CAG Report : रखे रह गये PSU के एकाउंट में तीन हजार करोड़, घाटे में चल रहे हैं बिहार के आधे से अधिक PSU

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राज्य के निगम, लिमिटेड कंपनी समेत अन्य सभी लोक उपक्रम या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) में आधे से अधिक की स्थिति खराब है. 79 पीएसयू में 44 पूरी तरह से अक्रियाशील और 35 क्रियाशील हैं,परंतु इनके निष्क्रिय बैंक खातों में दो हजार 926 यानी करीब तीन हजार करोड़ अनुपयोगी पड़े हुए हैं.

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पटना. राज्य के निगम, लिमिटेड कंपनी समेत अन्य सभी लोक उपक्रम या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) में आधे से अधिक की स्थिति खराब है. 79 पीएसयू में 44 पूरी तरह से अक्रियाशील और 35 क्रियाशील हैं,परंतु इनके निष्क्रिय बैंक खातों में दो हजार 926 यानी करीब तीन हजार करोड़ अनुपयोगी पड़े हुए हैं. इसमें क्रियाशील पीएसयू के 150 खातों में 1998-99 तथा अक्रियाशील पड़े पीएसयू के एक हजार 164 खातों में 1977-78 से राशि पड़ी हुई है.

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70 पीएसयू पर लोन और एक्विटी के रूप में चार हजार 722 करोड़ रुपये का बोझ है. इसमें 87 प्रतिशत रुपये लोन के रूप में ही लिये हुए हैं. राज्य के आधे से अधिक पीएसयू लगातार घाटे में चल रहे हैं और इनका घाटा बढ़ता ही जा रहा है. 2015-16 में इनका घाटा 614 करोड़ था, जो 2017-18 तक बढ़ कर 667 करोड़ हो गया. वर्तमान में यह घाटा 700 करोड़ के आसपास पहुंच गया है.

हालांकि, राज्य में सात पीएसयू ऐसे भी हैं, जिनकी स्थिति अच्छी है और वे मुनाफे में चल रहे हैं. इनका मुनाफा 224 करोड़ रुपये के आसपास है. इसमें बिहार राज्य सड़क विकास निगम, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम, बिहार राज्य भवन निर्माण निगम, बिहार राज्य शिक्षा आधारभूत विकास निगम लिमिटेड समेत अन्य शामिल हैं.

राज्य के बेहतर कार्य करने वाले सभी पीएसयू का सालाना टर्न ओवर 17 हजार 342 करोड़ है, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 3.56 प्रतिशत है. राज्य के 79 पीएसयू में पूंजीगत निवेश 42 हजार 548 करोड़ रुपये का है. इसमें सबसे ज्यादा 88 प्रतिशत हिस्सेदारी पॉवर सेक्टर की कंपनियों की है, परंतु 79 पीएसयू की तुलना में बेहतर काम करने वाले सात निगमों की संख्या काफी कम है.

हाल में जारी सीएजी की रिपोर्ट में भी इसका प्रमुखता से उल्लेख किया गया है. सीएजी ने राज्य सरकार को इन पीएसयू में खासकर इनके बैंक खातों में सुधार करने की बात भी कही है. इस रिपोर्ट में मुनाफा कमाने वाले कुछ निगमों में भी वित्तीय गड़बड़ी की बात कही गयी है.

आयकर में गड़बड़ी के कारण जुर्माना देना पड़ा

बिहार राज्य सड़क विकास निगम लिमिटेड ने बिना किसी जरूरत के 193 करोड़ रुपये हुडको से लोन ले लिया, जिससे निगम को 37 करोड़ 75 लाख रुपये का अतिरिक्त ब्याज चुकाना पड़ा. इससे राज्य के खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा है. इसके अलावा इसी निगम और बिहार राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड ने आयकर में गड़बड़ी के कारण एक करोड़ 27 लाख रुपये का जुर्माना देना पड़ा.

इसी तरह बिहार स्टेट फूड एंड सिविल सप्लाइ निगम लिमिटेड ने लोन की दर तय करने में लापरवाही की, जिससे दो करोड़ 36 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ा. बिहार राज्य व्हेवरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड ने सप्लायर को अनधिकृत तरीके से चार करोड़ 33 लाख रुपये का पेमेंट कर दिया है.

Posted by Ashish Jha

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