तीन माह में भी नहीं बना प्रमाणपत्र
Updated at : 21 Feb 2017 4:55 AM (IST)
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लापरवाही. सात दिनों में बननेवाला जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए परेशान हैं लाभुक कार्यालय में नहीं रहते पदाधिकारी, नहीं होता हस्ताक्षर बक्सर : नगर पर्षद में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने में लोगों के पसीने छूट जा रहे हैं. महज सात दिनों के अंदर मिलनेवाले प्रमाण पत्र 90 दिनों में भी नहीं बन पा रहे हैं. जबकि […]
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लापरवाही. सात दिनों में बननेवाला जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए परेशान हैं लाभुक
कार्यालय में नहीं रहते पदाधिकारी, नहीं होता हस्ताक्षर
बक्सर : नगर पर्षद में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने में लोगों के पसीने छूट जा रहे हैं. महज सात दिनों के अंदर मिलनेवाले प्रमाण पत्र 90 दिनों में भी नहीं बन पा रहे हैं. जबकि आवेदक नियमानुसार जन्म और मृत्यु के 21 दिनों के अंदर ही आवेदन को जमा कर रहे हैं. ऐसे में आवेदक काफी परेशान हो रहे हैं और विभाग का चक्कर लगा रहे हैं. बावजूद इसके आवेदकों को समय पर प्रमाणपत्र नहीं मिल पा रहे हैं. आवेदकों को कितने दिनों में प्रमाणपत्र मिलेगा, यह कहना मुश्किल है. हर दिन दर्जनों लोग प्रमाणपत्र को पाने के लिए विभाग आ रहे हैं, पर उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है. ऐसे में लोगों को कई जरूरी कार्य समय से नहीं हो पा रहे हैं.
आवेदकों की मानें, तो हर बार विभागीय कर्मचारी आवेदन पर पदाधिकारी का हस्ताक्षर नहीं होने की बात कहते हैं. वहीं, पार्षदों का कहना है कि है कि विभाग में पदाधिकारी काफी कम बैठते हैं, जिसके कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है और लोगों को समय पर जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं मिल पा रहा है.
ये है नियम : जन्म और मृत्यु के 21 दिनों के अंदर यदि कोई आवेदन देता है, तो अविलंब प्रमाणपत्र के रूप में जाना जाता है. तब जांच प्रतिवेदन के आधार पर नगर पर्षद के अधिकारी की स्वीकृति से प्रमाण पत्र बन जाता है. इसे बनने में महज एक सप्ताह का ही समय लगना चाहिए. वहीं, 21 दिनों के बाद यदि जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रेशन कराना है, तो इसके लिए कोर्ट से शपथ प्रमाणपत्र लगता है. यह आवेदन विलंब आवेदन के रूप में जाना जाता है.
नियमत: विलंब आवेदन नगर पर्षद से प्रखंड कार्यालय जाता है, जिसके बाद पुन: नगर पर्षद कार्यालय आता है और फिर जांच प्रतिवेदन के आधार पर प्रमाणपत्र बनता है. 15 दिनों तक का समय तय है, पर ऐसा नहीं हो रहा है. दोनों ही स्थितियों में 90 से अधिक दिन बाद भी प्रमाणपत्र के लिए लोग विभाग का चक्कर लगा रहे हैं.
अधिकारी की लापरवाही है
नगर पर्षद के अधिकारी पूरी तरह लापरवाह हैं. अधिकारी के उदासीनता के कारण आम जन को परेशान होना पड़ रहा है. इसकी मॉनीटरिंग की जा रही है. व्यवस्था को सुधारने का प्रयास किया जा रहा है.
शकुंतला देवी, नप अध्यक्ष, बक्सर नगर पर्षद
त्रुटियों के कारण हो रही परेशानी
विभाग में अक्सर बैठते हैं. आवेदन में कई तरह की त्रुटियां रहती हैं, जिसके कारण जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने में विलंब हो जाता है. सही आवेदन का प्रमाण पत्र समय पर मिलता है.
अनिल कुमार, कार्यलक पदाधिकारी, नप
दिसंबर में दिया था आवेदन
सोहनीपट्टी के जय प्रकाश गुप्ता ने अपने पुत्र आदित्य कुमार गुप्ता का जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए दिसंबर 2016 में ही आवेदन दिया था, पर अब 90 दिन बीतने को हैं और प्रमाणपत्र नहीं बन पाया.
कई दिनों से लगा रहा हूं चक्कर
तुरहा टोली के विजय तुरहा ने अपने पुत्र अरविंद कुमार का जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए दिसंबर में ही नगर पर्षद में आवेदन जमा किया था, लेकिन इनका भी अब तक नहीं बन पाया, जिसके लिए विभाग का चक्कर लगाया जा रहा है.
90 दिन होने को है नहीं मिला जन्म प्रमाणपत्र
दर्जी मुहल्ला के मकसूद आलम अपनी पुत्री का जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए तीन माह पूर्व ही आवेदन दिया थे, लेकिन, अब तक नहीं बन पाया. इसके लिए हर दिन विभाग का चक्कर लगा रहे हैं.
दो माह से दौड़ रहे हैं मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए
वार्ड 22 के अनंत कुमार वर्मा ने अपने पिता की मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए दो माह से दौड़ रहे हैं. आज और कल के चक्कर में विभाग का चक्कर लगा रहे हैं़ अनंत कुमार वर्मा ने कहा कि जब भी आते हैं, तो कोई-न-कोई बहाना बना दिया जाता है.
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