मशरूम की खेती कर हों मालामाल

Updated at : 21 Nov 2017 4:33 AM (IST)
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मशरूम की खेती कर हों मालामाल

किसान अपने घर के बेकार पड़ी जमीन में कर सकते हैं मशरूम की बेहतर पैदावार बक्सर : हमारे देश के अन्नदाता बदहाल हैं लेकिन उनके लिए मशरूम की खेती आमदनी का एक कारगर विकल्प है. इसका उत्पादन कम या बिना खेतवाले युवा या महिलाएं सभी कर सकती हैं. इसे झोंपड़ियों में पक्का मकान के अंदर […]

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किसान अपने घर के बेकार पड़ी जमीन में कर सकते हैं मशरूम की बेहतर पैदावार

बक्सर : हमारे देश के अन्नदाता बदहाल हैं लेकिन उनके लिए मशरूम की खेती आमदनी का एक कारगर विकल्प है. इसका उत्पादन कम या बिना खेतवाले युवा या महिलाएं सभी कर सकती हैं. इसे झोंपड़ियों में पक्का मकान के अंदर या किसी भी खाली जगह पर किया जा सकता है. जिले में दो प्रकार के मशरूम की खेती आसानी से की जा सकती है. पहला आयस्टर और दूसरा बटन मशरूम. जिले में आयस्टर मशरूम की खेती हो पाती है. जिले में एक दर्जन के करीब किसान मशरूम की खेती कर अपनी आमदनी से विकास की नयी गाथा लिख रहे हैं.
आयस्टर मशरूम उगाने की विधि : मशरूम की खेती छायादार जगह में होती है. इस खेती के लिए भूसा या पुआल की कुट्टी की आवश्यकता होती है. पुआल को पानी के भाप से उबालना पड़ता है. भूसा को उबालने के बाद साफ फर्श पर रख कर ठंडा किया जाता है. गीले भूसा को पूरी तरह पानी निकल जाने तक सुखाया जाता है. इसके बाद सूखे भूसा में मशरूम का बीज मिलाकर एक गोला बनाया जाता है, जिसमें कवक आने के बाद उसे ठंडी जगह पर लटका दिया जाता है, जिसमें एक महीने में मशरूम तैयार हो जाता है.
प्रतिकिलो ग्राम शुष्क कुट्टी या भूसा के हिसाब से 150 ग्राम मशरूम का बीज उसमें अच्छी तरह मिलाया जाता है. एक किलो भूसा में 150 ग्राम मशरूम का बीज इस्तेमाल होगा. गीले भूसा या कुट्टी में मशरूम बीज मिलाने के बाद जालीदार पॉलीथिन बैग में भर दिया जाता है. ऐसा करने के बाद उसे ठंडी जगह पर रख दिया जाता है.
25 दिनों में तैयार होगा मशरूम : ध्यान रहे कि मशरूम बीज से भरा पॉलीथिन बैग रख रहे हों वहां का तापमान न्यूनमत 20 डिग्री और अधिकतम 30 डिग्री से ज्यादा न हो. अगले 10 से 15 दिनों में मशरूम कवक उस जालीदार बैग के भीतर फैल जाता है और 15-20 दिनों में मशरूम निकलना शुरू हो जाता है, जो अगले 3-5 दिनों में तोड़ने लायक हो जाता है. इस तकनीक से सालों तक इस प्रभेद का उत्पादन संभव है. वैसे सितंबर से मार्च का समय इसके लिए काफी उपयुक्त होता है.
परिपक्व मशरूम को तोड़ लेने के बाद यदि अपेक्षित नमी बरकरार रखी जाये तो दुबारा भी इससे उत्पादन लिया जा सकता है.
लागत के अपेक्षा होती है आय : इस प्रभेद का उत्पादन खर्च 15-18 रुपये प्रतिकिलो पड़ता है. जबकि सामान्य बाजार में इसे 100 रुपये प्रति किलो के हिसाब से आसानी से बेचा जा सकता है. मशरूम की खेती को ढिंगरी के नाम से भी जाना जाता है.
कम लागत में ज्यादा फायदा
जिले में सितंबर से अप्रैल माह तक मशरूम की खेती आसानी से की जा सकती है. इस समय में मशरूम के लिए जिले में अनुकूल माहौल वातावरण होता है, जिसमें लागत कम और फायदा ज्यादा होता है. किसानों को आसानी से बाजार भी जिले में ही उपलब्ध हो जाता है. चूंकि मशरूम का उत्पादन घर के बेसमेंट में भी आसानी से किया जा सकता है.
डॉ देवकरण, कृषि वैज्ञानिक, बक्सर
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