कामदेव नहीं भंग कर पाये नारद की तपस्या
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :26 Sep 2016 12:46 AM (IST)
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रात भर जमे रहे दर्शक. नारद मोह लीला व कृष्ण जन्म लीला का मंचन देख भक्त हुए आनंदित बक्सर : रामलीला समिति बक्सर के तत्वावधान में चल रहे रामलीला मंच पर 22 दिवसीय विजया दसमी के दूसरे दिन नारद मोहलीला व श्रीकृष्णलीला का मंचन किया गया. कार्यक्रम रविवार को वृंद्रावन से प्रधारे करतार प्रपन्ना चार्य […]
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रात भर जमे रहे दर्शक. नारद मोह लीला व कृष्ण जन्म लीला का मंचन देख भक्त हुए आनंदित
बक्सर : रामलीला समिति बक्सर के तत्वावधान में चल रहे रामलीला मंच पर 22 दिवसीय विजया दसमी के दूसरे दिन नारद मोहलीला व श्रीकृष्णलीला का मंचन किया गया. कार्यक्रम रविवार को वृंद्रावन से प्रधारे करतार प्रपन्ना चार्य महाराज के निर्देश में किया गया. देर रात्रि मंचित रामलीला के नारद मोहलीला में दिखाया गया कि नारद मुनि हिमालय के कंदरा में तप करने जाते हैं और वहां पहुंच कर प्रभु के तप में समाधि लगा लेते हैं. उनके तपस्या से देवराज इंद्र का इद्रासन हिल उठता है. इससे घबरा कर देवराज इंद्र ने कामदेव को हिमालय पर नारद मुनि की तपस्या को भंग करने के लिए भेजते हैं.
कामदेव हर प्रकार के कला का प्रयोग कर परास्त हो जाते हैं. इसके बाद भी नारद मुनि के तप को भंग नहीं कर सके और उनके चरणों में गिर कर क्षमा याचना करने लगे. नारदजी ने कामदेव को क्षमा कर दिया. नारद ने इस कार्य के बाद काम और क्रोध को जीत लेने का अभिमान में डूब गये. यह बात भगवान शिव और अन्य देवताओं से कहते हुए भगवान विष्णु के पास पहुंच जाते हैं. नारद के इस अभिमान प्रभु इंद्र ने देख कर मायारूपी नगर की रचना कर देते हैं, जहां नारदजी एक सुंदर बाला को देख कर मोहित हो जाते हैं.
उस मोहिनी से विवाह करने के लिए श्री हरि से सुंदर रूप मांगते हैं. नारायण उन्हें बंदर का रूप प्रदान करते हैं. बंदर रूपी नारद को देख कर सब लोग नारद का उपहास करने लगे. नारदजी क्रोध में आकर नारायण को पृथ्वी पर आने का शाप दे देते हैं. इस तरह नारद मो लीला को देख कर दर्शक गद्गद हो गये. आकर्षक लीला की मंचन को देख कर दर्शक मंत्रमुग्द हो जाते हैं.
रासलीला में तीसरे दिन श्रीकृष्ण का हुआ जन्म: रासलीला के तीसरे दिन श्रीकृष्णलीला के दौरान श्रीकृष्ण जन्मलीला का मंचन किया गया, जिसमें मथुरा के राजा का पुत्र कंश के क्रूर स्वाभाव को दिखाया गया. वहीं, कंस की बहन देवकी का विवाह वासुदेव से होता है. जब कंस अपनी बहन को विदा करता है,
तो मार्ग में आकाशवाणी होती है कि देवकी का आठवां पुत्र कंस का काल होगा. कंस देवकी को मारना चाहा, तो महाराज अग्रसेन इसका विरोध किये. कंस स्वयं महाराज बनकर अपनी बहन और वासुदेव को कारागार में डाल दिया. वहीं कंस ने देवकी के छह गर्भ को नष्ट कर दिया. सातवां गर्भ में ही नष्ट हो गया. आठवें पुत्र के रूप में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होता है. वासुदेव रात्रि में ही उन्हें यमुना पार कर गोकुल नंद यशोदा के यहां छोडते हैं. पूरे मंचन के दौरान रामलीला मैदान श्रद्धालुओं से खचाखच भरा था़
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