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हिलसा में कचरे से बनाई जा रही है जैविक खाद

Updated at : 05 Jun 2025 9:09 PM (IST)
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हिलसा में कचरे से बनाई जा रही है जैविक खाद

हिलसा नगर परिषद द्वारा नागरिकों के व्यवहार में बदलाव लाने और साफ सफाई को जन आंदोलन बनाने हेतु जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है.

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हिलसा. हिलसा नगर परिषद द्वारा नागरिकों के व्यवहार में बदलाव लाने और साफ सफाई को जन आंदोलन बनाने हेतु जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. नगर कार्यपालक पदाधिकारी रविशंकर प्रसाद ने कहा कि स्वच्छता का यह काम जन सहभागिता के बिना संभव नहीं है.उन्होंने सभी से अपील करते हुए कहा कि स्वच्छता को अपनी आदत बनाएं.वही मुख्य पार्षद धनंजय कुमार ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में नागरिकों के व्यवहार में उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ है. पहले लोग खुले में कचरा फेंकने में संकोच नहीं करते थे.लेकिन अब वह जागरूक हो रहे हैं, उन्होंने कहा कि नगर परिषद लगातार सफाई व्यवस्था को मजबूत कर रही है. हम चाहते हैं कि हिलसा आने वाले समय में स्वच्छ शहर की मिसाल बने।ताकी हिलसा नगर परिषद को और भी साफ सफाई रखा जा सके.नगर परिषद के स्वच्छता पदाधिकारी उज्जवल आनंद के द्वारा लोगों को आश्वासन दिया गया कि स्वच्छता को लेकर ऐसे अभियान आगे भी नियमित रूप से चलाए जाते रहेंगे. पर्यावरण दिवस के मौके पर स्वच्छता पदाधिकारी उज्जवल आनंद ने बताया कि हिलसा नगर परिषद ने एक अनूठी पहल करके न केवल कचरा प्रबंधन की समस्या का समाधान खोजा बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी मिसाल काम किया है, यह नगर परिषद क्षेत्र के लालसे बिगहा में है. हिलसा नगर परिषद के द्वारा विभिन्न वार्ड से ई रिक्शा के माध्यम से गिला और सुखा कचरा अलग-अलग एकत्र किया जाता है,जमा हुए कचरे से जैविक खाद बनाई जा रही है. इसकी डिमांड ग्रामीण इलाकों में ज्यादा है, एमआरएफ पर कार्यरत समर्पित सफाई कर्मी इस कचरे से कागज और प्लास्टिक को अलग करके पूर्ण रूप से सेग्रीगेशन का काम करते हैं. कचरे के वैज्ञानिक प्रसंस्करण के लिए यहां एक विशेष विधि अपनाई जाती है, सबसे पहले खाली गढ़ों में गोबर की एक परत बिछाई जाती है, फिर गीले कचरे को लेयर बाय लेयर डाला जाता है. इसके बाद गोबर की परत डाली जाती है, इस प्रक्रिया में गाय के गोबर से तैयार बेस्ट डीकंपोजर का उपयोग किया जाता है, जो कचरे के विघटक तक को तेज करता है. वर्तमान समय में जैविक खाद मात्र ₹6 प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है. खेतों में फसलों की अच्छी उपज करने के लिए किसान यूरिया जैसे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर रहते हैं, जिसे हानिकारक प्रभाव फसलों के माध्यम से मनुष्य के शरीर पर पड़ता है. यह जैविक खाद का उपयोग खेतों के अलावे गमले में पौधे लगाने के लिए भी कर सकते हैं. इस पहल से मट्टी, पानी और हवा के प्रदूषण को कम करने में योगदान होगा,

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SANTOSH KUMAR SINGH

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By SANTOSH KUMAR SINGH

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