आंधी से तीन हिस्सों में बंटा नैनीजोर पीपा पुल, बिहार-यूपी का संपर्क भंग

Published by : DEVENDRA DUBEY Updated At : 05 May 2026 10:15 PM

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आंधी से ज्यादा बालू ने तोड़ा पुल, एक सप्ताह में दूसरी बार हादसा

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ब्रह्मपुर.

प्रखंड के नैनीजोर स्थित गंगा नदी पर बना पीपा पुल सोमवार की शाम आयी तेज आंधी और झोंकों के कारण ताश के पत्तों की तरह बिखर गया. तेज हवा के दबाव से पीपा पुल तीन अलग-अलग हिस्सों में बंट गया, जिससे बिहार और उत्तरप्रदेश को जोड़ने वाला यातायात पूरी तरह ठप हो गया है. राहत की बात यह रही कि इस हादसे में जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन पुल के बीच में कुछ वाहन और राहगीर घंटों फंसे रहे. सोमवार को विवाह का शुभ मुहूर्त होने के कारण पुल पर आवागमन अन्य दिनों की तुलना में काफी अधिक था. शाम के समय जब अचानक मौसम बदला और तेज आंधी आयी, तो पीपों को जोड़कर रखा गया नट-बोल्ट और रस्से दबाव नहीं झेल सके. देखते ही देखते पुल तीन भागों में विभक्त होकर गंगा की धारा में बहने लगा. पुल के बीच के हिस्से में फंसे वाहन चालकों और यात्रियों के बीच चीख-पुकार मच गयी. स्थानीय मल्लाहों और ग्रामीणों की मदद से सुरक्षित स्थान पर पहुंचे लोगों ने राहत की सांस ली. प्रशासनिक दावों की पोल खोलते हुए यह पुल एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार दुर्घटनाग्रस्त हुआ है. इससे विभाग की कार्यप्रणाली और मरम्मत की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. नैनीजोर पीपा पुल के अस्तित्व पर भारी ”सफेद बालू”, नियम ताक परगंगा की लहरों पर टिका नैनीजोर पीपा पुल महज प्राकृतिक आपदा या आंधी के कारण नहीं टूट रहा, बल्कि इसके पीछे ””””सफेद बालू”””” का काला खेल और ओवरलोडिंग का भारी बोझ है. नियमों को ताक पर रखकर दिन-रात दौड़ रहे बालू लदे ट्रैक्टरों ने इस अस्थायी पुल के ज्वाइंट्स को समय से पहले ही खोखला कर दिया है. नियमों की धज्जियां उड़ाता अवैध परिवहन: पीपा पुल की संरचना हल्के वाहनों और राहगीरों की सुविधा के लिए बनायी गयी है. तकनीकी रूप से इस पर भारी मालवाहक वाहनों का परिचालन पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन हकीकत इसके उलट है. यूपी के सीमावर्ती इलाकों और स्थानीय दियारा क्षेत्रों से सफेद बालू का उठाव कर दर्जनों ट्रैक्टर रोजाना इस पुल से गुजरते हैं. क्षमता से दो गुना अधिक बालू लदे ये वाहन जब पुल के ऊपर से गुजरते हैं, तो लोहे के पीपों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है. इसी दबाव के कारण पीपों को जोड़ने वाले नट-बोल्ट ढीले हो रहे हैं और लोहे की चादरें कमजोर पड़ रही हैं.

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