हरनौत में बारिश से सुधरा भूजल स्तर, पीएचईडी ने कहा- फिलहाल जल संकट की आशंका कम

Author Sunil kumar|Edited by Yuvraj Ratan
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हरनौत में बारिश से भूजल स्तर सुधराः बिहारशरीफ प्रमंडल के 11 प्रखंडों में 2900 से अधिक हैंडपंपों की मरम्मत

चापाकल से पानी पीती महिला

Bihar Sharif News : इस वर्ष मानसून के दौरान रुक-रुक कर हुई बारिश से नालंदा जिले के हरनौत प्रखंड में भूजल स्तर में सुधार देखा गया है. लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) के अनुसार, इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट की स्थिति नहीं बनी है. पीएचईडी ने नल-जल योजना और चापाकल मरम्मत से लोगों को राहत दी है.

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Bihar Sharif News : आमतौर पर गर्मी के मौसम में भूजल स्तर तेजी से नीचे चला जाता है, लेकिन इस वर्ष मानसून के दौरान रुक-रुक कर हो रही बारिश से नालंदा जिले के हरनौत प्रखंड में भूजल स्तर में सुधार देखने को मिला है. लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) के अनुसार जून और जुलाई में इस बार भूजल स्तर में सामान्य वर्षों की तुलना में कम गिरावट दर्ज की गई है. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट की स्थिति नहीं बनी.

समय-समय पर बारिश से भूजल स्तर रहा संतुलित

पीएचईडी की कनिय अभियंता (जेई) सुप्रिया कुमारी ने बताया कि इस वर्ष समय-समय पर हुई बारिश के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल स्तर तेजी से नीचे नहीं गया. जुलाई माह में लगातार अंतराल पर हुई वर्षा से भूजल स्तर संतुलित बना हुआ है. उन्होंने बताया कि सामान्य स्थिति में ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल स्तर 25 से 30 फीट होना चाहिए, जबकि वर्तमान में यह लगभग 32 फीट है. कुछ स्थानों पर चापाकलों से पानी का प्रवाह जरूर कम हुआ है और कुओं का जलस्तर भी कुछ नीचे गया है.

नल-जल योजना और चापाकल मरम्मत से लोगों को मिली राहत

जेई ने बताया कि नल-जल योजना के नियमित संचालन के कारण लोगों को पानी की समस्या का अधिक सामना नहीं करना पड़ा. इसके अलावा विभाग की ओर से साधारण चापाकलों तथा आईएम-2 और आईएम-3 चापाकलों की समय पर मरम्मत शुरू कर दी गई थी, जिससे पेयजल आपूर्ति सुचारु बनी रही.

11 प्रखंडों में 2900 से अधिक चापाकलों की हुई मरम्मत

सुप्रिया कुमारी ने बताया कि बिहारशरीफ पीएचईडी प्रमंडल के अंतर्गत हरनौत सहित कुल 11 प्रखंड आते हैं. इन क्षेत्रों में पीएचईडी विभाग और जिला परिषद के माध्यम से लगाए गए लगभग 2900 से अधिक चापाकलों, जिनमें आईएम-2 और आईएम-3 चापाकल भी शामिल हैं, की विशेष मरम्मत अभियान के तहत आंशिक रूप से खराब चापाकलों को दुरुस्त किया गया है.

सरकारी चापाकलों की पहचान नहीं होने से लोगों में भ्रम

ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगह सरकारी और निजी चापाकलों की पहचान करना मुश्किल है. अधिकांश सरकारी चापाकलों पर न तो कोई सूचना बोर्ड लगा है और न ही विभाग का लोगो अंकित है. ऐसे में लोगों को यह पता नहीं चल पाता कि संबंधित चापाकल सरकारी है या निजी.

नियमित निगरानी कर रहा है विभाग

कनिय अभियंता ने कहा कि यदि आगे भी समय-समय पर बारिश होती रही तो भूजल स्तर में अधिक गिरावट की संभावना नहीं रहेगी. विभाग प्रतिदिन संवेदकों से संपर्क कर पेयजल व्यवस्था की जानकारी ले रहा है. कहीं भी पानी की समस्या सामने आने पर अभियंता और संवेदक तत्काल समाधान सुनिश्चित करने में जुट जाते हैं.

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