मुजफ्फरपुर बैंक ऑफ इंडिया के शाखा प्रबंधक पर केस

Updated at : 05 Jun 2014 5:55 AM (IST)
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मुजफ्फरपुर बैंक ऑफ इंडिया के शाखा प्रबंधक पर केस

मोतिहारीः नगर थाना में बुधवार को मुजफ्फरपुर बैंक ऑफ इंडिया पैगंबरपुर कोल्हुआ के तत्कालीन शाखा प्रबंधक सहित जमीन की खरीद-बिक्री करने वाले तीन बिचौलियों के विरुद्ध जालसाजी व धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ है. यह प्राथमिकी पीपराकोठी जीवधारा निवासी रंजीत कुमार गुप्ता के लिखित शिकायत पर दर्ज हुआ है. जिसमें तत्कालीन शाखा प्रबंधक के अलावे […]

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मोतिहारीः नगर थाना में बुधवार को मुजफ्फरपुर बैंक ऑफ इंडिया पैगंबरपुर कोल्हुआ के तत्कालीन शाखा प्रबंधक सहित जमीन की खरीद-बिक्री करने वाले तीन बिचौलियों के विरुद्ध जालसाजी व धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ है. यह प्राथमिकी पीपराकोठी जीवधारा निवासी रंजीत कुमार गुप्ता के लिखित शिकायत पर दर्ज हुआ है.

जिसमें तत्कालीन शाखा प्रबंधक के अलावे मुजफ्फरपुर राहुल नगर रोड नंबर तीन निवासी अनिवेश कुमार, उसके गाड़ी के चालक रामबाबू झा व अरुण कुमार मुखर्जी को आरोपित किया गया है. नगर इंस्पेक्टर प्रियरंजन ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर मामले की छानबीन शुरू कर दी गयी है.

क्या है मामला

दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, रंजीत ने मोतिहारी शहर के बजाजपट्टी मुहल्ला में भूमि खरीदने के मुजफ्फरपुर के राहुल नगर रोड नंबर 3 निवासी अनिवेश कुमार से बातचीत की. 50 लाख कीमत तय होने के बाद रंजीत को कथित जमीन मालिक अरुण मुखर्जी से बातचीत कराने अनिवेश मुजफ्फरपुर ले गया. रंजीत को मुजफ्फरपुर बैंक ऑफ इंडिया का अरुण मुखर्जी के नाम से जारी एकाउंट नंबर दिया गया, रंजीत ने 11 मई 2011 को 10 लाख रुपये मुखर्जी के एकाउंट से ट्रांसफर किया. जबकि अनिवेश ने उसके बाद दो बार में 12 लाख रुपये कैश लिया. इस बीच उसी जमीन का कुछ हिस्सा मोतिहारी निबंधन कार्यालय में राजेश कुमार व नीतू कुमारी के नाम से रजिस्ट्री हुआ, जिसमें रंजीत भी गवाह बना.

जालसाजी का भंडाफोड़

भूमि रजिस्ट्री के समय रंजीत को पता चला कि अरुण मुखर्जी के पिता निलेश्वर मुखर्जी है, जबकि उसे अरुण को पिता का नाम सिधेश्वर मुखर्जी बताया गया था. रंजीत ने इस बात पर जिरह किया तो किसी ने संतोषपद्र जवाब नहीं दिया. उसने जमीन खरीदने से इनकार करते हुए अपना पैसा वापस मांगा. अनिवेश ने रंजीत को पांच व सात लाख का दो चेक दिया, जबकि बाकी का दस लाख उसके एकाउंट में ट्रांसफर करने की बात कही. रंजीत को दिया गया चेक बाउंस कर गया. दबाव देने पर धमकी देते हुए पैसा देने से इनकार कर दिया.

शाखा प्रबंधक की मिलीभगत

रंजीत ने जब तहकीकात की तो पता चला कि अरुण मुखर्जी ने बैंक ऑफ इंडिया पैगंबरपुर मुजफ्फरपुर के शाखा प्रबंधक को मेल में लेकर फर्जी नाम से एकाउंट खोला है. अरुण मुखर्जी के नाम से जारी एकाउंट पर उसके पिता का नाम सिधेश्वर मुखर्जी अंकित है, जबकि एकाउंट पर अनिवेश के गाड़ी चालक रामबाबू झा की तसवीर लगी है. रंजीत ने आरोप लगाया है कि उक्त एकाउंट सत्य का छुपा कर शाखा प्रबंधक की मिली भगत से जालसाजी करने के लिए खोला गया है.

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