बक्सर में आचार्य कृष्णानंद बोले: धर्म की आड़ में अधर्म सबसे बड़ा पाप, अत्याचार बढ़ने पर होता है भगवान का अवतार

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कथावाचक आचार्य श्री कृष्णानंद जी पौराणिक श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए

Buxar News: बक्सर के रामरेखाघाट स्थित श्री रामेश्वरनाथ मंदिर परिसर में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन आचार्य कृष्णानंद पौराणिक ने भागवत कथा का संदर्भ देते हुए उन्होंने बताया कि कंस, जरासंध और दुर्योधन जैसे पात्र भी देवताओं के उपासक थे, लेकिन जब शक्ति का उपयोग स्वार्थ और अधर्म के लिए होने लगा, तो वे राक्षस कहलाए और नारायण द्वारा मारे गए.

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बक्सर से ओंकार नाथ मिश्र की रिपोर्ट:
Buxar News:
बक्सर शहर के प्रसिद्ध रामरेखाघाट स्थित श्री रामेश्वरनाथ मंदिर परिसर में इन दिनों धार्मिक बयार बह रही है. सर्वजन कल्याण सेवा समिति सिद्धाश्रम धाम के 18वें धर्मायोजन के तहत चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन शुक्रवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. कथा का पांचवां दिन मुख्य रूप से धर्म और कर्म के सूक्ष्म भेद पर केंद्रित रहा.

धर्मशास्त्र का दूसरा नाम ही कर्म शास्त्र है

व्यास पीठ से कथावाचक आचार्य श्री कृष्णानंद जी पौराणिक ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि धर्मशास्त्र का दूसरा नाम ही कर्म शास्त्र है. सनातन धर्म की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यहां धर्म ही कर्म है और कर्म ही धर्म है. इन दोनों को कभी भी एक-दूसरे से अलग करके नहीं देखा जा सकता है. आचार्य श्री ने बताया कि श्रीमद्भागवत में मुख्य रूप से श्री हरि के कृष्ण अवतार की दिव्य कथा है. भागवत में वर्णित कृष्ण कथा के अनुसार, आज से 5,260 वर्ष पूर्व मथुरा के राजा कंस के कारागार में देवी देवकी के गर्भ से भगवान ने कृष्ण रूप में जन्म लिया था. उन्होंने कहा कि जब धर्म की आड़ में अधर्म होने लगे और कुतर्क देकर अधर्म को ही धर्म सिद्ध किया जाने लगे, तब वही कथित धर्म सबसे बड़ा पाप कर्म बन जाता है. शास्त्रों में इसे ही धर्म की ग्लानि कहा गया है.

अधर्म का उत्थान होने पर धरा पर अवतरित होते हैं ईश्वर

आचार्य श्री ने इतिहास और पुराणों का उदाहरण देते हुए कहा कि कथित रूप से जरासंध, दुर्योधन, शकुनि और दुशासन जैसे पात्र सनातन धर्मावलंबी ही थे. वे समाज में अत्यधिक धनवान, बलवान और महान कुल के थे. यही नहीं, वे भगवान शिव, सूर्य, पवन और वरुण आदि देवताओं के अनन्य उपासक थे और उन्होंने देवताओं के प्रत्यक्ष दर्शन भी किए थे. इसके बावजूद शास्त्रों में उन्हें पापी, अधर्मी और अत्याचारी कहा गया है. कंस सहित इन सभी शक्तिशाली राजाओं के वध के लिए भगवान को स्वयं श्रीकृष्ण रूप में अवतरित होकर इनका सर्वनाश करना पड़ा. इसका कारण बिल्कुल स्पष्ट है कि जब-जब धरती पर धर्म की हानि और अधर्म का उत्थान होता है, तब-तब ईश्वर का अवतार होता है.

सनातन धर्म की पुनर्स्थापना के लिए होता है प्रभु का अवतार

व्यास पीठ से शास्त्रीय रहस्यों का उद्घाटन करते हुए श्री पौराणिक जी ने कहा कि साधुओं की रक्षा, दुष्टों व राक्षसों का विनाश और सनातन धर्म की पुनः स्थापना करना ही भगवान के अवतार का मुख्य प्रयोजन है. उन्होंने एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाते हुए कहा कि भगवान जिन राक्षसों का वध करते हैं, वे सभी किसी न किसी देवता के बड़े भक्त ही होते हैं, फिर भी उन्हें राक्षस क्यों कहा जाता है. इसका उत्तर यह है कि जब तपस्या या साधना से प्राप्त शक्ति का उपयोग केवल स्वार्थ के लिए होने लगे और परमार्थ की हानि करते हुए वह सर्वजन के लिए दुखदायी बन जाए, तब वह मिथ्या धर्माचारी व्यक्ति समाज के लिए ‘राक्षस’ बन जाता है.

ऐसा व्यक्ति सनातन धर्म और मानव समाज के लिए अभिशाप बन जाता है. कंस और उसके सहयोगियों ने यही आचरण किया था, इसलिए परम शिष्य और भक्त होने के बाद भी वे नारायण के हाथों मारे गए. आज के आधुनिक समाज में भी ऐसा आचरण करने वाले लोग तेजी से फल-फूल रहे हैं.

पाखंडी बाबाओं और कथावाचकों से सतर्क रहने की दी चेतावनी

आचार्य श्री ने वर्तमान सामाजिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए समाज को सतर्क रहने की चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि आज के दौर में कई लोग साधु, कथावाचक, संन्यासी, त्रिदंडी, संत और महंत का भेष धारण कर लेते हैं. वे समाज में धर्मात्मा होने का ढोंग रचकर लोगों का विश्वास जीतते हैं और खुद को स्थापित कर लेते हैं. इसके बाद वे सीधे-साधे समाज को गलत मार्ग पर ले जाते हैं. धर्म के नाम पर षड्यंत्र रचकर वे मद्यपान और विनाशकारी पाप कर्मों में लिप्त हो जाते हैं. ऐसे लोग समाज की संपत्ति, समय और संस्कारों का सत्यानाश करके गलत परंपराएं लागू करते हैं और सनातन धर्म को विनाश की ओर ले जाते हैं.

आचार्य पौराणिक जी ने जोर देकर कहा कि इस विषम और चुनौतीपूर्ण स्थिति में श्रीमद्भागवत कथा ही समाज की रक्षा करेगी. जिस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने कंस आदि का वध करके सनातन धर्म की रक्षा की थी, ठीक उसी प्रकार यह भागवत कथा आज के युग के कालनेमि धर्मात्माओं और पाखंडी कथावाचकों से समाज की रक्षा करेगी और वास्तविक सनातन धर्म के मूल्यों की स्थापना करेगी.

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सूर्यकांत कुमार

लेखक के बारे में

By सूर्यकांत कुमार

सूर्यकांत कुमार प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर हैं और डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों का अनुभव रखते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल चैनल न्यूज रील्स से की. इसके बाद नेशन दर्पण और खबरिया जंक्शन में कार्य किया, जहां कंटेंट राइटिंग, वीडियो एडिटिंग और वॉयस ओवर से जुड़े विभिन्न कार्यों का अनुभव हासिल किया. उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है. वर्तमान में वे गया, औरंगाबाद, कैमूर और बक्सर जिलों की स्थानीय (हाइपरलोकल) खबरों, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक मुद्दों और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर काम कर रहे हैं. इसके अलावा खेल और मनोरंजन से जुड़ी खबरों में भी विशेष रुचि रखते हैं.

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