Buxar News: जब भी धरती पर बढ़ा अत्याचार, दुष्टों के संहार के लिए ईश्वर ने लिया अवतार : गोविंद कृष्ण

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Buxar News: जब भी धरती पर बढ़ा अत्याचार, दुष्टों के संहार के लिए ईश्वर ने लिया अवतार : गोविंद कृष्ण

चौसा जब-जब धरती पर अत्याचार बढ़ता है तो दुष्टों के संहार के लिए भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेते हैं.

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चौसा

जब-जब धरती पर अत्याचार बढ़ता है तो दुष्टों के संहार के लिए भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेते हैं. भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की अंधेरी आधी रात को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा के कारागार में वासुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया.

उक्त बातें प्रखण्ड के रामपुर गांव में सर्व कल्याण नवजीवन महोत्सव के तहत चल रहे श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन भागवत कथा का वर्णन करते हुए वृन्दावन धाम से चलकर आए कथावाचक आचार्य गोविन्द कृष्ण महाराज ने श्री कृष्ण जन्म प्रसङ्ग की चर्चा करते हुए कहा. उन्होंने बताया कि द्वापर युग में भोजवंशी राजा उग्रसेन मथुरा में राज्य करता था. उसके पुत्र कंस ने उसे गद्दी से उतार दिया और स्वयं मथुरा का राजा बन बैठा. कंस की एक बहन देवकी थी, जिसका विवाह वासुदेव से हुआ था. जब कंस अपनी बहन देवकी को ससुराल पहुंचाने ले जा रहा था. उसके पुत्र कंस ने उसे गद्दी से उतार दिया और स्वयं मथुरा का राजा बन बैठा. कंस की एक बहन देवकी थी, जिसका विवाह वासुदेव से हुआ था. जब कंस अपनी बहन देवकी को ससुराल पहुंचाने ले जा रहा था. तभी रास्ते में आकाशवाणी हुई. कंस जिस देवकी को तू बड़े प्रेम से ले जा रहा है, उसी के गर्भ में तेरा काल जन्म लेगा. कंस ने वासुदेव और देवकी को कारागृह में डाल दिया. वासुदेव देवकी के एक-एक करके सात बच्चे हुए और सातों को जन्म लेते ही कंस ने मार डाला. जब आठवां बच्चा होने वाला था, तब कारागार में उन पर कड़े पहरे बैठा दिए गए. जिस समय वासुदेव देवकी को पुत्र पैदा हुआ, उसी समय संयोग से नंद की पत्नी यशोदा के गर्भ से एक कन्या का जन्म हुआ. जो सिर्फ एक माया थी. जिस कोठरी में देवकी वासुदेव कैद थे, उसमें अचानक प्रकाश हुआ और उनके सामने शंख, चक्र, गदा, पद्म धारण किए चतुर्भुज भगवान प्रकट हुए. भगवान ने उनसे कहा कि अब मैं पुन: नवजात शिशु का रूप धारण कर लेता हूं. तुम मुझे इसी समय अपने मित्र नंद जी के घर वृंदावन में भेज आओ और उनके यहां जो कन्या जन्मी है, उसे लाकर कंस के हवाले कर दो. वासुदेव नवजात शिशु रूप श्रीकृष्ण को लेकर कारागार से निकल पड़े और अथाह यमुना को पार कर नंद जी के घर पहुंचे. इस अवसर पर उपस्थित हज़ारों श्रोताओं ने भगवान श्रीकृष्ण जन्म की नाच गाकर उत्सव के रूप में खुशी मनायी.

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Raviranjan Kumar Singh

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