किस परिस्थितियों ने स्कूली बच्चों को बनाया ‘रेत का सौदागर’

Updated at : 22 Feb 2018 12:34 AM (IST)
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किस परिस्थितियों ने स्कूली बच्चों को बनाया ‘रेत का सौदागर’

जिले के चोढ़दरगाह में स्कूल छोड़ बालू की निकासी करते हैं छात्र शेखपुरा : प्रदेश भर में बालू को लेकर सरकार के फैसले से आम लोगों को परेशानी हो रही है़ इसका असर बच्चों पर पड़ेगा, यह किसी ने नहीं सोचा था़ दरअसल बालू की किल्लत जैसे ही शुरू हुई विभिन्न क्षेत्रों में माफियाओं की […]

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जिले के चोढ़दरगाह में स्कूल छोड़ बालू की निकासी करते हैं छात्र

शेखपुरा : प्रदेश भर में बालू को लेकर सरकार के फैसले से आम लोगों को परेशानी हो रही है़ इसका असर बच्चों पर पड़ेगा, यह किसी ने नहीं सोचा था़ दरअसल बालू की किल्लत जैसे ही शुरू हुई विभिन्न क्षेत्रों में माफियाओं की सक्रियता तेज हो गयी़ छोटी-छोटी नदियों और खेतों के निचले सतह से बालू की खुदाई कर चोरी-छिपे बेचने का सिलसिला शुरू हो गया.
इस कारोबार में हर दिन लाखों की कमाई करने वाले बालू माफियाओं पर जब पुलिस का शिकंजा कसा तब एक नया फार्मूला तैयार किया गया. इस फार्मूले में बालू की निकासी करने का जिम्मा एक ऐसे सौदागर के हाथ में दे दिया गया, जिनके पास हाथों में कलम और किताब होनी चाहिए.
कौड़िहारी नदी में हो रही है अवैध निकासी
अरियरी प्रखंड के चोढ़दरगाह गांव के पास नवादा से जुड़ी कौड़िहारी नदी में सुबह से लेकर शाम तक बच्चे गड्ढा खोदकर बालू निकालते हैं. दरअसल नदी को तीन से चार फुट खुदाई करने पर बालू निकल आता है.
स्कूली बच्चे छोटे-छोटे बर्तनों से बालू को एकत्रित कर नदी के किनारे ढेर लगाते हैं और फिर ढेर तैयार होने पर माफियाओं को खबर दी जाती है. माफिया बच्चों को थोड़े पैसे देकर बालू खरीद लेते हैं और उसे बाजार में मनमानी कीमत पर बेचते हैं.
स्थानीय बालू माफियाओं के हाथों में धंधे की कमान
स्थानीय बालू माफिया बच्चों को इस काम के प्रति उकसाते हैं. इस धंधे में अंतत: उन्हें ही काफी लाभ होता है़ बच्चों को थोड़े पैसे मिलते हैं, पर माफिया मालामाल होते हैं. इससे उन बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ता है़ स्कूली बच्चे बालू की खुदाई में जुटे रहते हैं. इससे यहां के स्कूलों में उपस्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है़ पिछले दिनों प्रभात खबर ने बालू के अवैध उत्खनन में स्थानीय पुलिस की संलिप्तता को उजागर किया था़ इसके बाद कई लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गयी थी़
घर का खर्च निकालने के लिए बच्चे करते हैं काम
रेत के नन्हे सौदागर से जब कोई बाहरी व्यक्ति बालू निकासी की जानकारी लेना चाहता है तो बच्चे उन्हें घरेलू जरूरतें पूरी करने की बात कहते हैं. बालू के इस खेल में नन्हे सौदागर पांच-छह के समूह में होते हैं
और हर दिन एक ट्राॅली बालू निकाल कर माफियाओं के हाथों में 15 सौ रुपये ट्रॉली की दर से बेचते हैं. इसके साथ ही बालू के खुदरा कारोबार में प्रति टीना 15 रुपये की दर से नन्हे सौदागर स्थानीय जरूरतमंदों को बालू की आपूर्ति करते हैं. लगभग आधा किलोमीटर फैले रेत के इस कारोबार में हर दिन चार से पांच ट्राली बालू की निकासी होती है.
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