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वित्त रहित शिक्षा कर्मियों ने वितरहित शिक्षा नीति का किया विरोध

Updated at : 27 Mar 2025 9:12 PM (IST)
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वित्त रहित शिक्षा कर्मियों ने वितरहित शिक्षा नीति का किया विरोध

जिले के विभिन्न वितरहित कॉलेजों के शिक्षा कर्मियों के द्वारा गुरुवार को अपनी विभिन्न मांगो को लेकर वितरहित शिक्षा नीति के विरोध में पुतला दहन किया गया. इस अवसर पर वित्त रहित शिक्षा कर्मियों ने कहा कि सरकार के द्वारा वितरहित शिक्षा कर्मियों का शोषण किया जा रहा है.

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बिहारशरीफ. जिले के विभिन्न वितरहित कॉलेजों के शिक्षा कर्मियों के द्वारा गुरुवार को अपनी विभिन्न मांगो को लेकर वितरहित शिक्षा नीति के विरोध में पुतला दहन किया गया. इस अवसर पर वित्त रहित शिक्षा कर्मियों ने कहा कि सरकार के द्वारा वितरहित शिक्षा कर्मियों का शोषण किया जा रहा है. सरकार के द्वारा छात्रों के रिजल्ट आधारित अनुदान भी समय पर नहीं देकर सरकार वित्त रहित शिक्षा कर्मियों के साथ घोर अन्याय कर रही है. कार्यक्रम का आयोजन बिहार राज्य वित्त रहित संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले किया गया. कार्यक्रम को लेकर आरपीएस कॉलेज के प्राचार्य सह मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ उपेंद्र कुमार सिन्हा ने कहा कि बिहार में वित्त रहित शिक्षा नीति एक कलंक है. हमलोग पिछले 36 वर्षों से वित्त रहित शिक्षा नीति का दंश झेल रहे हैं. समय-समय पर मोर्चा के तरफ से आंदोलन करते रहे हैं, लेकिन सरकार इस दिशा में पूरी तरह उदासीन है. सरकार हर प्रखंड में डिग्री महाविद्यालय खोलने की घोषणा करती है, जबकि पहले से खुले वितरहित डिग्री कॉलेजों को बंद कराने की साजिश कर रही है. सभी वित्त रहित कॉलेजों के पास पर्याप्त साधन तथा इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद हैं. सरकार इन्हें अधिग्रहण कर यहां कार्यरत शिक्षकों तथा कर्मियों को भी लाभान्वित कर सकती है. जिस तरह सरकार संस्कृत विद्यालय या मदरसा माइनॉरिटी के संस्थानों को सरकारी करण किया उसी तरह सरकारीकरण अथवा घटा अनुदानित कर दे. उन्होंने सरकार से विगत 7 वर्षों का बकाया अनुदान की राशि जल्दी तथा एक मुश्त देने की मांग की. उन्होंने कहा कि जब तक वित्त रहित शिक्षा नीति समाप्त नहीं हो जाती मोर्चा का संघर्ष जारी रहेगा. मोर्चा के मुख्य मांगों में अनुदान के बदले वेतनमान देने, 7 वर्षों का बकाया अनुदान का एक मुश्त भुगतान करने, कार्यरत सभी शिक्षा कर्मियों की सेवा स्थाई करने, सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने, सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन आदि देने, माध्यमिक विद्यालयों का कोड / संबंधन रद्द करने का आदेश वापस लेने आदि मुख्य है. इस अवसर पर नालंदा जिला मोर्चा के अध्यक्ष डॉ संगीता कुमारी, डॉ अनुज कुमार सिन्हा, सचिव प्रो विजय कुमार पांडेय आदि ने बताया कि वर्षों से वित्त रहित शिक्षा नीति का दंश झेल रहे हैं. सरकार के द्वारा वेतन या अन्य सुविधा नहीं दिए जाने के कारण कई साथी इस दुनिया से चले गए. बहुत सारे साथी रिटायर हो चुके हैं. इस अवसर पर प्रो अरुण कुमार, शंभू कुमार, प्रो अनिल धवन, प्रो धनंजय कुमार, प्रो रेणु कुमारी, रवि कुमार, जनक कुमारी, प्रमोद कुमार, धर्मेंद्र कुमार, शंभू पासवान, पंकज कुमार, मणि शंकर पांडेय, कुंदन कुमार सहित दर्जनों की संख्या में वित्त रहित शिक्षाकर्मी मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SANTOSH KUMAR SINGH

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