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विधानसभा चुनाव में भी गर्मजल के कुंडों को बचाने और भेलवडोभ जालशय की उड़ाही का मुद्दा गायब

Updated at : 04 Nov 2025 10:16 PM (IST)
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विधानसभा चुनाव में भी गर्मजल के कुंडों को बचाने और भेलवडोभ जालशय की उड़ाही का मुद्दा गायब

मगध साम्राज्य की राजधानी रही राजगीर विश्व के मानचित्र पर शासन, संस्कृति, पराक्रम, अध्यात्म, ज्ञान और प्राकृतिक सौंदर्य का केंद्र रहा है.

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राजगीर. मगध साम्राज्य की राजधानी रही राजगीर विश्व के मानचित्र पर शासन, संस्कृति, पराक्रम, अध्यात्म, ज्ञान और प्राकृतिक सौंदर्य का केंद्र रहा है. वर्तमान में यह चुनाव के दौरान भी हाशिये पर है. इस चुनाव के दौरान भी कोई प्रत्याशी संस्कृति और धरोहर बचाने की बात नहीं करते देखे जा रहे हैं. विधानसभा चुनाव का शोर मंगलवार को थम गया है. चुनाव में जाति, पार्टी, नौकरी, आरक्षण, सुरक्षा, मानदेय, जीविका आदि को लेकर खूब बहस हुई है. लेकिन कोई दल या प्रत्याशी इस बात पर नहीं बोला है कि राजगीर के पौराणिक धरोहर गर्मजल के कुंड और भेलवडोभ जलाशय के अस्तित्व खतरे में हैं. गर्मजल के कुंड उपेक्षा के शिकार : यहां प्रागैतिहासिक कालीन गर्मजल के कुंड और झरने हैं. राजगीर आदि अनादि काल से 22 कुंड और 52 धाराओं के लिए विश्व प्रसिद्ध है. इनमें से करीब आधे कुंडों के अस्तित्व पर खतरे के बादल मड़रा रहे हैं. एक के बाद एक कुंड जमींदोज हो रहे हैं. वहीं कुछ सूख भी रहे हैं. बावजूद किसी राजनीतिक दल और प्रत्याशी द्वारा इसकी चर्चा तक नहीं की जा रही है। इसका सीधा संबंध भेलवडोभ जलाशय से बताया जाता है। जिस जलाशय में कभी हाथी डूबने भर जलसंग्रह होता था। वह उपेक्षा के कारण उथला और सूखा है. पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा मनरेगा से इसकी उड़ाही किया गया है, जो नाकाफी है। फलस्वरुप ब्रह्मकुंड क्षेत्र के कुंडों और झरनों का अस्तित्व खतरे में है. यही हाल रहा तो 2026 में लगने वाले राजकीय मलमास मेला में सांस्कृतिक संकट पैदा हो सकता है. इसकी चिंता न तो जनप्रतिनिधियों को है और न हीं पर्यटन और संस्कृति विभाग को है. एक के बाद एक हो रहे जमींदोज : राजगीर में 22 कुंड और 52 धाराएं धरातल पर कहीं नहीं दिखतीं हैं. यहां के कुंड एक के बाद एक जमींदोज हो रहे हैं. उपेक्षा के कारण उसकी खोज खबर भी कोई नहीं लेता है. अग्निधारा कुंड, गोदावरी कुंड, दुखहरणी कुंड, शालिग्राम कुंड आदि कहीं नहीं दिखते हैं. सरस्वती नदी और सरस्वती कुंड नरक कुंड बन गया है. धरोहरों की सुरक्षा जरुरी : अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ धीरेंद्र उपाध्याय और राष्ट्रीय प्रचार मंत्री सुधीर कुमार उपाध्याय कहते हैं कि राजगीर गर्मजल के कुंडों के लिए आदि अनादि काल से प्रसिद्ध है. यह ऐतिहासिक नगरी है. लेकिन प्रत्याशियों के एजेंडे में यह नहीं रहता है. यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में सांस्कृतिक संकट से उबरना मुश्किल हो सकता है. इतिहास और अतिक्रमण राजनीति विमर्श से हुआ गायब : इतिहासकार डाॅ लक्ष्मी नारायण सिंह कहते हैं कि चुनाव के समय कोई उम्मीदवार यह नहीं बताता है कि अगर वह जीतेंगे तो यहां के पुरातात्विक धरोहरों की सुरक्षा, मलमास मेला सैरात भूमि और पारंपरिक जल स्रोतों पर से अतिक्रमण हटायेंगे. इससे स्पष्ट होता है कि संस्कृति, इतिहास और अतिक्रमण राजनीतिक विमर्श से गायब हो चुका है. युवा मतदाता भी इस उपेक्षा से नाराज हैं. छात्र कुणाल कुमार कहते हैं कि युवाओं को सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों की सुरक्षा भी चाहिए. इससे हजारों युवाओं को रोजगार मिल सकता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AMLESH PRASAD

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By AMLESH PRASAD

AMLESH PRASAD is a contributor at Prabhat Khabar.

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