नहीं हैं बुखार और गैस की दवाएं
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :19 Jun 2019 5:34 AM (IST)
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डुमरांव : अनुमंडलीय अस्पताल में दवाओं का घोर अभाव है. आउटडोर में 56 दवाओं में 44, तो इंडोर में 65 में मात्र 37 दवाएं उपलब्ध हैं. अस्पताल में बुखार और गैस की दवा तक नहीं है. दर्द निवारक दवाएं भी एक-दो दिनों में समाप्त हो जायेंगी. जाहिर सी बात है ऐसे में मरीजों को काफी […]
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डुमरांव : अनुमंडलीय अस्पताल में दवाओं का घोर अभाव है. आउटडोर में 56 दवाओं में 44, तो इंडोर में 65 में मात्र 37 दवाएं उपलब्ध हैं. अस्पताल में बुखार और गैस की दवा तक नहीं है. दर्द निवारक दवाएं भी एक-दो दिनों में समाप्त हो जायेंगी. जाहिर सी बात है ऐसे में मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. गरीब-गुरबों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ती है.
सुदूर इलाके से मरीज इस आस में अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचते हैं कि बिना पैसे के उनका इलाज होगा और दवाएं भी मिल जायेंगी. लेकिन मरीजों के परिजन डॉक्टर से जांच कराने के बाद जब दवा कांउटर पर पहुंचते हैं, तो उन्हें अक्सर निराशा हाथ लगती है. 15 दिनों से बुखार, गैस और चोट लगने पर लगाया जानेवाला मलहम अस्पताल में नहीं है.
खांसी का सीरप आना बंद ही हो चुका है. फार्मासिस्ट संतोष कुमार कहते हैं कि कुछ ऐसी दवाएं स्टोर में मौजूद हैं, जिनका उपयोग नहीं के बराबर होता है. उन्होंने बताया कि आउटडोर में 56 दवाओं में 44 और इंडोर में 65 में 37 दवाएं ही उपलब्ध हैं. प्रतिदिन इसकी रिपोर्ट जिला मुख्यालय व राज्य स्वास्थ्य समिति को भेजी जाती है. फिर भी दवाओं की आपूर्ति नहीं हो रही, जिसका खामियाजा मरीज भुगत रहे हैं.
नहीं है चिकित्सकों का आवास : अनुमंडलीय अस्पताल में चिकित्सकों के रहने के लिए आवास नहीं है. अस्पताल परिसर में कमरों की संख्या कम नहीं है लेकिन चिकित्सकों के लिए आवास नहीं बनाया गया. चिकित्सक प्रतिदिन पटना, आरा, बक्सर से आवागमन करते हैं. अगर कैंपस में आवास रहता तो चिकित्सकों की ड्यूटी पर अंकुश लग सकता था.
अस्पताल परिसर में चापाकल का अभाव : अनुमंडलीय अस्पताल में चापाकल का अभाव है. अस्पताल परिसर में नप द्वारा चापाकल लगाया गया है, लेकिन यह हमेशा खराब ही रहता है. अस्पताल में पेयजल सुविधा के लिए तीन आरओ लगाये गये हैं, लेकिन ये मरीजों के काम नहीं आते.
स्वीकृत पद के अनुरूप नहीं हैं चिकित्सक व कर्मी
अनुमंडलीय अस्पताल में चिकित्सकों का पद 32 है लेकिन अस्पताल में कार्यरत चिकित्सकों की संख्या करीब 13 है. फिलहाल यहां सात डॉक्टर कार्यरत हैं. बाकी डॉक्टर छुट्टी पर चले गये या फिर उन्हें बक्सर सदर अस्पताल में प्रतिनियुक्त कर दिया गया.
वहीं एएनएम व जीएनएम का स्वीकृत पद 50 है, लेकिन कार्यरत मात्र छह हैं. महिला चिकित्सक नहीं रहने से महिला मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. बता दें कि सात प्रखंडों से जुड़े अनुमंडलीय अस्पताल के निबंधन कांउटर पर करीब 150-200 मरीजों का रोज निबंधन होता है.
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