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झाड़ियों में कैद है डॉ राजेंद्र बाबू की प्रतिमा

मोतिहारी : एक ओर चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारी चल रही है. गांधी जी व उनके जुड़े धरोहर व स्थलों की सफाई व सौंदर्यीकरण की योजना बन रही है, लेकिन मोतिहारी के ह्दयस्थली झील किनारे डाॅ राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा पर काले धब्बे आ गये हैं. झाड़ियों के बीच स्थापित […]

मोतिहारी : एक ओर चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारी चल रही है. गांधी जी व उनके जुड़े धरोहर व स्थलों की सफाई व सौंदर्यीकरण की योजना बन रही है, लेकिन मोतिहारी के ह्दयस्थली झील किनारे डाॅ राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा पर काले धब्बे आ गये हैं. झाड़ियों के बीच स्थापित प्रतिमा कह रही है कि देश के आजादी की लड़ाई में भी चंपारण में गांधी जी के साथ था.

प्रथम शिक्षास्थली बड़हरवा लखनसेन में गांधी जी, कस्तूरबा गांधी के साथ शिक्षा दान किया था. आजादी के बाद देश का राष्ट्रपति बन बिहार को गौरवान्वित किया. फिर भी ताला बंद पार्क में झाड़-झंखार के बीच प्रशासन के लोग हमें क्यों छोड़ दिये हैं. जी हां यह सत्य है. शहर के डाॅ राजेंद्र प्रसाद बाल उद्यान की, जहां कभी बच्चे खेलते थे.
वहां अभी झाड़-झंखार के बीच सांप का बसेरा है. लोग गेट पर खड़ा होना नहीं चाहते कि कहीं कोई बिच्छू काट लेगा. नौ जनवरी 2003 को उक्त बाल उद्यान का शिलान्यास तत्कालीन एमएलसी डाॅ महाचंद्र प्रसाद सिंह ने किया. संस्थापक थे ई. रमेश वर्मा. पार्क बना, डाॅ राजेंद्र बाबू की खुले में मूर्ति लगी और वर्षों से उक्त पार्क की स्थिति क्या है. किसी से छुपी नहीं है और प्रशासन व नगर परिषद के लोग झांकने का प्रयास तक नहीं किया. अगर शहर का पार्क है तो नियमानुसार नगर परिषद की जिम्मेवारी ज्यादा है.
देश के प्रथम राष्ट्रपति का नाम लेते ही लोग भले ही आज गौरवान्वित महसूस करते हैं, लेिकन उनकी प्रतिमा को देखकर यह गौरव शायद आपको थोड़ी देर के लिए सोचने पर मजबूर कर देेगा.
पार्क के स्थान पर था सिविल कोर्ट
नगर भवन का नाम डाॅ राजेंद्र नगर भवन है. इसी उद्देश्य बने पार्क में उनकी प्रतिमा लगाने की योजना बनी थी. उक्त स्थान पर पहले सिविल कोर्ट था. 1934 के भूकंप के बाद कोर्ट वर्तमान कलेक्ट्रेट के पास चला गया. पुराने कोर्ट की भूमि पर बालकन जी बारी (बच्चों की फुलवारी) संस्था चलाते थे. कुछ भाग में नगर भवन, बंगला स्कूल व मदरसा है. भूमि केसरे हिंद की बतायी जाती है. उनके प्रतिमा लगाने के समय लोगों ने विरोध किया था, लेकिन पार्क की स्थिति में बदलाव न होने पर सहमति बनी व प्रतिमा का अनावरण भी हो गय. राजेंद्र सेवा संस्थान का बोर्ड भी लगा. लेकिन आज स्थिति यह है कि महापुरुष की प्रतिमा व पार्क देख रोंगटे खड़े हो जायेंगे.
एक नजर शहर के पार्कों पर
गांधी बाल उद्यान, मनरेगा पार्क, ऑरवेल पार्क, अटल उद्यान, सत्याग्रह पार्क, डाॅ राजेंद्र प्रसाद बाल उद्यान है. राजा बाजार बाल निकेतन के पास करीब एक करोड़ की लागत से विवेकानंद पार्क बनाने की स्वीकृति मिली है.
पूर्व एमएलसी डाॅ राजेंद्र प्रसाद सिंह के फंड से पार्क विकास व राजेंद्र बाबू की मूर्ति लगी है. अभी विभाग को स्थानांतरण नहीं हुआ है. स्थानांतरण के लिए नगर विकास विभाग को पत्र लिखा गया है.
हरवीर गौतम, इओ, नप मोतिहारी
पार्क सरकारी भूमि पर है. सफाई, सौंदर्यीकरण की जिम्मेवारी नप की बनती है. सभी ऐतिहासिक मूर्ति व स्थलों के विकास में प्रशासन व जिलेवासियों का सहयोग अपेक्षित है.
प्रो. चंद्रभूषण पांडेय, अध्यक्ष
सरकार से डॉ राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा के बारे में बातचीत चल रही है. फंड का अभाव है. फंड आते सफाई व सौंदर्यीकरण होगी. उक्त पार्क डाॅ राजेंद्र सेवा संस्थान ट्रस्ट के अधीन है.
डाॅ इशा रमेश, संस्था के चेयरमैन
Prabhat Khabar Digital Desk
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