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अनुमंडल अस्पताल के डॉक्टर हिंसा के विरोध में हड़ताल पर, ओपीडी ठप, मरीज परेशान

Updated at : 22 Jan 2026 10:27 PM (IST)
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अनुमंडल अस्पताल के डॉक्टर हिंसा के विरोध में हड़ताल पर, ओपीडी ठप, मरीज परेशान

शुक्रवार को भी ओपीडी सेवाएं बंद रहेंगी, हालांकि आपातकालीन सेवाएं यथावत जारी रहेंगी.

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डुमरांव. सदर अस्पताल में डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार, मारपीट और तोड़फोड़ की घटना के विरोध में अनुमंडल क्षेत्र के सभी सरकारी अस्पतालों के चिकित्सक को सामूहिक हड़ताल पर चले गये हैं. गुरुवार को अनुमंडल अस्पताल समेत सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की ओपीडी सेवाओं का पूर्ण बहिष्कार किया गया. चिकित्सकों ने स्पष्ट किया है कि शुक्रवार को भी ओपीडी सेवाएं बंद रहेंगी, हालांकि आपातकालीन सेवाएं यथावत जारी रहेंगी. ओपीडी बंद, दूर-दराज से आए मरीज लौटे : हड़ताल के कारण गुरुवार को बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए अनुमंडल अस्पताल पहुंचे, लेकिन ओपीडी बंद रहने से उन्हें बिना इलाज कराए ही वापस लौटना पड़ा. खासकर ग्रामीण इलाकों से आए मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी. कई मरीज सुबह से अस्पताल परिसर में डॉक्टरों के आने का इंतजार करते रहे. गंभीर हालत वाले मरीजों को इमरजेंसी में इलाज दिया जाता रहा, जिससे थोड़ी राहत रही. 20 जनवरी की रात की घटना से उपजा विवाद : पूरा मामला 20 जनवरी की रात का बताया जा रहा है. जानकारी के अनुसार तियरा गांव निवासी राजेश कुमार सिंह की पत्नी देवंती देवी को उल्टी-दस्त की शिकायत पर परिजन रात में सदर अस्पताल लेकर पहुंचे थे. इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक ने प्राथमिक उपचार किया. अस्पताल कर्मियों के अनुसार महिला को गैस और उल्टी रोकने की सुई दी गयी थी. उस समय महिला का रक्तचाप अत्यधिक बढ़ा हुआ बताया जा रहा है, जो लगभग 230/175 था. परिजनों का आरोप बनाम चिकित्सकों का पक्ष : मृतका के परिजनों का आरोप है कि पहली सुई के बाद महिला की हालत बिगड़ गयी और दूसरी सुई लगाये जाने के बाद उसकी मौत हो गयी. उनका कहना है कि इलाज में लापरवाही बरती गयी, जिसके कारण जान चली गई. वहीं, चिकित्सकों का कहना है कि महिला को तत्काल और उचित उपचार दिया गया. अत्यधिक बढ़े हुए रक्तचाप और लक्षणों को देखते हुए आशंका है कि मौत ब्रेन हैमरेज से हुई. डॉक्टरों का आरोप है कि महिला की मौत के बाद परिजनों और कुछ अन्य लोगों ने अस्पताल में हंगामा किया, डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों के साथ मारपीट की और तोड़फोड़ भी की. बार-बार हिंसा, सुरक्षा की मांग तेज : हड़ताल पर गए चिकित्सकों ने अस्पतालों में पर्याप्त पुलिस व्यवस्था और सुरक्षा इंतजाम की मांग की है. उनका कहना है कि बार-बार स्वास्थ्यकर्मियों के साथ मारपीट की घटनाएं हो रही हैं, लेकिन ठोस सुरक्षा व्यवस्था नहीं की जा रही. डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई और सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जायेगा. डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल का पुराना मामला : हाल ही में डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल में भी ऐसा ही मामला सामने आया था. ढकाईच गांव से एक्सीडेंट में घायल दो मरीज अस्पताल पहुंचे थे, जिनमें एक की हालत गंभीर थी. प्राथमिक उपचार के बाद उसे सदर अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन एंबुलेंस मिलने में देरी से परिजन आक्रोशित हो गये. उन्होंने स्ट्रेचर और गेट तोड़ दिये, जिसके बाद चिकित्साकर्मी जान बचाने के लिए छिप गये थे. इस मामले में स्वास्थ्य प्रबंधक के बयान पर 10-15 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करायी गयी थी. अब सबकी नजरें प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर टिकी हैं कि वे इस विवाद का समाधान कितनी जल्दी निकालते हैं और डॉक्टरों वक्षमरीजों-दोनों की सुरक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं को कैसे सुनिश्चित करते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AMLESH PRASAD

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AMLESH PRASAD is a contributor at Prabhat Khabar.

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