किरायेदार का देना होगा आधार नंबर, पुलिस करेगी जांच

Updated at : 01 Jul 2018 1:06 AM (IST)
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किरायेदार का देना होगा आधार नंबर, पुलिस करेगी जांच

अपराध पर लगाम लगाने के लिए पुलिस-प्रशासन ने बनायी योजना डुमरांव : अपराध पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस ने कार्य योजना तैयार की है. अब मकान मालिकों को अपने घर में रखे गये किरायेदारों का बॉयोडाटा व आधार नंबर देना होगा. इसके बाद पुलिस इसकी जांच-पड़ताल करेगी. बॉयोडाटा में आधार कार्ड की छायाप्रति अनिवार्य […]

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अपराध पर लगाम लगाने के लिए पुलिस-प्रशासन ने बनायी योजना

डुमरांव : अपराध पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस ने कार्य योजना तैयार की है. अब मकान मालिकों को अपने घर में रखे गये किरायेदारों का बॉयोडाटा व आधार नंबर देना होगा. इसके बाद पुलिस इसकी जांच-पड़ताल करेगी. बॉयोडाटा में आधार कार्ड की छायाप्रति अनिवार्य है. शहरी मकान मालिक अपने किरायेदार का बॉयोडाटा स्थानीय थाने में देंगे, जिसकी जांच पुलिस करेगी. जानकारी के अनुसार अपराध पर रोकथाम को लेकर एसपी के निर्देश पर यह कार्य योजना तैयार की गयी है. इस योजना से असामाजिक तत्वों की पहचान करने में आसानी होगी. पुलिस ने कई फरार चल रहे अपराधियों की जब एड्रेस की की जांच की तो अधिकांश पत्ते फर्जी निकले. ऐसी स्थिति में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ती है. अब पुलिस शहर के मकानों की छानबीन कर किराये पर रह रहे लोगों की जांच-पड़ताल करेगी.
किरायेदार बन करते हैं लूटपाट : शहर विकसित होते ही नये-नये कॉलोनियों का विस्तार हुआ. इन कॉलोनियों में ज्यादातर मकान मालिक अपने मकानों को किराये के रूप में चलाते हैं. कई ऐसे तत्व भी शामिल हैं जो लूटपाट व अन्य आपराधिक घटनाओं में शामिल होकर अपने किराये के ठिकाने पर पहुंच जाते हैं. इसकी जानकारी मकान मालिक को भी नहीं मिल पाती. 11 अप्रैल को पुलिस ने एक अपहरण मामले की छानबीन करने स्थानीय चाणक्यपुरी कॉलोनी में पहुंची तो मामले का खुलासा हुआ. अपराधी यहां किरायेदार के रूप में रहता था. पिछले दिनों पुलिस ने छापेमारी कर शराब की बड़ी खेप को पकड़ा था. इस धंधे में शामिल धंधेबाज स्थानीय शहर में किराये पर रह कर शराब का कारोबार करता था.
शहर में हैं 10 हजार मकान : नगर पर्षद क्षेत्र में करीब 10 हजार आवासीय मकान हैं. एक अनुमान के अनुसार शहरी क्षेत्रों में करीब पांच हजार लोग किराये पर रहते हैं. शहर में दर्जनों कार्यालय, स्कूल व बैंकों की संस्थाएं भी शामिल हैं, जिनके कार्य को लेकर अधिकारी व कर्मचारी शहर में किराये के मकानों में रहते है. इसके अलावे पठन-पाठन को लेकर छात्र भी बतौर किरायेदार शामिल हैं. जिनका बॉयोडाटा स्थानीय पुलिस के पास नहीं है. बगैर बॉयोडाटा के रहने से पुलिस की मुश्किलें बढ़ जाती है.
आदेश नहीं माननेवालों पर होगी कार्रवाई
मकानधारकों को अपने घर में रखे गये किरायेदार का बॉयोडाटा प्रशासन को देना होगा. अगर किसी के मकान से आपराधिक तत्व की गिरफ्तारी होती है तो मकानमालिक पर भी कार्रवाई की जायेगी.
केके सिंह, डीएसपी डुमरांव.
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