन विभाग के आला अधिकारी पहाड़पुर थाना क्षेत्र के पश्चिमी सिसवा पंचायत […]

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अरेराज : अगर समय पर वन विभाग के आलाधिकारी पहुंचे होते तो ससमय बाघ को पकड़ लिया जाता़ अगर बाघ पकड़ में आ गया होता तो दहशत में रहनेवाले ग्रामीण राहत की सांस लेते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ़ सूचना के आठ घंटे बाद वन विभाग के आला अधिकारी पहाड़पुर थाना क्षेत्र के पश्चिमी सिसवा पंचायत के रायकररिया नयाटोला गांव पहुंच़े तब तक बाघ अपना स्थान छोड़ चुका था़
बाघ किस दिशा में गया, यह किसी को पता नहीं है़ बाघ के पैरों के निशान को अधिकारी ढूंढते रहे पर देर शाम तक सफ लता नहीं मिली़ ग्रामीण सूत्रों की माने तो बाघ को रविवार के 11 बजे दिन में भी देखा गया था, जिसकी सूचना अनुमंडल पदाधिकारी को दो बजे दी गयी़ सूचना मिलते ही एसडीओ एसएस पांडेय, डीएसपी नुरूल हक, डीसीएलआर मदन कुमार सहित अनुमंडल के सभी थाना पुलिस व पदाधिकारी घटनास्थल पर पहुंच़े एसडीओ द्वारा वन विभाग को लगातार सूचना दी जाती रही़
रात 10 बजे पहुंचे डीएफ ओ
ग्रामीणों के अनुसार दस बजे रात्रि में वन विभाग पदाधिकारी मोतिहारी व बेतिया अपने टीम के साथ स्थल पर पहुंचे, वहीं सीवान व पटना की टीम सुबह के तीन बजे पहुंची़ पदाधिकारी द्वारा सुबह पांच बजे से बाघ की खोज शुरू की गयी, परंतु समाचार प्रेषण तक सफ लता नहीं मिली थी़ ग्रामीण दबे जुबान इस बात की चर्चा करते सुने गये कि अगर अधिकारी रविवार को सक्रिय हुए होते तो बाघ पकड़ में आ गया होता़
नहीं थी रोशनी
रविवार की शाम होते ही ज्यों-ज्यों अंधेरा बढ़ने लगा, त्यों-त्यों ग्रामीणों की बेचैनी बढ़ने लगी़
विभाग के ओर से उस स्थल पर प्रकाश की व्यवस्था की गयी होती तो बाघ भागने में सफ ल नहीं होता़ साथ ही उपस्थित पदाधिकारी का भी ध्यान उसपर कड़ी नजर रहता़
दहशत में कटी रात
बाघ का डर लोगों में इस प्रकार था कि वे अपने बाल-बच्चों के साथ घर में दुबके रह़े वहीं ग्रामीणों को अपने मवेशियों की भी चिंता सता रही थी़ बाघ कब किधर से हमला बोल दे, लोगों में इसका खौफ था़ रात भर लोग छत पर बैठक कर आहट लेते रह़े वहीं सुबह जब बाघ के भागने की सूचना मिल तो ग्रामीणों और भी सहम गय़े अपने बच्चों व मवेशियों की रक्षा में लगे रह़े
28 किमी में लगा आठ घंटा
ग्रामीणों की माने तो स्थल से मोतिहारी की दूरी मात्र 28 किलोमीटर है़. लेकिन इतनी दूरी तय करने में वन विभाग को आठ घंटा समय लगा़ दोपहर दो बजे सूचना के बाद वन विभाग के आलाधिकारी रात्रि दस बजे पहुंच़े ग्रामीणों का कहना है कि जब अनुमंडल के बड़े अधिकारी फोन करते हैं तो इतना समय आने में लगता है तो आम जनता फ ोन करेगी तो क्या होगा़
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