न्यायालय में हाजिर हुआ अपहरण का आरोपित

Published at :07 Apr 2016 6:30 PM (IST)
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न्यायालय में हाजिर हुआ अपहरण का आरोपित

न्यायालय में हाजिर हुआ अपहरण का आरोपित बक्सर, कोर्ट. नावानगर थाना के कतिकनार का रहनेवाला अजीत कुमार पासी गुरुवार को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में समर्पण किया. गौरतलब हो कि उसी गांव के रहनेवाले वीरेंद्र पासी ने अभियुक्त पर अपनी लड़की शांति कुमारी(काल्पनिक नाम) का अपहरण करने का आरोप लगाया था. न्यायालय ने गुरुवार […]

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न्यायालय में हाजिर हुआ अपहरण का आरोपित बक्सर, कोर्ट. नावानगर थाना के कतिकनार का रहनेवाला अजीत कुमार पासी गुरुवार को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में समर्पण किया. गौरतलब हो कि उसी गांव के रहनेवाले वीरेंद्र पासी ने अभियुक्त पर अपनी लड़की शांति कुमारी(काल्पनिक नाम) का अपहरण करने का आरोप लगाया था. न्यायालय ने गुरुवार को अभियुक्त के साथ उक्त युवती भी उपस्थित थी. बताया जाता है कि दोनों ने मंदिर में शादी कर लिया था. विश्व स्वास्थ्य दिवस पर हुई बैठक बक्सर, कोर्ट. महाराणा प्रताप जनहित फाउंडेशन के अध्यक्ष अधिवक्ता तेज प्रताप सिंह छोटे की अध्यक्षता में भारतीय क्षत्रिय महासभा की एक आवश्यक बैठक जिला कार्यालय में सपन्न हुआ. बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी का समर्थन किया गया.बैठक में पूर्ण शराबबंदी का सराहना करते हुए क्षत्रिय महासभा के संरक्षक अधिवक्ता अरुण कुमार सिंह ने कहा कि शराब से सबसे ज्यादा क्षत्रिय समाज प्रभावित था, जिससे वह प्रत्येक पहलुओं पर पिछड़ते जा रहा था. शराबबंदी के बाद क्षत्रिय समाज सशक्त होगा तथा खुशहाल दिखेगा. बैठक को संबोधित करनेवालों में अधिवक्ता शिवजी सिंह, अरुण कुमार सिंह, ब्रह्मेश्वर सिंह, दीपक सिंह, योगेंद्र सिंह, रामनाथ सिंह, रामराज सिंह, रवींद्र सिंह आदि शामिल थे.बंदरों का फिर बढ़ा उत्पात उच्च न्यायालय के आदेश पर वन विभाग ने पकड़े थे सिर्फ पांच बंदरबक्सर, कोर्ट. बक्सर व्यवहार न्यायालय शुरू से ही बंदरों के उत्पात के कारण परेशान रहा है. न्यायालय में दर्जनों लोगों को काट कर जख्मी करने के अलावे महत्वपूर्ण अभिलेखों को फाड़ने एवं अधिवक्ताओं की डायरी एवं कपड़ों को तहस नहस करने की अनगिनत घटनाएं हुई हैं. इसको लेकर बार-बार आवाज उठायी गयी. मामला यहां तक बढ़ा कि अखबारों ने प्रकाशित खबरों के आधार पर माननीय उच्च न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए वन विभाग को बंदरों से निजात दिलाने के लिए आदेश दिया था, जिसके बाद वन विभाग की टीम बक्सर पहुंच कार्रवाई की. लेकिन, सैकड़ों उत्पाती बंदरों की संख्या के बावजूद सिर्फ पांच ही बंदर पकड़े गये तथा टीम वापस पटना चली गयी. सही मानें तो उक्त कार्रवाई महज एक लीपापोती थी और बंदरों का उत्पात पहले की तरह से ही बना रहा. घटनाओं पर नजर डाला जाये, तो बक्सर व्यवहार न्यायालय में कार्यरत अधिवक्ता के एक कान को बंदर द्वारा पूरी तरह काट कर सिर से अलग कर दिया था. इसके अलावा कई अधिवक्ता एवं न्यायालय में कार्यरत टाइपिस्टों को भी बंदरों ने जख्मी किया है.वन विभाग की कार्रवाई ऊंट के मुंह में जीरा के समान है. बताते चलें कि एक अप्रैल से न्यायालय की कार्य अवधि सुबह 6.30 बजे से कर दी गयी है. ऐसे में सुबह बंदर न सिर्फ ज्यादा की संख्या में मौजूद रहते हैं, बल्कि उनका उत्पात भी ज्यादा होता है. अधिवक्ता शैलेश कुमार दुबे, लाला ओझा, रवींद्र कुमार रवि, रवि रंजन सिन्हा, नवीन श्रीवास्तव, ज्योति शंकर ने वन विभाग से पुन: बंदरों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है.

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