खतरनाक हो गये हैं व्यवहार न्यायालय के बंदर

Updated at : 29 Nov 2017 6:07 AM (IST)
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खतरनाक हो गये हैं व्यवहार न्यायालय के बंदर

रोज घटनाओं को देते हैं अंजाम, कई लोग हो चुके हैं घायल बक्सर कोर्ट : बक्सर व्यवहार न्यायालय परिसर में कुछ वर्ष पूर्व बंदर दिखायी नहीं देते थे लेकिन धीरे-धीरे इनका आना-जाना शुरू हो गया. समय के साथ इनकी संख्या में भारी वृद्धि हुई, जिसके बाद न्यायालय परिसर में इनकी संख्या आज की तारीख में […]

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रोज घटनाओं को देते हैं अंजाम, कई लोग हो चुके हैं घायल

बक्सर कोर्ट : बक्सर व्यवहार न्यायालय परिसर में कुछ वर्ष पूर्व बंदर दिखायी नहीं देते थे लेकिन धीरे-धीरे इनका आना-जाना शुरू हो गया. समय के साथ इनकी संख्या में भारी वृद्धि हुई, जिसके बाद न्यायालय परिसर में इनकी संख्या आज की तारीख में सैकड़ों के पास पहुंच गयी है. परिसर में लगे पेड़ों के अलावा आसपास के खेतों में मिल ये खाने-पीने के सामान के कारण यहां ठहर गये हैं. इनके उत्पात से हर कोई परेशान है. सुबह 10 बजे से पहले तथा शाम होने के साथ ही इनके खतरनाक एवं आक्रामक रवैया के कारण लोग परिसर में अब जाने से कतराने लगे हैं. हालांकि दिन में अधिवक्ताओं एवं अन्य लोगों की भारी भीड़ परिसर में रहती इससे थोड़ा कम परेशान करते हैं.
कई बड़ी घटनाओं दिया है अंजाम : न्यायालय परिसर में मौजूद बंदरों का समूह अमूमन प्रतिदिन किसी-न-किसी को काट कर घायल कर रहे हैं. दूरदराज से मुकदमों के पैरवी में आनेवाले लोग दिन में अपने खाने के लिए कुछ सामान झोले में लाते हैं, जिन पर बंदरों की नजर रहती है. पलक झपकते ही उनके सामान को छीनकर ये पेड़ या कोर्ट के छत पर पहुंच जाते हैं. ऐसे में कई बार उनके जरूरी कागजात भी बर्बाद हो जाते हैं. कई लोगों को बंदरों ने बुरी से तरह जख्मी किया है. अधिवक्ता दिवाकर पांडेय पर बंदरों ने अचानक हमला कर उनके कान को काटकर अलग कर दिया था. उनका महीनों तक बनारस में इलाज किया गया था.
अधिवक्ता संतोष कुमार मिश्रा भी इनके हमले में घायल हो चुके हैं तथा अपनी शिकायत को जिलाधिकारी के अलावा न्यायिक पदाधिकारियों के समक्ष दर्ज करायी थी. बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं की गयी.
हाइकोर्ट के आदेश का भी सही ढंग से नहीं हुआ पालन : बक्सर न्यायालय परिसर में बार-बार होनेवाली घटनाओं को लेकर उच्च न्यायालय ने संज्ञान लिया था. कोर्ट ने वन विभाग एवं जिलाधिकारी को बंदरों से न्यायालय परिसर को सुरक्षित रखने के लिए आदेश दिया था, जिसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी रमण कुमार ने न्यायालय परिसर का दौरा कर बंदरों से निजात दिलाने का आश्वासन दिया था. उच्च न्यायालय के आदेश के बाद वन विभाग की टीम दो बार बक्सर न्यायालय परिसर पहुंची थी लेकिन उनके द्वारा व्यापक स्तर पर कार्रवाई नहीं की गयी और दो चरणों में सिर्फ पांच बंदरों को पकड़ कर महज खानापूर्ति कर ली गयी थी. इस संबंध में संघ के अध्यक्ष विजय नारायण मिश्रा ने बताया कि न्यायालय परिसर में बंदरों के चलते खतरनाक स्थिति बनी हुई है तथा वे जल्द ही इसके लिए माननीय उच्च न्यायालय में पत्र लिखेंगे.
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