एक साल से बंद था ओएसडी का वेतन

Updated at : 20 Nov 2017 12:34 AM (IST)
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एक साल से बंद था ओएसडी का वेतन

बासा के अध्यक्ष ने वेतन बंद करानेवाले लोगों पर कार्रवाई की मांग की जून, 2016 में बनाये गये थे डीएम के ओएसडी बक्सर : रविवार की सुबह बक्सर जिला प्रशासन के लिए काला दिन साबित हुआ. पौ फटने के साथ ही एक ऐसी मनहूस खबर आयी जिससे बक्सर से लेकर मुख्यालय पटना तक हड़कंप मच […]

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बासा के अध्यक्ष ने वेतन बंद करानेवाले लोगों पर कार्रवाई की मांग की
जून, 2016 में बनाये गये थे डीएम के ओएसडी
बक्सर : रविवार की सुबह बक्सर जिला प्रशासन के लिए काला दिन साबित हुआ. पौ फटने के साथ ही एक ऐसी मनहूस खबर आयी जिससे बक्सर से लेकर मुख्यालय पटना तक हड़कंप मच गया. मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति भूअर्जन पदाधिकारी सह डीएम के ओएसडी तौकीर अकरम ने पंखे से लटक कर आत्महत्या कर ली.
सूचना मिलते ही पूरे महकमे में हड़कंप मच गया. जिसने भी इस बात को सुना सभी सन्न रह गया. सूचना मिलते ही जिले के वरीय अधिकारी घटनास्थल की ओर रवाना हुए. एक-एक कर कई बिंदुओं पर जांच की गयी. सभी ने बस यही कहा कि एक साल से वेतन बंद रहने के कारण उनकी स्थिति ठीक नहीं थी. घटना की सूचना पाकर बासा के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पहुंचे, जहां अधिकारियों के साथ घटना के संबंध में जानकारी ली. उन्होंने कहा कि एक साल से जमीन के एक मामले में उनका वेतन बंद करा दिया गया था.
ट्रांसफर कराकर जाना चाहते थे दूसरी जगह : तौकीर अकरम वीर कुंवर सिंह कॉलोनी स्थित किराये के मकान में रहते थे, जहां उनकी मां और पत्नी भी साथ रहती थीं. दो दिन पहले पत्नी फुलवारीशरीफ गयी हुई थीं. घटना की सूचना पाकर उनकी पत्नी भी बक्सर पहुंचीं. घटना के वक्त घर में उनकी मां मौजूद थीं. रोते-रोते मां ने कहा कि अधिकारी ट्रांसफर करने केलिए पैसे की मांग कर रहे थे. इस घटना के बाद मां का रो-रो कर बुरा हाल हो गया है. अधिकारी पूरे दिन उनकी मां को सांत्वना बंधाते रहे.
1973 के जमीन मामले में चल रहा था केस
उमरपुर के भूमि विवाद को लेकर पटना हाइकोर्ट में मामला चल रहा था, जिसकी सुनवाई के दौरान वह बक्सर से पटना हाइकोर्ट आया जाया करते थे. पटना आने-जाने के दौरान अधिकारी के पास इतने भी पैसे नहीं होते थे कि वह न्यायिक कार्यों में लगनेवाले खर्चे का भुगतान कर सकें. हाइकोर्ट जाने के लिए वह अपनी मां से हजार-दो हजार रुपये लेकर जाया करते थे.
इनकी मां पटना वीमेंस कॉलेज में लेक्चरर के पद पर कार्यरत थीं जो दो साल पहले सेवानिवृत्त हो चुकी हैं. इसके बाद से ही तौकीर अकरम अपनी मां को बक्सर में ही रखे थे. बताया जा रहा है कि अकरम की पढ़ाई-लिखाई अपने मामा के घर फुलवारीशरीफ स्थित रिटायर्ड आईएएस अधिकारी फैज अकरम के यहां ही हुई थी. जहां उन्होंने बचपन से ही ईमानदारी का पाठ पढ़ा था. अपने अंतिम पत्र में भी उन्होंने अपनी ईमानदारी का परिचय दुनिया के सामने छोड़ ही दिया है.
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