सोशल मीडिया बना पति-पत्नी विवाद का मुख्य कारण, नालंदा में दर्ज हो रहे सैकड़ों केस

व्यवहार न्यायालय बिहारशरीफ़
Nalanda News : फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसी सोशल मीडिया साइटें जहां लोगों को जोड़ने का काम कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर कई परिवारों में रिश्तों की दरार की वजह भी बनती जा रही हैं. नालंदा जिले में बढ़ते दांपत्य विवादों के पीछे सोशल मीडिया एक बड़ा कारण बनकर उभरा है. छोटी-छोटी गलतफहमियां अब महिला थाना, महिला हेल्पलाइन और फैमिली कोर्ट तक पहुंच रही हैं.
Nalanda News : (कंचन कुमार) फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसी सोशल मीडिया साइटें जहां लोगों को जोड़ने का काम कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर कई परिवारों में रिश्तों की दरार की वजह भी बनती जा रही हैं. नालंदा जिले में बढ़ते दांपत्य विवादों के पीछे सोशल मीडिया एक बड़ा कारण बनकर उभरा है. छोटी-छोटी गलतफहमियां अब महिला थाना, महिला हेल्पलाइन और फैमिली कोर्ट तक पहुंच रही हैं.
हर महीने 250 से ज्यादा पति-पत्नी विवाद पहुंच रहे थाने और कोर्ट
फैमिली कोर्ट, महिला थाना और महिला हेल्पलाइन के आंकड़े बताते हैं कि जिले में हर माह 251 से 322 दांपत्य विवाद दर्ज हो रहे हैं. यानी औसतन प्रतिदिन दो से तीन नए मामले सामने आ रहे हैं. पिछले पांच वर्षों में ऐसे मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे परामर्श केंद्रों पर भी दबाव बढ़ा है.
सबसे ज्यादा विवाद शिक्षित और नौकरीपेशा दंपतियों में
आंकड़ों के अनुसार 80 प्रतिशत से अधिक मामले शिक्षित और नौकरीपेशा दंपतियों से जुड़े हैं. आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद कई परिवारों में विवाह के पांच से दस वर्ष के भीतर रिश्ते संकट में पहुंच रहे हैं. विशेषज्ञ बदलती जीवनशैली और बढ़ती व्यक्तिगत अपेक्षाओं को इसकी बड़ी वजह मानते हैं.
लाइक, कमेंट और चैट से बढ़ रहा अविश्वास
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर लाइक, कमेंट, फ्रेंड रिक्वेस्ट और निजी चैट को लेकर पति-पत्नी के बीच संदेह बढ़ रहा है. कई मामलों में मोबाइल की जांच, कॉल डिटेल देखने और निजी संदेश पढ़ने की आदत रिश्तों में तनाव पैदा कर रही है. संवाद की कमी होने पर यही तनाव बड़े विवाद में बदल जाता है.
संयुक्त परिवार से दूरी भी बन रही विवाद की वजह
दांपत्य विवादों में एक बड़ा कारण संयुक्त परिवार से अलग रहने की इच्छा भी सामने आ रही है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 62 प्रतिशत मामलों में पति-पत्नी के बीच अलग रहने को लेकर विवाद होता है. परिवार और रिश्तों को लेकर बदलती सोच का प्रभाव वैवाहिक जीवन पर साफ दिखाई दे रहा है.
दहेज के आरोपों से बढ़ रही कानूनी जटिलताएं
दांपत्य विवादों के लगभग 82 प्रतिशत मामलों में दहेज उत्पीड़न के आरोप लगाए जाते हैं. जांच में कुछ आरोप सही साबित होते हैं, जबकि कई मामलों में उनकी पुष्टि नहीं हो पाती. इससे कानूनी प्रक्रिया लंबी हो जाती है और दोनों पक्षों के बीच दूरियां और बढ़ जाती हैं.
बढ़ती अपेक्षाएं भी रिश्तों पर डाल रही दबाव
विशेषज्ञों का कहना है कि आज अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से मजबूत और नौकरीपेशा वर को प्राथमिकता देते हैं. लेकिन शादी के बाद जब जीवनशैली, सोच और व्यवहार में सामंजस्य नहीं बन पाता, तो रिश्तों में तनाव पैदा होने लगता है. कई बार अवास्तविक अपेक्षाएं भी वैवाहिक जीवन को प्रभावित करती हैं.
टूटते रिश्तों की सबसे बड़ी कीमत चुका रहे बच्चे
दांपत्य कलह का सबसे अधिक असर बच्चों पर पड़ रहा है. तनावपूर्ण माहौल उनके मानसिक, सामाजिक और शैक्षणिक विकास को प्रभावित करता है. कई बच्चों को माता-पिता के अलगाव और बिखरते परिवार का दर्द झेलना पड़ता है.
केस-1: सोशल मीडिया की दुनिया ने बढ़ाई दूरियां
बिहारशरीफ के एक दंपती के बीच शादी के कुछ माह बाद ही मतभेद शुरू हो गए. परिजनों के अनुसार पत्नी सोशल मीडिया पर अत्यधिक सक्रिय थी और निजी जीवन को ऑनलाइन साझा करना पसंद करती थी. बढ़ती अपेक्षाओं और वास्तविक परिस्थितियों के बीच टकराव ने रिश्ते को तलाक की कगार तक पहुंचा दिया.
केस-2: मायके की सलाह और सोशल मीडिया ने बढ़ाया तनाव
वेना थाना क्षेत्र के एक व्यवसायी की पत्नी हर छोटी-बड़ी बात मायके पक्ष से साझा करती थी. लगातार बाहरी हस्तक्षेप और सोशल मीडिया पर बढ़ती व्यस्तता के कारण पति-पत्नी के बीच मतभेद बढ़ते गए. हालांकि समय रहते परिवार के हस्तक्षेप से रिश्ता बच गया.
विशेषज्ञों की सलाह: डिजिटल अनुशासन और संवाद है जरूरी
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि सोशल मीडिया का संतुलित उपयोग समय की मांग है. निजी जीवन को अत्यधिक सार्वजनिक करने से अनावश्यक तनाव पैदा हो सकता है. समय पर संवाद, आपसी समझ, पारिवारिक सहयोग और काउंसलिंग के माध्यम से कई टूटते रिश्तों को बचाया जा सकता है.
सिर्फ कानूनी नहीं, सामाजिक चुनौती भी बन रहे दांपत्य विवाद
विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ते वैवाहिक विवाद समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं. डिजिटल दुनिया का प्रभाव अब सीधे पारिवारिक जीवन पर दिखाई देने लगा है. ऐसे में रिश्तों को मजबूत बनाए रखने के लिए विश्वास, संवाद और भावनात्मक संतुलन पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है.
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By विवेक सिंह
विवेक सिंह की डिजिटल मीडिया और जनसरोकारों से जुड़े विषयों में विशेष रुचि रही है. वे बिहार के मिथिला क्षेत्र के निवासी हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 2 वर्षों से सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं.
उन्होंने मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की पढ़ाई की है. शिक्षा के दौरान उन्होंने रिपोर्टिंग, समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, जनसंचार, फोटो जर्नलिज्म, मोबाइल जर्नलिज्म (MOJO) और मीडिया रिसर्च की गहन समझ विकसित की है. अध्ययन के दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की, जहां उन्हें न्यूजरूम की कार्यप्रणाली, टीवी समाचार निर्माण, स्क्रिप्ट लेखन, विजुअल चयन, फील्ड रिपोर्टिग और प्रसारण प्रक्रिया को नजदीक से समझने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ.
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