स्कूल बैग एक्ट का निजी स्कूल उड़ा रहे धज्जियां

Updated at : 26 Apr 2018 4:45 AM (IST)
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स्कूल बैग एक्ट का निजी स्कूल उड़ा रहे धज्जियां

मानकों से ज्यादा भारी हैं नर्सरी बच्चों के स्कूल बैग बच्चों में हो सकती है बीमारी बक्सर : स्कूलों में नन्हें बच्चों की पीठ पर बढ़ते बस्ते के वजन को कम करने के लिए 2006 में चिल्ड्रेन स्कूल बैग एक्ट बनाया गया था लेकिन जिले में संचालित हो रहे तमाम निजी विद्यालयों में इस एक्ट […]

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मानकों से ज्यादा भारी हैं नर्सरी बच्चों के स्कूल बैग

बच्चों में हो सकती है बीमारी
बक्सर : स्कूलों में नन्हें बच्चों की पीठ पर बढ़ते बस्ते के वजन को कम करने के लिए 2006 में चिल्ड्रेन स्कूल बैग एक्ट बनाया गया था लेकिन जिले में संचालित हो रहे तमाम निजी विद्यालयों में इस एक्ट का प्रभाव नहीं दिख रहा है और न ही इस एक्ट का डर किसी विद्यालय को है. सभी स्कूलों में नये सत्र की पढ़ाई शुरू हो चुकी है. बच्चे अपनी क्षमता से भी ज्यादा वजन के बैग अपनी पीठ पर लिए स्कूल जाते हैं. डॉक्टरों की मानें तो क्षमता से ज्यादा वजन उठाने से बच्चों की तबीयत खराब हो सकती है. वहीं चिल्ड्रेन एक्ट में बनाये गये प्रावधानों का तनिक भी विद्यालय संचालकों पर असर नहीं है.
कई विद्यालयों में एक विषय के एक से अधिक पुस्तकों की पढ़ाई होती है. क्लास बढ़ने के साथ ही बस्ती का भजन भी बढ़ जाता है. चिल्ड्रेन स्कूल बैग एक्टर के प्रावधानों के अनुसार 12वीं तक के बच्चों के बस्ते का वजन शुरू से अधिकतम छह किलोग्राम तक होनी चाहिए. एक्ट का उल्लंघन करने पर तीन लाख रुपये तक का जुर्माना है पर इसका कोई असर नहीं है.
बच्चों के बैग में होती हैं 10 से 15 किताबें : निजी स्कूलों की बुक लिस्ट पर नजर डाली जाये तो हर बच्चे के बैग में औसतन 10 से 15 पुस्तकें शामिल हैं. इसके अलावे सभी विषयों की कॉपियां भी ले जानी पड़ती हैं.
उल्लंघन करने पर दंड का है प्रावधान : चिल्ड्रेन स्कूल बैग एक्ट के प्रावधान का उल्लंघन तथा अनदेखी करने पर सजा का प्रावधान है. प्रावधान के तहत तीन लाख तक जुर्माना तथा संबंधित बोर्ड से मान्यता रद्द करने की कार्रवाई की जा सकती है.
क्या होता है शरीर पर प्रभाव : बच्चे के बैग का वजन अपेक्षाकृत अधिक होता है तो कई बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती है. इससे मांस पेशियों की क्षमता प्रभावित होती है. भारी बैग के कंधे पर टांगनेवाली पट्टी अगर पथरी हो तो कंधे की नसों पर असर पड़ता है. कंधा धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगता है और उसमें हर समय दर्द रहता है.
क्या है भारतीय मानक
कक्षा पहली से दूसरी तक दो किलोग्राम
कक्षा तीसरी चौथी तक तीन किलोग्राम
कक्षा पांचवीं से आठवीं तक चार किलोग्राम
कक्षा नवमी से 12 मई तक छह किलोग्राम होनी चाहिए
बच्चों के बैग का मौजूदा वजन
नर्सरी में तीन से चार किलोग्राम
पहली कक्षा में चार से पांच किलोग्राम
दूसरी कक्षा में पांच किलोग्राम
पांचवीं कक्षा में आठ किलोग्राम
कहते हैं जिला शिक्षा पदाधिकारी
निजी विद्यालय जिला शिक्षा विभाग के नियंत्रण से बाहर हैं. इस लिए उनके ऐसे क्रिया विधियों की जांच जिला शिक्षा विभाग नहीं कर पाता है.
रामेश्वर प्रसाद, जिला शिक्षा पदाधिकारी, बक्सर
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