बिहार : चरित्रवन पहुंचकर समाप्त हुई पंचकोसी यात्रा, लिट्टी-चोखा का बना प्रसाद

Updated at : 13 Nov 2017 6:49 AM (IST)
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बिहार : चरित्रवन पहुंचकर समाप्त हुई पंचकोसी यात्रा, लिट्टी-चोखा का बना प्रसाद

बक्सर : रविवार को पंचकोसी यात्रा बक्सर के चरित्रवन पहुंच कर समाप्त हो गयी. पांच दिनों तक चली इस पंचकोसी यात्रा में लाखों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया. श्रद्धालुओं ने पुरानी मान्यताओं के अनुसार लिट्टी-चोखा का प्रसाद बनाकर ग्रहण किया. लिट्टी चोखा बनाने में शुद्धता का पूरा ख्याल रखा जाता है. गाय के गोबर से बने […]

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बक्सर : रविवार को पंचकोसी यात्रा बक्सर के चरित्रवन पहुंच कर समाप्त हो गयी. पांच दिनों तक चली इस पंचकोसी यात्रा में लाखों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया. श्रद्धालुओं ने पुरानी मान्यताओं के अनुसार लिट्टी-चोखा का प्रसाद बनाकर ग्रहण किया. लिट्टी चोखा बनाने में शुद्धता का पूरा ख्याल रखा जाता है. गाय के गोबर से बने उपले की आग से लिट्टी और चोखा को पकाया जाता है. उपले की आग से निकले धुएं से पूरा किला मैदान धुंध में डूब गया था.
इस दौरान लोगों ने रामरेखा घाट पर स्नान कर पूजा-पाठ करने के बाद लिट्टी-चोखा का प्रसाद बनाकर अपने और सगे-संबंधियों को ग्रहण कराया. सुबह से ही स्टेशन से लेकर किला मैदान तक महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं के आने का तांता लगा हुआ था. श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण किला मैदान छोटा पड़ने लगा था. इस प्राचीन परंपरा व संस्कृति को मनाने के लिए लाखों की संख्या में लोग पहुंचे थे. श्रद्धालु एक छोटी-सी जगह के लिए भटकते नजर आये.
जिन्हें जहां जगह मिली वहीं बैठ कर लिट्टी पकाने लगे. एक श्रद्धालु के लिट्टी बनाकर हटते ही दूसरा श्रद्धालु अपना सामान वहां रखने लग जाते थे. पंचकोसी को देखते हुए शनिवार की देर रात से बड़े वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गयी थी, जिससे बड़े वाहन नगर के बाहर ही रोक लिये गये थे. साथ ही नगर में चलनेवाले ऑटो के मार्ग बदल दिये गये थे. जाम न लगे, इसके लिए पुलिस बलों की तैनाती गयी थी.
श्रद्धालुओं ने लिट्टी-चोखा का खाया प्रसाद
पंचकोसी परिक्रमा का पांचवां व अंतिम पड़ाव बक्सर का चरित्रवन है, जहां पहुंचकर श्रद्धालुओं ने लिट्टी-चोखा का प्रसाद ग्रहण किया. भगवान राम ने अपनी यात्रा के पांचवें दिन लिट्टी-चोखा का प्रसाद ग्रहण किया था. उसी मान्यता के अनुसार पांचवें पड़ाव पर श्रद्धालुओं ने किला मैदान में गाय के गोबर के उपले जलाकर उस पर लिट्टी-चोखा बनाया और का प्रसाद ग्रहण किया. यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा.
बसांव मठ पर संतों ने किया विश्राम, विदाई आज
पंचकोसी परिक्रमा में शामिल होने आये हजारों साधु-संतों की विदाई आज की जायेगी. त्रेता युग में विश्वामित्र के संग पंचकोसी यात्रा पूर्ण कर श्रीराम, लक्ष्मण बसांव मठ स्थित विश्राम कुंड पर ही रात्रि विश्राम किये थे. दूसरे दिन महात्मागण सहित उनकी विदाई का कार्य होगा़ जानकारी देते हुए परिक्रमा समिति के सचिव डॉ रामनाथ ओझा ने बताया कि विदाई बसांव मठाधीश्वर द्वारा की जायेगी.
इन संतों ने परिक्रमा में लिया भाग
पंचकोसी यात्रा पांचवें पड़ाव चरित्रवन स्थित विश्वामित्र के आश्रम पहुंची. यहां श्रीनिवास मंदिर में रविवार की दोपहर में विराट संत सभा की गयी. इसमें समिति के अध्यक्ष व बसांव मठाधीश्वर अच्यूत प्रपन्नाचार्य जी महाराज, लक्ष्मीनारायण मंदिर के महंत राजगोपालाचार्य जी महाराज, श्रीनिवास मंदिर के दामोदराचार्य के अलावा कुलशेखर जी, भोला बाबा, नारायण उपाध्याय, छविनाथ त्रिपाठी आदि शामिल हुए.
संत सभा में जीवन की अच्छाई, परिक्रमा का महत्व, परमात्मा के स्वरूप पर सारगर्भित चर्चा की गयी.
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