रोहिणी नक्षत्र के साथ नालंदा में खरीफ खेती की शुरुआत, लेकिन किसानों को सता रहा बाढ़ और सूखे का डर
Published by : Vivek Singh Updated At : 29 May 2026 9:04 AM
मौसम का मिजाज
Nalanda News : रोहिणी नक्षत्र शुरू होते ही नालंदा जिले में खरीफ फसल की तैयारी तेज हो गई है, लेकिन मौसम का लगातार बदलता मिजाज किसानों के लिए चिंता का कारण बन गया है. कभी तेज धूप, कभी ठंडी हवाएं और बादलों की आवाजाही ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है.
Nalanda News : (कंचन कुमार) रोहिणी नक्षत्र शुरू होते ही नालंदा जिले में खरीफ फसल की तैयारी तेज हो गई है, लेकिन मौसम का लगातार बदलता मिजाज किसानों के लिए चिंता का कारण बन गया है. कभी तेज धूप, कभी ठंडी हवाएं और बादलों की आवाजाही ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है. खेती की तैयारी के बीच किसान मानसून को लेकर संशय में हैं.
नालंदा में हर साल बाढ़ और सूखे की दोहरी मार
नालंदा कृषि प्रधान जिला माना जाता है, लेकिन इसकी भौगोलिक स्थिति किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. जिले के हिलसा और उत्तरी-पश्चिमी इलाके हर साल बाढ़ की चपेट में आते हैं, जबकि राजगीर और दक्षिणी क्षेत्र सूखे की मार झेलते हैं. मौसम आधारित खेती होने के कारण किसानों को हर वर्ष भारी नुकसान उठाना पड़ता है.
1987 की महाबाढ़ आज भी लोगों के जेहन में जिंदा
वर्ष 1987 की भीषण बाढ़ ने नालंदा समेत पूरे बिहार में भारी तबाही मचाई थी. हिलसा, बिंद और थरथरी क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुए थे. हजारों लोग बेघर हो गए थे और फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई थीं. बिहार में 1,399 लोगों की मौत हुई थी, जबकि राहत कार्य के लिए सेना तक को उतरना पड़ा था.
1995-97 और 2002 के सूखे ने किसानों को तोड़ दिया
कमजोर मानसून के कारण वर्ष 1995-97 और 2002 में राजगीर, सिलाव और गिरियक इलाके भीषण सूखे की चपेट में आ गए थे. भूजल स्तर गिरने से धान और दलहन की 60 से 70 प्रतिशत फसल बर्बाद हो गई थी. कई इलाकों में लोगों को पानी और अनाज के लिए संघर्ष करना पड़ा था.
2007 की बाढ़ को संयुक्त राष्ट्र ने बताया था सबसे भयावह
साल 2007 में हिलसा, एकंगरसराय और करायपरसुराय में तटबंध टूटने के बाद आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी. संयुक्त राष्ट्र ने इसे जीवित स्मृति की सबसे भयावह आपदाओं में से एक बताया था. सेना, एनडीआरएफ और हेलीकॉप्टरों की मदद से राहत और बचाव कार्य चलाया गया था.
लोकाइन और पंचाने नदी बनीं आफत
वर्ष 2016 और 2019 में लोकाइन और पंचाने नदी के उफान से हिलसा और एकंगरसराय के कई गांव टापू में तब्दील हो गए थे. हजारों हेक्टेयर फसल पानी में डूब गई थी और सड़क संपर्क टूट गया था. इसके बाद एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों को राहत कार्य में लगाया गया था.
जलवायु परिवर्तन से खेती पर गहराया संकट
वर्ष 2022-23 में अनिश्चित मानसून के कारण राजगीर, इस्लामपुर और चंडी क्षेत्र में सूखे जैसी स्थिति बन गई थी. बारिश नहीं होने से धान की बुआई प्रभावित हुई और पेयजल संकट गहरा गया. किसानों को राहत देने के लिए सरकार को डीजल सब्सिडी और मनरेगा सहायता शुरू करनी पड़ी.
2024 में तटबंध टूटने से डूबे कई गांव
वर्ष 2024 में उदेरास्थान बैराज से रिकॉर्ड पानी छोड़े जाने के बाद लोकाइन नदी का तटबंध टूट गया था. हिलसा और एकंगरसराय के 12 से अधिक गांव जलमग्न हो गए थे और हजारों हेक्टेयर फसल बर्बाद हो गई थी. मामले में लापरवाही सामने आने पर सात इंजीनियरों को निलंबित किया गया था.
2025 में पंचाने नदी ने बिहारशरीफ में मचाई तबाही
वर्ष 2025 में झारखंड से छोड़े गए भारी पानी के कारण पंचाने नदी उफान पर आ गई थी. बिहारशरीफ शहर के देवीसराय, सर्वोदय नगर और सोहसराय समेत कई मोहल्लों में पानी घुस गया था. प्रशासन को एनडीआरएफ की मदद से राहत शिविर और सामुदायिक रसोई चलानी पड़ी थी.
अब तकनीक के सहारे मजबूत हो रहा आपदा प्रबंधन
पहले बाढ़ राहत केवल नाव और राशन तक सीमित रहती थी, लेकिन अब तकनीक आधारित निगरानी शुरू की गई है. किसानों को डीबीटी और पीजीएमएस के जरिए सीधे मुआवजा दिया जा रहा है. जलस्तर की रियल टाइम मॉनिटरिंग और तटबंधों की लगातार निगरानी से आपदा प्रबंधन को और मजबूत बनाने की कोशिश की जा रही है.
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By Vivek Singh
विवेक सिंह माता सीता की धरती और मिथिला का द्वार कहे जाने वाले समस्तीपुर जिले से आते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. इससे पहले #The_Newsdharma के साथ डिजिटल मीडिया, ग्राउंड रिपोर्टिंग , और न्यूज़ लेखन के क्षेत्र में कार्य करने का अनुभव रहा है. सामाजिक, राजनीतिक, शिक्षा, युवा, महिला सुरक्षा और जनता से जुड़े मुद्दों पर विशेष रुचि रखते हैं. सरल, तथ्यात्मक और प्रभावी लेखन शैली के माध्यम से पाठकों तक महत्वपूर्ण खबरें और मुद्दे पहुंचाने का निरंतर प्रयास करते हैं. NGO अमर शहीद बिपिन सिंह फाउंडेशन के साथ जुड़कर सामाजिक, स्वास्थ्य, पर्यावरण ,रोजगार और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर भी कार्य करने का अनुभव हैं.
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