राजगीर के सूखते गर्मजल कुंडों पर बढ़ी चिंता, धरोहर बचाने के लिए रविवार को होगी महापंचायत

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राजगीर का सूख चुका गंगा यमुना कुंड

राजगीर का सूख चुका गंगा यमुना कुंड

Rajgir Hot Springs : राजगीर के बहुमूल्य गर्मजल कुंडों और झरनों के संरक्षण को लेकर रविवार को 'धरोहर बचाओ महापंचायत' का आयोजन किया जा रहा है। स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बचाने की मांग की जाएगी।

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Rajgir Hot Springs : राजगीर की ऐतिहासिक पहचान माने जाने वाले गर्मजल कुंडों और प्राकृतिक झरनों के संरक्षण को लेकर रविवार को 'धरोहर बचाओ महापंचायत' आयोजित की जाएगी. आयोजकों का कहना है कि महापंचायत के माध्यम से सरकार से जलस्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए ठोस पहल की मांग की जाएगी.

गर्मजल कुंडों के संरक्षण के लिए होगा महाजुटान

राजगीर में रविवार को आयोजित होने वाली 'धरोहर बचाओ महापंचायत' में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई गई है. आयोजकों के अनुसार, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों के लोगों को इसमें आमंत्रित किया गया है. महापंचायत का उद्देश्य सूखते गर्मजल कुंडों और प्राकृतिक झरनों के संरक्षण के लिए जनसमर्थन जुटाना तथा सरकार और प्रशासन का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करना है.

कई ऐतिहासिक कुंड पहले ही सूख चुके

जनसुराज पार्टी के व्यावसायिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कुमार विभूति और प्रो. सुधीर कुमार मालाकार ने बताया कि ब्रह्मकुंड क्षेत्र में वर्षों से प्राकृतिक जलस्रोतों के सूखने का सिलसिला जारी है. उनके अनुसार गंगा-जमुना कुंड, अनंत ऋषि कुंड, व्यास कुंड, मारकंडेय कुंड, गोदावरी कुंड और दुखहरणी कुंड पूरी तरह सूख चुके हैं. हाल ही में आयोजित मलमास मेले के दौरान भी इन कुंडों में पानी नहीं होने से श्रद्धालुओं को निराशा का सामना करना पड़ा.

सप्तधारा कुंड की धाराओं पर भी संकट

स्थानीय लोगों रमेश कुमार पान और अनीता कुमारी गुप्ता ने बताया कि राजगीर के प्रसिद्ध सप्तधारा (सप्तऋषि) कुंड की सात प्राकृतिक धाराओं में से दो धाराएं पहले ही समाप्त हो चुकी हैं. उनका कहना है कि वर्तमान में शेष बची पांच धाराओं में से भी दो सूख गई हैं, जबकि बाकी तीन धाराओं का जलप्रवाह लगातार कम होता जा रहा है. ऐसे में ब्रह्मकुंड क्षेत्र में अब केवल ब्रह्मकुंड अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थिति में बचा है.

स्थानीय अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा है मुद्दा

वार्ड पार्षद डॉ. अनिल कुमार, वार्ड पार्षद महेन्द्र यादव, पूर्व प्रमुख सुधीर कुमार पटेल और अन्य स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्मजल कुंड केवल धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर ही नहीं हैं, बल्कि पर्यटन और स्थानीय रोजगार का भी प्रमुख आधार हैं. होटल व्यवसाय, ई-रिक्शा चालक, टमटम संचालक, फुटपाथ दुकानदार और छोटे कारोबारी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन जलस्रोतों पर निर्भर हैं.

सरकार से वैज्ञानिक अध्ययन और संरक्षण योजना की मांग

आयोजकों के अनुसार महापंचायत के माध्यम से सरकार से गर्मजल कुंडों और प्राकृतिक जलस्रोतों का वैज्ञानिक अध्ययन कराने, विस्तृत जांच करवाने, संरक्षण योजना तैयार करने और इनके पुनर्जीवन के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की जाएगी. इस मुद्दे पर लोगों को जोड़ने के लिए सोशल मीडिया और हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जा रहा है.

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