हर-हर महादेव से गूंजा ब्रह्मेश्वरनाथ धाम

Updated at : 18 Jul 2017 12:20 PM (IST)
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हर-हर महादेव से गूंजा ब्रह्मेश्वरनाथ धाम

कई शिवालयों में आरती और संध्या भजन का किया गया आयोजन रामरेखा घाट से जल उठाकर पैदल पहुंचे हजारों कांवरिया बक्सर : सावन की दूसरी सोमवारी पर लाखों भक्तों ने ब्रह्मपुर स्थित बाबा ब्रह्मेश्वरनाथ मंदिर के साथ-साथ जिले के अन्य शिवालयों में जलाभिषेक किया. इस दौरान हर-हर महादेव के नारों से पूरे दिन मंदिर और […]

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कई शिवालयों में आरती और संध्या भजन का किया गया आयोजन
रामरेखा घाट से जल उठाकर पैदल पहुंचे हजारों कांवरिया
बक्सर : सावन की दूसरी सोमवारी पर लाखों भक्तों ने ब्रह्मपुर स्थित बाबा ब्रह्मेश्वरनाथ मंदिर के साथ-साथ जिले के अन्य शिवालयों में जलाभिषेक किया. इस दौरान हर-हर महादेव के नारों से पूरे दिन मंदिर और शिवालय गूंजते रहे. मंदिरों में पूजा-अर्चना और जलाभिषेक को लेकर कांवरियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो इसके लिए जिला प्रशासन के साथ-साथ मंदिर प्रबंधन द्वारा भी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये गये थे.
रामरेखा घाट से जल उठाकर कांवरियों ने 35 किलोमीटर की यात्रा तय कर सुबह के चार बजे से ही कांवरिया जल लेकर बाबा ब्रह्मेश्वरनाथ मंदिर में पहुंचने लगे थे.
दूसरी सोमवारी को लेकर कई जगहों पर भजन और कीर्तन का भी आयोजन किया गया था, जहां भक्तिमय गीतों पर कांवरिया झूमते नजर आये. वहीं, मेले में खूब बच्चों के खिलौने भी बिक रहे हैं, जिससे अभिभावक खुद-ब-खुद दुकान की ओर चले जा रहे हैं.
लाखों श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक, मांगी मन्नत : ब्रह्मपुर. सावन की दूसरी सोमवारी पर बाबा बरमेश्वर नाथ मंदिर में हजारों की संख्या में लोगों ने बाबा बरमेश्वरनाथ नाथ पर जलाभिषेक किया.
जिले से सटे यूपी के गाजीपुर और बलिया से काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे. वहीं, आरा-सासाराम आदि जगहों के लोग भी आये. प्रतिदिन के नियमित पूजा के बाद सुबह 3:00 बजे मंदिर का पट खुला, उसके बाद से दर्शनार्थियों की भीड़ मंदिर में पहुंचने लगी.
जैसे-जैसे सुबह होती गयी भीड़ बढ़ती गयी. सुबह में छह बजे तक बक्सर से गंगा जल भरकर पैदल आनेवाले कांवरियों की भीड़ रही. हालांकि कांवरियों के लिये अलग से कोई व्यवस्था नहीं थी. मंदिर पूजा समिति के अध्यक्ष शिव गोपाल पांडेय, आचार्य अक्षय गोपाल पांडेय एवं डमरू बाबा ने बताया कि इस साल सावन में पांच सोमवार पड़ रहे हैं, जो धार्मिक और पौराणिक दृष्टि से काफी फलदायी हैं.
नहीं है सार्वजनिक शौचालय : शौचालय नहीं होने से बाहरी यात्रियों को काफी परेशानी हुई. इतने बड़े तीर्थस्थल पर सार्वजनिक शौचालय का ना होना सभी भक्तों को खटक रही थी. खास कर महिलाएं मजबूरी में शर्म व लाज को त्याग कर किसी तरह नजरें बचाते हुईं खुले में शौच कीं.
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