अभिलेखों में दर्ज 138 तालाब स्थल से गायब

Updated at : 19 Jul 2017 11:26 AM (IST)
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अभिलेखों में दर्ज 138 तालाब स्थल से गायब

अफसरों की मिलीभगत से चल रहा बड़ा खेल बक्सर : तालाब तो बहुत थे, लेकिन भू-माफियाओं ने उनको पटवा कर कहीं काॅलोनी तो कहीं दुकान, बिल्डिंग के नीचे सौ से ज्यादा तालाब दफन हो गये. अभिलेखों में दर्ज 138 तालाब मौके से गायब पाये गये थे. सर्वे में चिह्नित करने के बाद अफसरों ने इन […]

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अफसरों की मिलीभगत से चल रहा बड़ा खेल
बक्सर : तालाब तो बहुत थे, लेकिन भू-माफियाओं ने उनको पटवा कर कहीं काॅलोनी तो कहीं दुकान, बिल्डिंग के नीचे सौ से ज्यादा तालाब दफन हो गये. अभिलेखों में दर्ज 138 तालाब मौके से गायब पाये गये थे.
सर्वे में चिह्नित करने के बाद अफसरों ने इन तालाबों को पुनर्जीवित करने का प्लान भी बनाया. एसडीओ और सीओ को सारे तालाबों से कब्जा हटवाने की जिम्मेवारी दी गयी थी. अफसरों ने दौड़ भाग कर खानापूरी में ही मामला निबटा दिया. गायब मिले ज्यादातर तालाबों पर भू-माफियाओं का कब्जा बताया गया. गुपचुप तरीके से तालाबों को पाट कर उन पर मकान बनवा दिये गये. गांवों में भी बड़ी तादाद में तालाबों को पाटा गया है. जिले में भू-माफिया लगातार सरकारी तालाबों पर अवैध कब्जा कर प्लाॅटिंग कर रहे हैं और कब्जा करवाने में प्रशासन की मिली भगत सामने आ रही है. एक तरफ सरकार मनरेगा योजना के तहत करोड़ों अरबों रुपये लगाकर तालाब की खुदाई करायी जा रही है, वहीं भू-माफिया उस पर अवैध प्लाॅटिंग कर मोटी कमाई रहे हैं.
पहले फर्जी बंदोबस्ती फिर कब्जे के बाद बेचने का खेल: शहर में देखा जाये तो सबसे ज्यादा सरकारी तालाबों की पटाई की गयी है और आज उसी तालाब पर प्लाॅटिंग करके मकान तैयार किये जा रहे हैं.
शहर के पांडेय पट्टी स्थित तालाब पर सबसे पहले कब्जे का खेल शुरू हुआ. जानकार बताते हैं कि शहर के भू-माफियाओं की नजर उस जमीन पर काफी दिनों से थी. मौका मिलते ही संबंधित पदाधिकारियों से सौदा किया गया. इसके बाद फर्जी तरीके से तालाब की बंदोबस्ती करायी गयी. बदले में पदाधिकारियों को भारी-भरकम चढ़ावा दिया गया. हरी झंडी मिलते ही प्लाॅटिंग कर करोड़ों रुपये में बेच दिया गया.
कई बार पत्राचार के बावजूद कब्जे की होड़: मछुआरों के जीवन स्तर को सुधारने को लेकर सरकार कई योजनाओं को लागू कर रही है़. वहीं शहर में ऐसे कई तालाब हैं जो अतिक्रमित हैं और यहां मछुआरे मछली पालन नहीं करते हैं. यह अतिक्रमण स्थानीय लोगों द्वारा लगातार किया जा रहा है़. लोग तालाबों को भरते जा रहे हैं और अपने मनमाफिक अतिक्रमण करते जा रहे हैं. जिला मत्स्य विभाग ने अतिक्रमण हटाने को लेकर कई बार अंचलाधिकारी को पत्र लिख चुका है़. बावजूद इसके बक्सर अंचल विभाग तालाबों से अतिक्रमण नहीं हटा सका.
कुछ वर्ष पहले तक होता था मछली पालन: यहां कुछ वर्षों पहले इन तालाबों में मछुआरे मछली पालन करते थे. लोग बताते हैं कि इन तालाबों में मछली का उत्पादन होता था. पर धीरे-धीरे स्थानीय लोगों ने इसे अतिक्रमित कर लिया और आज तालाबों पर मकान भी बन चुके हैं. विश्राम पोखरे को तो नगर पर्षद ने ही डंपिंग जोन बना कर भर दिया. यह पोखरा स्टेशन रोड में बसांव मठिया के पास स्थित है.
शहर के ये तालाब हैं अतिक्रमित
नया बाजार स्थित मितो पोखरा, बसांव मठिया के सामने विश्राम पोखरा, स्टेशन रोड स्थित सीनेटरी गड़हा, मल्लाह टोली स्थित चमरगड़ही अतिक्रमण की चपेट में है़ नया बाजार के मितो पोखरे को लोगों ने चारों तरफ से अतिक्रमण कर रखा है़ पोखरे को लगातार भरा जा रहा है और उसमें अपने मकानों का विस्तार भी दिया जा रहा है़ इसके अलावा चमरगड़ही और सीनेटरी गड़हा का हाल भी यही है़
कराया जा रहा सर्वे
जिले के तालाबों को अतिक्रमण से मुक्त कराया जायेगा. इसके लिए सर्वे कराया जा रहा है. तालाबों के अतिक्रमण की सूची तलब की गयी है.
रमण कुमार, डीएम
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