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buxar news : उदीयमान सूर्य के अर्घ संग झूमी आस्था, मांगी खुशहाली

Updated at : 28 Oct 2025 9:37 PM (IST)
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buxar news : उदीयमान सूर्य के अर्घ संग झूमी आस्था, मांगी खुशहाली

buxar news : सूर्योपासना को लेकर गंगा घाटों पर उमड़ा जनसैलाबउदीयमान सूर्य को अर्घ देकर व्रतियों ने किया पारण

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बक्सर. उदीयमान भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के साथ ही चार दिनों से चल रहा छठ महापर्व मंगलवार को संपन्न हो गया. भगवान सूर्य देव के दर्शन को व्रती घंटों तालाबों तथा नदियों के जल में खड़े रहें और ””””जल्दी-जल्दी उग हे सुरुज देव”””” आदि गीतों के बीच उनके उदित होने का इंतजार करते रहे.

इस बीच भगवान भास्कर ने काफी देर बाद बादलों की लुकाछिपी के बीच सूर्य देव ने लालिमा के साथ जैसे ही दर्शन दिया, उनकी पहली किरण पड़ते ही घाटों पर अर्घ्य देने का सिलसिला आरंभ हो गया. आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दिलाए जा रहे अर्घ्य के साथ व्रती भगवान सूर्य से सुख-शांति तथा समृद्धि की कामना किए. इसके बाद घर लौटकर व्रती छठी मइया के प्रसाद ग्रहण किए तथा पारण के साथ पिछले 36 घंटे से चल रहे निर्जला उपवास व्रत तोड़े. महापर्व के तीसरे दिन सोमवार को दोपहर बाद दिन ढलने के साथ जब सूर्य धीरे-धीरे अस्ताचल की ओर बढ़ रहे थे उसी दौरान व्रती महिलाएं छठी मइया के पारंपरिक गीत गाते हुए रंग-बिरंगे वस्त्रों में सजकर घाटों पर पहुंचने लगीं. घाट पर पहुंचकर छठी मइया की बेदी पर कलश स्थापित कीं और गंध, अक्षत, धूप व दीप आदि से पूजन-अर्चन कीं. फिर ””””कांचहि बांस के बहंगिया”””” और ””””छठी मइया दर्शन दीहीं ना”””” जैसे पारंपरिक गीतों के बीच भगवान सूर्य को डूबने का इंतजार किया और लालिमा के साथ ही भगवान जैसे अस्त होने को हुए तो धूप, दीप, नारियल व फलों से भरे कलसूप से मंत्रोच्चार के बीच अस्ताचलगामी सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किए.

नाक तक मांग भर निभायी परंपरा

व्रतधारी महिलाओं ने एक-दूसरे की मांग नाक तक भरी और श्रद्धा के साथ लोक परंपरा का निर्वहन किया. ज्योतिषाचार्य पं. मुन्ना जी चौबे ने कहा कि नाक तक सिंदूर लगाने का यह प्रतीक दीर्घ सुहाग और वैवाहिक सुख का. इस अवसर पर महिलाएं ””””भर दे अई छठी मइया मांग में सिंदूर”””” जैसे गीत गाते हुए एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर आशीर्वाद दे रही थीं. नाक तक सिंदूर लगा घर लौटीं महिलाओं की आस्था और समर्पण ने उनकी आस्था को और चटख बना दिया.

संस्कृति व आस्था का संगम बनी गंगा

लोक आस्था के महापर्व छठ पर सोमवार को पतित पावनी गंगा श्रद्धा, संस्कृति और आस्था का संगम बन गई. सूर्योपासना के इस महापर्व पर यहां ऐसी छटा बिखरी कि हर ओर भक्ति का सैलाब उमड़ गया. इस अवसर पर घाट को विशेष रूप से सजाया संवारा गया था, जहां लाखों व्रती महिलाएं अपने परिवार के साथ सूर्य देव की आराधना में लीन थीं. बिजली की जगमगाहट, फलों की टोकरी, और छठी मइया के पारंपरिक गीतों ने पूरे वातावरण को ‘भक्ति’ के रंग में सराबोर कर दिया था.

व्रतियों की मदद में लगे रहे सामाजिक संगठन के लोग

छठ घाटों पर व्रतियों की सेवा में कई सामाजिक संस्थाएं पूरी मुस्तैदी के साथ लगे थे. वे छठ घाटों के नजदीक व रास्ते में सेवा शिविर लगकर बैठे हुए थे तथा प्राथमिक उपचार की दवाई वगैरह वितरण कर रहे थे. इसके अलावा उनके द्वारा व्रतियों के सुबह में गाय का दूध के अलावा गर्म पानी, दातून व चाय की भी व्यवस्था की गयी थीं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SHAILESH KUMAR

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By SHAILESH KUMAR

SHAILESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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