बक्सर में उपादान विक्रेताओं का 15 दिवसीय प्रशिक्षण शुरू, संतुलित उर्वरक उपयोग से मृदा संरक्षण पर जोर

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15 दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

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बक्सर के कृषि विज्ञान केंद्र में उपादान (इनपुट) विक्रेताओं के लिए 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ है. इसका उद्देश्य खाद एवं उर्वरकों के संतुलित उपयोग की वैज्ञानिक जानकारी देना है, ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और प्रदूषण को रोका जा सके. प्रशिक्षण में जैविक और प्राकृतिक खेती पर भी जोर दिया गया.

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Buxar Fertilizer Dealers Training : कृषि विज्ञान केंद्र, लालगंज में सोमवार से उपादान (इनपुट) विक्रेताओं के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन (Integrated Nutrient Management) विषय पर 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ. प्रशिक्षण का उद्देश्य विक्रेताओं को खाद एवं उर्वरकों के संतुलित उपयोग की वैज्ञानिक जानकारी देना है, ताकि मृदा की उर्वरता बनी रहे, जल प्रदूषण को रोका जा सके और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हो.

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Buxar News : आईसीएआर के निर्देशन में चल रहा प्रशिक्षण

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के निर्देशन में आयोजित किया जा रहा है. कार्यक्रम का उद्घाटन जिला कृषि पदाधिकारी धर्मेंद्र कुमार और कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक सह प्रमुख डॉ. देवकरण ने संयुक्त रूप से किया.

अंधाधुंध उर्वरक उपयोग से घट रही मिट्टी की उर्वरता

वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. देवकरण ने कहा कि बढ़ती आबादी, घटती कृषि भूमि और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है. उन्होंने कहा कि अधिक उत्पादन की होड़ में रासायनिक उर्वरकों का असंतुलित और अंधाधुंध प्रयोग किया जा रहा है, जिससे खेतों की उर्वरा शक्ति लगातार घट रही है. इस स्थिति से बचने के लिए पोषक तत्वों का एकीकृत प्रबंधन और संतुलित उर्वरक उपयोग बेहद जरूरी है.

उपादान विक्रेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण

जिला कृषि पदाधिकारी धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि किसानों के साथ-साथ जिले के सभी उपादान विक्रेताओं को भी पौधों के आवश्यक पोषक तत्वों की पूरी जानकारी होनी चाहिए. सही समय पर संतुलित मात्रा में खाद एवं उर्वरकों के प्रयोग से फसल उत्पादन बढ़ेगा और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता भी कम होगी.

जैविक और प्राकृतिक खेती पर दिया गया जोर

कृषि विज्ञान केंद्र के विषय वस्तु विशेषज्ञ हरिगोविंद ने प्रशिक्षण के दौरान जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने हरी खाद और जैव उर्वरकों के अधिक उपयोग से मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार और टिकाऊ कृषि प्रणाली विकसित करने की बात कही.


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