स्कूल के बरामदे व फर्श पर भविष्य गढ़ रहे नौनिहाल

Updated at : 04 Jul 2017 6:17 AM (IST)
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स्कूल के बरामदे व फर्श पर भविष्य गढ़ रहे नौनिहाल

चार कमरों में चल रही आठ कक्षाओं की पढ़ाई हाल आदर्श शिशु मध्य विद्यालय का, 500 बच्चे हैं नामांकित बक्सर : तमाम प्रयासों के बाद भी सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई को ध्यान में रखकर वैसी व्यवस्था नहीं हो पाई है, जैसी उम्मीद की जाती है. गरमी में तपते, सर्दी में ठिठुरते और बारिश […]

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चार कमरों में चल रही आठ कक्षाओं की पढ़ाई

हाल आदर्श शिशु मध्य विद्यालय का, 500 बच्चे हैं नामांकित
बक्सर : तमाम प्रयासों के बाद भी सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई को ध्यान में रखकर वैसी व्यवस्था नहीं हो पाई है, जैसी उम्मीद की जाती है. गरमी में तपते, सर्दी में ठिठुरते और बारिश में चिपचिपाते फर्श पर बैठकर सरकारी स्कूलों में बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं. परिवार निजी स्कूलों की महंगी फीस नहीं दे सकता और सरकारी स्कूलों में सरकार सुविधाएं नहीं दे पा रही. डेस्क के अभाव में जमीन पर बैठते हैं. स्कूलों में कमरों का अभाव भी है. बरामदों और पेड़ों के नीचे खुले आसमान तले पढ़ाई करनी पड़ती है.
मामला शहर के आदर्श शिशु मध्य विद्यालय का है, जहां पढ़ाई के लिए एक कमरे में दो कक्षाएं तो बरामदे में तीन कक्षाएं संचालित की जा रही हैं. करीब छह महीने पहले सीएम ने घोषणा की थी कि प्रदेश के किसी भी स्कूल में कोई बच्चा जमीन पर बैठकर पढ़ाई नहीं करेगा. सभी स्कूलों को ड्यूल डेस्क दिये जायेंगे, जिस पर शिक्षा विभाग ने काम शुरू किया और सभी जिले से रिपोर्ट भी भेजी गयी. कई स्कूलों में बेंच डेस्क की उपलब्धता हो गयी, लेकिन अब भी कई विद्यालय हैं, जहां बच्चे जमीन पर बैठकर भविष्य गढ़ रहे हैं.
फर्श पर पढ़ाई ऊपर से गरमी : शहर के बाइपास रोड में कोइरपुरवा के पास स्थित आदर्श शिशु मध्य विद्यालय में आठ कक्षाओं के विद्यार्थियों के बैठने के लिए चार कमरे व एक बरामदा है. इन्हीं चार में एक बालिका सामान्य कक्ष भी है. 500 बच्चे पढ़ते हैं और एक कमरे में दो, बरामदे में खुले आसमान के नीचे कक्षाएं लगती हैं. स्कूल के अंदर बच्चे घर से अपनी टाट-पट्टी लेकर आते हैं और उसे वापस बैग में डालकर ले जाते हैं.
स्कूल में बिजली नहीं, फिर भी आया बिल : अगर कहा जाये कि आदर्श मध्य विद्यालय सिर्फ नाम का आदर्श है, तो यह गलत नहीं होगा. क्योंकि कमरों में पंखा नहीं है लेकिन, बिजली का बिल 9600 रुपये आया है. यहां न तो बच्चों के लिए पढ़ाई की बेहतर व्यवस्था है न खेल मैदान की. चापाकल से गंदा पानी आता है. बरसात में क्लासरूम में पानी भर जाता है. पीछे तालाब की गंदगी से बू आती है. सीड़न से दीवारें खराब हो गयी हैं.
तीन माह पूर्व फोटोग्राफी कराकर भूल गया विभाग : विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं की घोर कमी है. विद्यालय का मुख्य द्वार शहर के सबसे व्यस्ततम सड़क बाइपास रोड पर स्थित है, जहां आये दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं. विभाग से कई बार शिकायतें की गयीं, लेकिन इसमें सुधार नहीं हो रहा है. तीन माह पूर्व सर्व शिक्षा अभियान की ओर से विद्यालय के खराब हो रहे भवन की फोटोग्राफी करायी गयी. उस वक्त आस जगी कि अब सुधार होगा, लेकिन विभाग भी समस्याएं भूल गया.
दी गयी है विभाग को सूचना
विद्यालय में कई तरह की समस्याएं हैं. छात्रों की उपस्थिति ज्यादा होने व कमरों की संख्या कम होने के कारण बरामदे में पढ़ाई हो रही है. बरसात में ज्यादा समस्या होती है. विभाग को इसकी सूचना दी गयी है.
ऋतुरंजन प्रसाद सिन्हा, प्राचार्य, आदर्श शिशु मध्य विद्यालय
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