1008 कलशों से किया गया िशव का महाभिषेक

Updated at : 11 May 2017 4:49 AM (IST)
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1008 कलशों से किया गया िशव का महाभिषेक

आस्था. दूध, दही, ईख के रस आदि से हुई पूजा वैशाखी पूर्णिमा के इस अलौकिक पल में पहुंचे सैकड़ों लोग बक्सर : अलौकिक दृश्य के बीच भगवान रामेश्वरनाथ की एक साथ नम: शिवाय के जयघोष के साथ महाभिषेक किया गया. इस अलौकिक पल में पुरुष महिला भक्तों ने समान रूप से भाग लिया. महादेव की […]

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आस्था. दूध, दही, ईख के रस आदि से हुई पूजा

वैशाखी पूर्णिमा के इस अलौकिक पल में पहुंचे सैकड़ों लोग
बक्सर : अलौकिक दृश्य के बीच भगवान रामेश्वरनाथ की एक साथ नम: शिवाय के जयघोष के साथ महाभिषेक किया गया. इस अलौकिक पल में पुरुष महिला भक्तों ने समान रूप से भाग लिया. महादेव की 1008 कलशों में जल, ईख का रस, फल का जूस एवं गंगाजल से अभिषेक किया गया. नगर के रामरेखाघाट पर स्थित रामेश्वरनाथ मंदिर में बुधवार को भक्तिमय अलौकिक दृश्य देख सभी ध्यन हो रहे थे. इस भक्तिपूर्ण माहौल में भगवान इंद्र भी शामिल हुए और बारिश के बूंदों से मौसम को सुहाना बना दिये़ बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर 10 मई को महाभिषेक का आयोजन किया गया था. आयोजन सर्वजन कल्याण सेवा समिति द्वारा किया गया था़ इस साल वैशाख पूर्णिमा पर महाभिषेक करने का शुभ संयोग 297 वर्षों के बाद भक्तों को मिला.
इस योग के विशेष फल पाने के लिए सैकड़ों लोग इस विशेष धार्मिक आयोजन में शामिल हुए. सुबह से ही मंत्रों की गूंज के बीच महाभिषेक चला. रामेश्वरनाथ भगवान की फूल, वेलपत्र से पूजा-अर्चन कराने के बाद महाभिषेक की प्रक्रिया की गयी, जिसमें पूजा में शामिल भक्तों के साथ अन्य भक्त जनों ने भी दूध, दही, ईख का रस, मधु के 1008 कलश पात्रों से अभिषेक किया. इस धार्मिक आयोजन में आम से खास सभी शामिल हुए और इस अलौकिक पल के साक्षी बने. महाभिषेक सर्वजन कल्याण सेवा समिति के संस्थापक श्री कृष्णानंद शास्त्री पौराणिक जी महाराज के नेतृत्व में पूरे विधि विधान एवं मंत्रोच्चार के साथ कराया.
297 वर्ष बाद था ऐसा संयोग : वैशाखी पूर्णिमा को सरोवरों में स्नान के बाद शिव के पूजन से मंगलदायी फल प्राप्त होता है. इस साल वैशाख पूर्णिमा पर बुधवार, स्वाति नक्षत्र, तुला राशि का चंद्रमा, व्यतिपात योग और मेष राशि का सूर्य के साथ होने की संयोग को ज्योतिषाचार्य दुर्लभ मानते हैं. यह दुर्लभ स्नान भक्तों को वैशाख पूर्णिमा पर संयोग 22 अप्रैल 1720 में बना था.
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