बक्सर गोलंबर पर पांच दिवसीय योग शिविर का दूसरा दिन, बच्चों को सिखाए गए संस्कार के साथ सेहत के गुर

Published by : kumarsuryakant Updated At : 05 May 2026 3:31 PM

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बच्चों को सिखाए गए योग

Buxar News: बक्सर गोलंबर पर पतंजलि योग शिविर के दूसरे दिन 12 तरह के योग प्रणाम सिखाए गए. जिसमें सूर्य नमस्कार, घुटना दर्द, कमर दर्द, शुगर, सिरदर्द, बीपी से जुड़े योग्य शामिल रहे. इस शिविर के दौरान बच्चों को भी योग सिखाया गया.

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Buxar News: पतंजलि योग समिति और भारत स्वाभिमान ट्रस्ट, हरिद्वार के बैनर तले बक्सर जिला योग परिवार की ओर से पांच दिवसीय योग शिविर का आयोजन किया जा रहा है. मंगलवार को बक्सर गोलंबर पर शिविर का दूसरा दिन समाप्त हो गया.

12 तरह की जॉगिंग क्रिया कराई गई

पतंजलि योग समिति के राज्य सह प्रभारी योगाचार्य अवध नारायण चौबे, पतंजलि योग समिति बिहार दक्षिणी और जिला प्रभारी अरविंद कुमार सिंह की देखरेख में सुबह 5:00 से 6:00 बजे तक योगाभ्यास कराया गया. शिविर में 12 तरह की जॉगिंग क्रिया, सूर्य नमस्कार, आठ प्रणाम के साथ घुटना दर्द, कमर दर्द, शुगर, सिरदर्द, बीपी और कब्ज जैसी बीमारियों से राहत के लिए अलग-अलग आसन और छोटे व्यायाम कराए गए.

लोगों ने क्या कहा ?

शिविर में शामिल लोगों ने बताया कि एक ही दिन के योगाभ्यास से शरीर हल्का और ऊर्जावान महसूस हो रहा है. योगाचार्य ने कहा, “सबसे पहला धन शरीर है. स्वस्थ शरीर ही निरोग जीवन का आधार है.”

बच्चों को घर का खाना खाने की दी गई सलाह

इसके बाद रेड वांट्स ग्लोबल स्कूल में सुबह 8:00 से 9:30 बजे तक बच्चों को योग सिखाया गया. बच्चों को बताया गया कि शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी है। सुबह उठकर माता-पिता व बड़ों को प्रणाम करें, लंच में घर का बना खाना हीं लेकर जाएं और फास्ट फूड खाने से बचें. योग करें, निरोग रहें और दवा का पैसा पढ़ाई और पौष्टिक भोजन में लगाएं.

पढ़ाई के साथ संस्कार भी जरूरी

योगाचार्य ने कहा कि पढ़ाई के बीच थकान होने पर हाथ-पैर घुमाना, कमर और गर्दन का हल्का व्यायाम कर लेना चाहिए. आज के समय में शिक्षा तो मिल रही है, लेकिन संस्कार की कमी की वजह से वृद्धाश्रम बढ़ रहे हैं. बच्चों को इस पर नियंत्रण करना है, क्योंकि वे देश का भविष्य हैं.

कार्यक्रम को सफल बनाने में स्कूल प्रबंधक कुंदन सिंह, प्राचार्या भारती पाठक, प्रवीण कुमार, चंदन कुमार सहित सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं का योगदान रहा. वक्ताओं ने कहा कि योग सदियों पुराना है, लेकिन स्वामी रामदेव ने इसे सरल बनाकर गांव-गांव तक निःशुल्क पहुंचाया है. योग को अपनाने वाला व्यक्ति योग्य बन जाता है.

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