खुले में फेंक दिया जाता है कचरा

Published at :27 Sep 2016 1:43 AM (IST)
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खुले में फेंक दिया जाता है कचरा

अनदेखी. शहर में जहां-तहां किया जा रहा मेडिकल कचरे का निस्तारण प्रतिदिन सरकारी व निजी अस्पतालों से निकलता है 3-4 क्विंटल बायो मेडिकल कचरा बक्सर : जिले में निकलनेवाले बायो मेडिकल कचरे के निस्तारण का कोई व्यवस्था नहीं है. इसके कारण बायो कचरा अस्पतालों के आसपास आबादी के बीच खाली जमीन पर ही फेंक दिया […]

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अनदेखी. शहर में जहां-तहां किया जा रहा मेडिकल कचरे का निस्तारण

प्रतिदिन सरकारी व निजी अस्पतालों से निकलता है 3-4 क्विंटल बायो मेडिकल कचरा
बक्सर : जिले में निकलनेवाले बायो मेडिकल कचरे के निस्तारण का कोई व्यवस्था नहीं है. इसके कारण बायो कचरा अस्पतालों के आसपास आबादी के बीच खाली जमीन पर ही फेंक दिया जाता है. इससे आम लोगों में बीमारी के संक्रमण का खतरा हमेशा बना रहता है़ जबकि प्रदुषण कंटोल बोर्ड के अनुसार मेडिकल कचरा एवं नगर के सामान्य कचरे को शहर से बाहर आबादी से दूर अन्यत्र रखना है, ताकि आबादी पर इस कचरे का कुप्रभाव नहीं पड़े. जिले में प्रतिदिन 3-4 क्विंटल कचरा अस्पतालों से निकलता है, जिसका निस्तारण नगर व आबादी के बीच कर दिया जाता है. जिले में कई दर्जन निजी अस्पताले संचालित हैं.
इनसे निकलनेवाले बायो कचरे का निष्पादन के लिए कोई यूनिट जिले में नहीं होने से खुले में ही उसे निष्पादित कर दिया जाता है. ऐसे में खुले में कचरे से कई संक्रमित बीमारियों का खतरा शहरवासियों पर बना रहता है. अब तक जिला प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. आये दिन निजी अस्पतालों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन कचरे का निष्पादन करने के लिए विभाग द्वारा कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है.
प्रतिदिन 3-4 क्विंटल निकलता है
कचरा : जिले में सदर अस्पताल, अनुमंडल अस्पताल, कुल ग्यारह पीएचसी से प्रतिदिन 50 से 60 किलोग्राम बायो कचरा निकलता है. सबसे खतरनाक प्रसव के बाद निकलने वाला प्लासेंटा होता है. इसके प्रभाव से अनेक संक्रमित बीमारियां होती है़, अगर इस पर कार्रवाई नही की गयी, तो यह आगे चल कर एक बडी बीमारी बन जायेगी. सदर अस्पातल के सूत्रों के अनुसार सरकारी व निजी अस्पतालों को मिलाकर कुल तीन से चार क्विंटल तक कचरा निकलता है.
बायो मेडिकल कचरे के निस्तारण का नहीं है कोई यूनिट : जिले में बायों कचरे के निस्तारण के लिए कोई टीटमेंट यूनिट नहीं है. इसके कारण स्वास्थय विभाग को निजी अस्पतालों से निकलनेवाले प्रतिदिन सैकडों क्विंटल बायों मेडिकल कचरे का निस्तारण खुले में ही करना पड़ रहा है. नगरवासियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड किया जा रहा है.
निजी अस्पताल भी फैला रहे हैं प्रदूषण : जिले में निजी अस्पताल सबसे ज्याद प्रदूषण फैला रहे है़ं जिले में आधा दर्जन से भी अधिक निजी अस्पताल बिना मानकों के चल रहे है़ं कुछ बडे निजी अस्पातल भी संचालित होते हैं, जो अपने कचरे का निस्तारण खुले में ही करते हैं. आइएमए के सचिव बीके सिंह ने बताया कि जिले में बायो मेडिकल कचरे के निस्तारण के लिए कोई यूनिट नहीं है, जिसके कारण बायों कचरे का निस्तारण किसी गड्ढे और खुले जगह में किया जाता है.
मेडिकल कचरे से होती हैं बहुत सारी बीमारियां
बायों मेडिकल कचरे से उत्पन्न होनेवाली बहुत सारी बीमारियां हैं, जितना भी कहा जाये कम ही होगा़ बायों कचरें को खुले में फेंकना लोगों के साथ स्वास्थ्य के साथ खिलवाड करना है़ सबसे ज्यादा खतरा प्रसव के बाद निकलनेवाला पालासेंटा एवं रक्त लगा रूई से एचआइबी और हेपेटाइटीस बी के मरीजों के डिस्पोजल से भी हमेसा संक्रमण का खतरा बना रहता है़
डॉ बृज कुमार सिंह, सदर अस्पताल के सिविल सर्जन
जिले में यूनिट नहीं होने के कारण हो रही परेशानी
इस माह के 12 तारीख से कचरें का उठाव पटना के संस्था द्वारा प्रतिदिन किया जा रहा है. जिले में यूनिट नहीं होने के कारण पटना से विभाग द्वारा नियुक्त संस्था प्रतिदिन सदर अस्पताल के कचरे का उठाव कर रही है.
दुष्यंत कुमार, सदर अस्पताल
बीमारी फैलने का सता रहा डर
सदर अस्पताल परिसर में लगा गंदगी का अंबार
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