घर बना नदी की धारा, तो बांध बना सहारा
Updated at : 28 Aug 2017 11:13 AM (IST)
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ढाका (मोतिहारी) : वैसे तो बाढ़ हर गांव में कुछ न कुछ बर्बादी की कहानी लिख गयी, लेकिन ढाका के बंगाली टोला (पंचायत फुलवरिया) की कहानी राहत रूपी दवा से भी न छूटने वाली दर्द बन गयी है. लालबकेया बांध टूटने के साथ जिला पार्षद मिसबाहुल सहित करीब दो दर्जन लोगों का घर नदी की […]
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ढाका (मोतिहारी) : वैसे तो बाढ़ हर गांव में कुछ न कुछ बर्बादी की कहानी लिख गयी, लेकिन ढाका के बंगाली टोला (पंचायत फुलवरिया) की कहानी राहत रूपी दवा से भी न छूटने वाली दर्द बन गयी है. लालबकेया बांध टूटने के साथ जिला पार्षद मिसबाहुल सहित करीब दो दर्जन लोगों का घर नदी की धारा बन गयी.
घर के ईंट दो-तीन किमी तक बह कर चले गये, जो 12 दिनों बाद पानी घटने के साथ नदी के धारा की भयावहता की कहानी कह रहे हैं. बांध टूटने की आशंका थी इसलिए लोग घर छोड़ चुके थे. 24 घंटे बांध पर भूखे-प्यासे बिताये. तब आसपास के लोगों से भोजन का पैकेट मिला.
दस दिनों तक बांध पर गुजारने के बाद जिप सदस्य अपने भाई के घर में रह रहे हैं. पूछने पर कहा कि 12 दिनों बाद आप (प्रभात खबर) ने मेरे साथ बंगाली टोला का दर्द नहीं पूछा. टूटे घर व ईंट के टुकड़े को दिखाते हुए सवाल करते हैं कि, आप ही बताये बर्बादी क्या हुई है. बंगाली महतो के नाम पर बसे बंगाली टोला के सफरू देवान कहते हैं कि बांध पर बानी चार गो लइका के घर भी नदी के धारा बन गईल.
कमोवेश यही दास्तान है दीना महतो, सियाराम महतो, अंसारूल हक आदि के घर जाने के लिए लोग बांस के चचरी के सहारे अब पहुंच रहे हैं. कुछ गरीब पानी की धारा के साथ बह गये. लोग पुराने ईंट को भी चुन रहे हैं. इधर एसडीओ मनोज कुमार रजक ने बताया कि क्षतिग्रस्त मकानों का सर्वे किया जा रहा है. नियमानुसार सहायता राशि दी जायेगी.
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