बक्सर में 15 दिवसीय कृषि प्रशिक्षण का समापन, 40 प्रतिभागियों को मिला प्रमाणपत्र, आधुनिक तकनीकों पर दी गई जानकारी

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कृषि विज्ञान केंद्र बक्सर में 15 दिवसीय समेकित पोषक तत्व प्रबंधन प्रशिक्षण का समापन हुआ, जिसमें 40 प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।

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Buxar News : बक्सर में कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों को बढ़ावा देने की दिशा में कृषि विज्ञान केंद्र बक्सर द्वारा आयोजित 15 दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स "समेकित पोषक तत्व प्रबंधन आईएनएम" का बुधवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया. इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 40 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिन्हें आधुनिक कृषि पद्धतियों और उर्वरक प्रबंधन की बारीकियों से अवगत कराया गया. समापन के मौके पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया.

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यह प्रशिक्षण 13 जुलाई से शुरू हुआ था और इसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद आईसीएआर के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के निदेशक डॉ. अनुप दास के मार्गदर्शन में संचालित किया गया. पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को 32 सैद्धांतिक और 12 व्यवहारिक कक्षाओं के जरिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन की गहन जानकारी दी गई.

प्रशिक्षण में विभिन्न कृषि संस्थानों के वैज्ञानिकों, कृषि विश्वविद्यालयों के प्राध्यापकों और कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञों ने अपनी विशेषज्ञता साझा की. इससे प्रतिभागियों को खेती के नए तरीकों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को समझने का अवसर मिला.

आधुनिक तकनीकों और बायो फर्टिलाइजर पर विशेष जोर

समापन सत्र में आईसीएआर पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के विभागाध्यक्ष एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. उज्जवल कुमार ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए ब्लू-ग्रीन एल्गी, ट्राइकोडर्मा और बायो फर्टिलाइजर जैसे बायो-इनोक्युलेंट्स के महत्व को विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि उर्वरकों का संतुलित उपयोग ही बेहतर उत्पादन और मिट्टी की सेहत के लिए जरूरी है.

वहीं डॉ. संजीव कुमार ने समेकित कृषि प्रणाली, मृदा संरक्षण और बागवानी फसलों के लिए मृदा नमूना संग्रह की सही तकनीक पर जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सही समय पर और सही तरीके से मिट्टी की जांच कराने से फसल उत्पादन में काफी सुधार लाया जा सकता है.

किसानों तक तकनीक पहुंचाने का आह्वान

कृषि विज्ञान केंद्र बक्सर के वरिष्ठ वैज्ञानिक सह प्रमुख डॉ. देवकरन ने प्रतिभागियों से अपील की कि वे प्रशिक्षण में सीखी गई तकनीकों को ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुंचाएं. उन्होंने कहा कि जब तक नई जानकारी गांव-गांव तक नहीं पहुंचेगी, तब तक इसका पूरा लाभ किसानों को नहीं मिल पाएगा.

प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. रामकेवल ने कार्यक्रम का मूल्यांकन कराया और प्रतिभागियों से फीडबैक लिया. वहीं नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक आनंद वर्द्धन ने कृषि क्षेत्र में नवाचारों के लिए उपलब्ध वित्तीय सहायता योजनाओं की जानकारी दी, जिससे किसान नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हो सकें.


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