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buxar news : जिले में तीन वर्षों में लगे 546 लघु उद्योग, 1395 कामगारों को मिला रोजगार

buxar news : औद्योगिक स्वरूप में बदलाव से युवाओं को मिल रहे रोजगार के अवसर

buxar news : बक्सर. आमतौर पर बाढ़ग्रस्त क्षेत्र माने जाने वाले बक्सर में बीते कुछ वर्षों में औद्योगिक स्वरूप में तेजी से बदलाव आया है. उद्योग संबंधी अनुमोदन प्रक्रियाओं को सरल बनाने और उद्यमी रोजगार को प्रभावी रूप से लागू करने के साथ बिजली और सड़क जैसी आधारभूत सुविधाएं मजबूत करने के बाद मध्यम उद्योगों के लिए जिला अग्रसर है.

रोजगार सृजन को लेकर उद्योग विभाग की विभिन्न योजनाएं असर दिखा रही हैं. वित्तीय वर्ष 2022-23 से लेकर 2024-25 तक के तीन वर्षों में जिले में कुल 546 लघु उद्योगों की स्थापना की गयी है. इन उद्योग इकाइयों के माध्यम से कुल 1395 कामगारों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है. इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा देना, स्वरोजगार के अवसर पैदा करना और जिले में बढ़ती बेरोजगारी की समस्या को कम करना है. उद्योग विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, जिले में सबसे अधिक इकाइयों की स्थापना वित्तीय वर्ष 2023-24 में हुई. इस अवधि में बिहार लघु उद्यमी योजना के तहत कुल 341 छोटी औद्योगिक इकाइयां स्थापित की गयीं.

इन इकाइयों से 704 कामगारों को रोजगार मिला. वित्तीय वर्ष 2022-23 की बात करें तो मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत जिले में कुल 66 इकाइयों की स्थापना की गयी थी. इन इकाइयों के माध्यम से 206 कामगारों को रोजगार मिला. उस समय यह योजना खास तौर पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, महिला और अल्पसंख्यक वर्ग के युवाओं को ध्यान में रखकर लागू की गयी थी. इसका उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उन्हें स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित करना था. इसके बाद वित्तीय वर्ष 2023-24 में ही एक अन्य चरण में कुल 68 इकाइयों की स्थापना की गयी, जिससे 208 कामगारों को रोजगार मिला.

इन इकाइयों में मुख्य रूप से खाद्य प्रसंस्करण, रेडीमेड गारमेंट्स, फर्नीचर निर्माण, अगरबत्ती, मसाला उद्योग, बेकरी, मोबाइल रिपेयरिंग, इलेक्ट्रॉनिक सामान, ब्यूटी पार्लर, टेलरिंग यूनिट जैसी गतिविधियां शामिल रहीं. इन क्षेत्रों में कम पूंजी में उद्योग लगाने की सुविधा होने के कारण स्थानीय लोग तेजी से आगे आएं. वित्तीय वर्ष 2024-25 में भी लघु उद्योगों की स्थापना का सिलसिला जारी रहा. इस वर्ष कुल 71 नयी इकाइयां जिले में स्थापित की गयीं, जिनसे 277 कामगारों को रोजगार मिला. उद्योग विभाग के अधिकारी ज्योत्सना वर्मा बताया कि आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि जिले के युवा अब नौकरी की तलाश के साथ-साथ खुद का व्यवसाय शुरू करने में भी रुचि दिखा रहे हैं. लघु उद्योगों के माध्यम से रोजगार सृजन का मॉडल ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में कारगर साबित हो रहा है. पहले जहां युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे जिलों या राज्यों की ओर पलायन करना पड़ता था.

वहीं अब वे अपने ही जिले में काम कर रहे हैं. इससे न केवल पलायन पर रोक लगी है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है. लघु उद्योगों की स्थापना से केवल प्रत्यक्ष रोजगार ही नहीं मिलता, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से भी कई लोगों को काम के अवसर मिलते हैं. कच्चा माल सप्लाइ करने वाले, परिवहन से जुड़े लोग, पैकेजिंग, मार्केटिंग और बिक्री से जुड़े छोटे कारोबारी भी इससे लाभान्वित होते हैं. इस तरह एक उद्योग कई परिवारों की आजीविका का साधन बन जाता है.

समय-समय पर दिया जाता है प्रशिक्षण

जिला उद्योग केंद्र द्वारा समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम, ऋण सुविधा, अनुदान और तकनीकी सहायता उपलब्ध करायी जा रही है. उद्यमियों को बैंक लोन दिलाने में भी विभाग सहयोग कर रहा है, जिससे वे अपने उद्योग को सुचारू रूप से चला सकें. इसके अलावा उत्पादों के विपणन के लिए भी मेले, प्रदर्शनी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने की पहल की जा रही है. आने वाले वर्षों में और अधिक लघु व सूक्ष्म उद्योग स्थापित करने की योजना है. इसके लिए युवाओं को जागरूक किया जा रहा है और उन्हें सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है.

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