मगध इलाके में बढ़ रहा है काले गेहूं का रकबा, परंपरागत फसल के मुकाबले अधिक मुनाफा कमा रहे किसान
Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 24 Mar 2021 8:23 AM
काला चावल की खेती के बारे में तो हम सब जानते हैं, लेकिन अब काला गेहूं की भी खेती पटना जिले में धीरे-धीरे जोर पकड़ने लगी है. नौबतपुर प्रखंड के सोना गांव के युवा किसान रवि रंजन कुमार दस कट्ठा में पहली बार काला गेहूं की खेती की है.
सुमित आर्यन, नौबतपुर. काला चावल की खेती के बारे में तो हम सब जानते हैं, लेकिन अब काला गेहूं की भी खेती पटना जिले में धीरे-धीरे जोर पकड़ने लगी है. नौबतपुर प्रखंड के सोना गांव के युवा किसान रवि रंजन कुमार दस कट्ठा में पहली बार काला गेहूं की खेती की है.
पहले काले गेहूं का नाम पटना में गिने-चुने किसान ही जानते थे, लेकिन इसकी गुणवत्ता और मुनाफे को जानकर राजधानी पटना से लगभग 30 किलोमीटर दूर नौबतपुर में काले गेहूं की खेती शुरू की गयी है. काले गेहूं का उत्पादन सामान्य गेहूं की तरह ही होता है. इस गेहूं का न सिर्फ उत्पादन अधिक होता है, बल्कि 15 से 16 हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक्री होती है.
काला गेहूं सेहत के लिहाज में सामान्य गेहूं से ज्यादा अच्छा होता है. इतना ही नहीं यह किसानों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो रहा है. बाजार में 15 से 16 हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से इसकी बिक्री होती है, जो सामान्य गेहूं से बहुत ज्यादा है. यदि किसान इस गेहूं की खेती बड़े पैमाने पर करें तो बेशक वह सामान्य गेहूं की तुलना में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं. काला गेहूं खाने में स्वादिष्ट होने के साथ ही यह कई गंभीर बीमारियों में लाभदायक भी होता है. काला गेहूं डायबिटीज के मरीजों के लिए काफी लाभदायक होता है.
किसान रवि रंजन का कहना है कि वह काले गेहूं को मसौढ़ी के कोरियामा गांव से दस किलो बीज दो हजार में लेकर आये थे. गेहूं की बुवाई आठ से दस किलो प्रति बीघा होती है. गेहूं की पैदावार 15 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है. इसमें वर्मी कंपोस्ट और डब्ल्यूडीसी खाद का उपयोग किया गया है.
गेहूं के इस प्रभेद को नेशनल एग्री फूड बॉयोटेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट मोहाली, पंजाब ने विकसित किया है. रवि रंजन युवा किसान हैं वह 12वीं पास करने के बाद गांव में ही खेती शुरू की काले गेहूं से पहले काला चावल की भी खेती कर चुके हैं. बीच-बीच में कृषि विज्ञान केंद्र बाढ़ के वरीय वैज्ञानिक डॉ शारदा कुमारी और वैज्ञानिक डॉ विरणाल वर्मा भी गांव पहुंच कर खेती के बारे में नयी तकनीक के बारे बताते हैं.
किसान रवि रंजन ने गेहूं के बारे में बताया कि खाना खाने के बाद जब हमारे शरीर में ऑक्सीजन किसी अन्य पदार्थ के साथ मिलकर फ्री रेडिकल्स बनाते हैं, इससे त्वचा को नुकसान होता है, त्वचा सिकुड़ने लगती है और लोग जल्दी बुजुर्ग हो जाते हैं. कई बार लोग कैंसर जैसी बीमारी के शिकार हो जाते हैं. अगर यह गेहूं इस्तेमाल करते हैं तो इन बीमारियों से बच सकेंगे.
काला गेहूं में सामान्य गेहूं के अनुसार एनथोसाइनिन की मात्रा अधिक होती है. सामान्य गेहूं में पिगमेंट की मात्रा पांच से 15 पीपीएम होती है, जबकि काले गेहूं में पिगमेंट मात्रा 40 से 140 पीपीएम होती है. एनथोसाइनिन एंटीऑनक्सीडेंट का काम करती है. इसमें जिंक की मात्रा भी अधिक होती है.
Posted by Ashish Jha
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