करोड़ों का लाइट एंड साउंड बरबाद

Published at :18 Jan 2016 4:20 AM (IST)
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करोड़ों का लाइट एंड साउंड बरबाद

लाखों रुपये के सामान हो गये चोरी मामले की जांच की फाइल धूल चाट रही सचिवालय में बक्सर : जिले का गौरव और बक्सर की ऐतिहासिक व रमणीक छवि को दर्शानेवाला रामरेखा घाट स्थित लाइट एंड साउंड न सिर्फ बदहाल है, बल्कि इसका अस्थि पंजर भी गायब हो गया है. लाइट एंड साउंड के लिए […]

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लाखों रुपये के सामान हो गये चोरी

मामले की जांच की फाइल धूल चाट रही सचिवालय में
बक्सर : जिले का गौरव और बक्सर की ऐतिहासिक व रमणीक छवि को दर्शानेवाला रामरेखा घाट स्थित लाइट एंड साउंड न सिर्फ बदहाल है, बल्कि इसका अस्थि पंजर भी गायब हो गया है. लाइट एंड साउंड के लिए लगाये गये लाखों रुपय का प्रोजेक्टर गायब हो चुका है और साथ ही इस रमणीक दृश्य को दिखाने के लिए लगायी गयी दर्जनों लाइटें और कीमती सामान की भी चोरी हो गयी है.
ताज्जुब तो यह है कि इस चोरी के बारे में पर्यटन विभाग को वहां तैनात रात्रि प्रहरी ने लिखित रूप में जानकारी भी दी है, लेकिन वह पत्र विभाग की फाइलों में ही धूल चाटता रहा है और आज तक मामले की जांच नहीं हो पायी. लाइट एंड साउंड के लिए तैयार किया गया तीन लाख रुपये का सीडी भी बेकार होकर बरबाद हो गया और यह पूरा संयंत्र अब टीन के बक्शों की तरह लाइट एंड साउंड परिसर में जंग खा रहा है.
एक करोड़ रुपये से बना था लाइट एंड साउंड : लाइट एंड साउंड की व्यवस्था के लिए वर्ष 18 अप्रैल 1986 को तत्कालीन मुख्यमंत्री बिंदेश्वरी दुबे द्वारा उद्घाटित किया गया था. उस समय एक करोड़ 20 लाख रुपये खर्च किये गये थे. तीन लाख रुपये का कैसेट तैयार किया गया था. पूरा रामचरित मानस का हर प्रसंग लाइट एंड साउंड के माध्यम से दिखाया जाता था. मात्र डेढ़ रुपये के टिकट पर पौने दो घंटे का शो होता था और प्रतिदिन दो शो शाम में चलाया जाता था. लाइट एंड साउंड में एक साथ दो हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था थी. एक-एक लाइट चार हजार रुपये के लगायी थी. सारे कीमती सामान फिलहाल टीन जंग खाये बक्सों में तब्दील हो चुके हैं और प्रोजेक्टर के पास विशाल सहजन का पेड़ तथा बनायी गयी ओपेन गैलेरी में जंगल-झाड़ हो गया है.
मामूली खराबी के कारण बंद हुआ : लाइट एंड साउंड की व्यवस्था उद्घाटन के महज एक साल बाद ही खराब हो गया और फिर उसके बाद से लगातार खराब ही रहा. सूत्र बताते हैं रामचरित मानस के पूरे प्रसंग के बीच कुछ क्षणों के लिए आवाज गायब हो गयी थी और कुछ क्षणों के लिए किसी दूसरे प्रसंग में लाइट गायब हो जा रही थी. छोटी सी इस खराबी के कारण लाइट एंड साउंड को बंद कर दिया गया. जबकि अगर यह चलता रहता तो शायद आज भी चालू रहता. प्रतिदिन डेढ़ रुपये का टिकट खरीद कर हजारों लोग रामायण का सीधा प्रसंग ध्वनि और प्रकाश के साथ देखते थे जो बंद हो गया.
जनप्रतिनिधि सिर्फ सोच रहे हैं :इस संबंध में जिला प्रशासन के साथ-साथ वर्तमान सांसद अश्विनी कुमार चौबे और नगर विधायक मुन्ना तिवारी इसे पुनजीर्वित करने की बात सोच रहे हैं और बयान भी दे चुके हैं, मगर हालात ऐसे हैं कि इसे फिर से चालू नहीं किया जा सकता, बल्कि सारा कुछ नये सिरे से करना होगा.पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कोशिशें हो रही हैं, मगर दुर्भाग्य से आज तक बक्सर जिले में पर्यटकों के ठहरने का कोई इंतजाम नहीं हो पाया है और न ही कोई पर्यटक रेस्ट हाउस ही विकसित हुआ है.
प्रहरी का होता रहा तबादला : लाइट एंड साउंड के लिए तैनात रात्रि प्रहरी धर्मदेव राम जिन्हें शुरू से तैनात किया गया,
वर्षों तक वेतन न मिलने का दंश झेलते रहे. इनका तबादला कभी दरभंगा, कभी मुजफ्फरपुर तो कभी सीतामढ़ी कर दिया गया. और नये-नये लोग आते गये. रात्रि प्रहरी धर्मदेव राम कहना है कि जब तक वे यहां पदस्थापित थे. सारी चीजें दुरुस्त थीं, मगर लंबे अंतराल के बाद दुबारा जब बक्सर पदस्थापित हुआ, तो सब कुछ गायब मिला. जिसके कारण मैंने पर्यटन विभाग को सारी स्थितियों से अवगत कराया और मामले की जांच कराने की फरियाद की.
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