दहेज हत्या में पति को आजीवन कारावास
Updated at : 23 Mar 2018 3:46 AM (IST)
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सास-ससुर को सात-सात वर्षों का सश्रम कारावास बक्सर कोर्ट : अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश छह उदय कुमार उपाध्याय ने दहेज हत्या के एक मामले में दोषी पति को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनायी है. मामले के अन्य दो अभियुक्तों सास, ससुर को न्यायालय ने सात-सात वर्षों की कारावास की सजा के साथ-साथ सभी […]
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सास-ससुर को सात-सात वर्षों का सश्रम कारावास
बक्सर कोर्ट : अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश छह उदय कुमार उपाध्याय ने दहेज हत्या के एक मामले में दोषी पति को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनायी है. मामले के अन्य दो अभियुक्तों सास, ससुर को न्यायालय ने सात-सात वर्षों की कारावास की सजा के साथ-साथ सभी अभियुक्तों पर पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया. वहीं भारतीय दंड विधान की धारा 201 के तहत सभी अभियुक्तों को 5-5 वर्षों की सजा सुनायी. सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी.
गुरुवार को खचाखच भरे न्यायालय में न्यायाधीश ने तीनों अभियुक्तों को दोषी पाते हुए उक्त सजा सुनायी है. सुनवाई में अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बहस में हिस्सा लिया.
क्या था मामला : राजपुर थाना के खीरी गांव के रहनेवाले मुन्ना पाल की पुत्री शीला कुमारी की शादी 29 अप्रैल 2007 को भभुआ जिले के सातों एवती के रहनेवाले राजेश पाल के साथ हुई थी. बरात के समय सात हजार रुपये की मांग को लेकर लड़के पक्ष के लोगों ने शादी से इन्कार कर दिया था. बाद में ग्रामीणों के काफी समझाने बुझाने के बाद शादी संपन्न हुई थी लेकिन इस बीच रुपये की मांग लगातार की जा रही थी. वर्ष 2011 में लड़की ने अपने मायके के लोगों को बताया था कि उसे वापस घर ले चला जाये. नहीं तो ये लोग उसकी हत्या कर देंगे. पीड़ित पक्ष के लाख प्रयास के बाद भी उसकी विदाई नहीं की गयी थी.
बाद में उसके परिजनों को सूचना मिली कि शीला कुमारी को गायब कर दिया गया है. जब उसके पिता ने ससुराल पहुंच कर पूछताछ की तो बताया गया था कि वो विदाई के डर से फरार हो गयी है. वहीं गांववालों ने बताया कि उसकी हत्या कर लाश को जला दिया गया है.
उपेक्षा का था पुलिस का रवैया : लड़की के पिता ने घटना की सूचना राजपुर थाना को दी, जहां उसे भभुआ थाना में जाने की सलाह दी गयी थी लेकिन वहां की पुलिस वापस उसे राजपुर थाना भेज दी.
दो थानों के बीच में कई दिनों तक दौड़ने के बाद मृतिका के पिता मुन्ना पाल ने उक्त मामले को लेकर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में परिवाद दाखिल किया, जहां सुनवाई के बाद न्यायालय ने राजपुर थाना को मामला दर्ज कर अनुसंधान करने का आदेश दिया. जांच के क्रम में सारा रहस्य परत दर परत खुलता चला गया.
क्योंकि मृतका के पिता को घरवालों ने पहले फरार होने की बात बतायी थी तथा बाद में बताया कि लड़की मर गयी थी, जिसका उन लोगों ने दाह संस्कार कर दिया था. सुनवाई में अभियोजन पक्ष की तरफ से कुल नौ गवाहों की गवाही कलमदर्ज की गयी, जिसके बाद न्यायालय ने सारे सबूतों एवं बयानों के आधार पर मृतिका के पति राजेश पाल, सास ललिता देवी एवं ससुर परमेश्वर पाल को उक्त सजा सुनायी है.
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