मलेशियाई बौद्ध धर्मावलंबियों ने पूजा अर्चना

Updated at : 03 Mar 2025 9:33 PM (IST)
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मलेशियाई बौद्ध धर्मावलंबियों ने पूजा अर्चना

39 सदस्यीय बौद्ध धर्मावलंबियों और भिक्षुओं का दलमलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर से बौद्ध धर्म स्थलों की तीर्थयात्रा के क्रम में सारनाथ होते हुए सोमवार को राजगीर पहुंचा.

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प्रतिनिधि,राजगीर.

39 सदस्यीय बौद्ध धर्मावलंबियों और भिक्षुओं का दल

मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर से बौद्ध धर्म स्थलों की तीर्थयात्रा के क्रम में सारनाथ होते हुए सोमवार को राजगीर पहुंचा. उनके द्वारा वेणुवन विहार में बौद्ध रीति रिवाज से पूजा अर्चना किया गया. राजगीर के विभिन्न बौद्ध स्थलों का तीर्थयात्रियों द्वारा भ्रमण भी किया गया. दल का मार्ग दर्शन कर रहे गाईड दीपक कुमार ने बताया कि मलेशियाई बौद्ध दल द्वारा भगवान बुद्ध के प्रवास, तप साधना, प्रवचन तथा आराम वाले प्रमुख स्थलों के तीर्थ यात्रा के दौरान राजगीर पहुंचे हैं. दल का नेतृत्व कर रहे श्री लंकाई बौद्ध धर्मगुरु प्रेमा-रतन ने कहा कि राजगीर के परम पवित्र बौद्ध स्थलों की दिव्यता से और परम शांति के संदेश से दुनिया प्रकाशित हो रहा है. जिसमें समस्त जीव जगत के कुशल मंगल की कामना समाहित है. उन्होंने आगे बताया कि वे श्री लंका मूल के निवासी हैं. और उनका प्रेम रतन का नामांकरण उनके बौद्ध धर्म गुरु ने उन्हें दीक्षांतोपरांत प्रदान किया था. और अभी वे मलेशियाई बौद्ध भिक्षुओं सह धर्मावलंबियों को लेकर बौद्ध तीर्थ स्थल यात्रा पर निकले हैं. उन्होंने आगे बताया कि राजगीर में राजकुमार सिद्धार्थ सह बोधिसत्व के रुप में ज्ञान प्राप्ति के पूर्व तथा ज्ञान प्राप्ति के बाद राजगीर पहुंचे भगवान बुद्ध के अनेक परम पवित्र स्थल हैं. जिनका दर्शन और पूजा अर्चना करना सौभाग्य की बात है. उन्होंने बताया कि उन्होंने बताया कि यह तीर्थयात्रा उन्होंने सारनाथ से शुरू किया. सारनाथ से बोधगया होते हुए राजगीर पहुंचे हैं. फिर नालन्दा स्थित प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेष परिभ्रमण करते हुए वापस बोधगया को लौट जाएंगे. इस क्रम में भगवान बुद्ध के अतिप्रिय तपस्थली गृद्धकूट पर्वत पर ध्यान मग्न हो साधना किया. तो वहां एक अलौकिक अनुभूति का एहसास किया. जहां पूजा अर्चना के बाद फिर वेणुवन विहार पहुंचे. जहां भगवान बुद्ध ने अनेक वर्षावास बिताए थे. इस दौरान सभी ने वेणुवन विहार के पवित्र कलंदक सरोवर का दीदार किया. जिसमें भगवान बुद्ध स्नान तथा उसके तट पर ध्यान मुद्रा में लीन रहा करते थे. वहीं उन्होंने कहा कि इस तीर्थ यात्रा में बौद्ध सह पर्यटन स्थल का दीदार किया. तो पाया कि इन स्थलों के सर्वांगीण विकास में बिहार सरकार की भूमिका की उल्लेखनीय है.

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