नौ दिन में सिर्फ 4 लोगों को मिला रोजगार, बक्सर में सरकारी योजना की धीमी रफ्तार पर उठे सवाल

बक्सर जिले में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी रोजगार योजना का बेहद खराब प्रदर्शन सामने आया है. पहले नौ दिनों में केवल चार मजदूरों को काम मिला. वहीं, पड़ोसी जिलों में हजारों लोगों को रोजगार मिला है.
Buxar Employment Scheme : ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का बक्सर जिले में बेहद निराशाजनक प्रदर्शन सामने आया है. एक जुलाई से शुरू हुई योजना के पहले नौ दिनों में जिले के 11 प्रखंडों में महज चार मजदूरों को ही काम मिल सका. जबकि पड़ोसी जिलों में इसी अवधि के दौरान सैकड़ों से लेकर हजारों लोगों को रोजगार मिला. आंकड़ों ने जिले में योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
Buxar News : 11 प्रखंडों में सिर्फ दो पंचायतों तक सिमटी योजना
आधिकारिक मास्टर रोल और उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पूरे जिले में केवल दो पंचायतों में ही योजना के तहत कार्य शुरू हो सका. बाकी नौ प्रखंडों और अधिकांश पंचायतों में अब तक काम शुरू नहीं होने से ग्रामीण मजदूरों को रोजगार नहीं मिल पाया.
डुमरांव प्रखंड की नंदन पंचायत में 8 जुलाई से फकड़ बाबा पोखरा के चारों ओर पौधारोपण कार्य शुरू किया गया. मास्टर रोल संख्या 2420 के तहत केवल तीन मजदूरों काशी नाथ चौधरी, शत्रुघ्न सिंह और वीरेंद्र यादव को रोजगार मिला.
वहीं नावानगर प्रखंड की आथर पंचायत में 7 जुलाई से पौधारोपण कार्य शुरू हुआ, जहां मास्टर रोल संख्या 3278 के तहत केवल एक मजदूर सुशील कुमार को काम दिया गया.
बाकी नौ प्रखंडों में नहीं खुला रोजगार का खाता
इन दो पंचायतों को छोड़ दें तो जिले के अन्य नौ प्रखंडों और सैकड़ों पंचायतों में योजना का लाभ किसी भी मजदूर तक नहीं पहुंच सका. शुरुआती नौ दिनों में पूरे जिले में सिर्फ चार लोगों को रोजगार मिलने से योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं.
पड़ोसी जिलों ने बनाया रिकॉर्ड, बक्सर सबसे पीछे
राज्य के अन्य जिलों की तुलना में बक्सर का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा. 9 जुलाई के आंकड़ों के अनुसार रोहतास में 2,999, औरंगाबाद में 2,521, पटना में 1,964, जमुई में 1,842, गया में 1,200, नालंदा में 1,012, कैमूर में 723, शेखपुरा में 605, भोजपुर में 338, जहानाबाद में 201, भागलपुर में 87 और अरवल में 37 मजदूरों को रोजगार मिला.
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जहां पड़ोसी जिलों में योजना तेजी से लागू की जा रही है, वहीं बक्सर में इसकी रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है.
रोजगार की उम्मीद लगाए बैठे मजदूरों में निराशा
ग्रामीण क्षेत्रों के मजदूरों का कहना है कि योजना से उन्हें रोजगार मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अब तक अधिकांश पंचायतों में काम शुरू ही नहीं हुआ. लोगों का कहना है कि यदि जल्द कार्य प्रारंभ नहीं हुआ तो योजना का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा.
प्रशासन से तेज कार्रवाई की उम्मीद
योजना की धीमी प्रगति के बाद अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं. ग्रामीणों की मांग है कि सभी प्रखंडों और पंचायतों में जल्द से जल्द कार्य शुरू कराया जाए, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद मजदूरों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराया जा सके.
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