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करायपरशुराय व बिंद प्रखंड में घुसा बाढ़ का पानी

Updated at : 18 Sep 2024 10:27 PM (IST)
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करायपरशुराय व बिंद प्रखंड में घुसा बाढ़ का पानी

नालंदा जिले के करायपरशुराय व बिंद प्रखंड से गुजरने वाली सभी छोटी व बड़ी नदियां उफान पर है, जिससे कई गांवों में जहां बाढ़ का पानी घुस गया है, वहीं धान की फसलें डूब गयी है.

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करायपरशुराय / बिंद. नालंदा जिले के करायपरशुराय व बिंद प्रखंड से गुजरने वाली सभी छोटी व बड़ी नदियां उफान पर है, जिससे कई गांवों में जहां बाढ़ का पानी घुस गया है, वहीं धान की फसलें डूब गयी है. बीते दिनों हुई अत्याधिक बारिश और पड़ोसी राज्य झारखंड के तिलैया डैम से छोड़ा गये पानी की वजह से ज़िले की सभी छोटी बड़ी नदियों का अचानक जलस्तर बढ़ गया है. जिससे हिलसा और करायपरसुराय प्रखंड का कई इलाका प्रभावित है. जिला प्रशासन के द्वारा सामुदायिक किचेन से लेकर निरंतर राहत कार्य चलाया जा रहा है. जिले की लोकाइन नदी का जल स्तर बढ़ने से हिलसा प्रखंड के कई गांवों में बाढ़ का संकट पैदा हो गया है. लोगों को ऊंचे स्थान पर जाने व पदाधिकारी को अलर्ट रहने का सलाह दिया है. बांध कटाव के कारण कोरमा पंचायत के धुरी विगहा, छियासठ और मिर्जापुर पंचायत के जमुआरा गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं. इसके अलावा, करायपरशुराय प्रखंड के मूसाढ़ी के पास फिर से वही स्थान पर लोकाइन नदी खार हो जाने से मकरौता पंचायत के अधिकतर गांव कमरथू, मूसाढ़ी और फतेहपुर गांव भी बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. एनडीआरएफ की सहायता से प्रभावित लोगों को सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है इधर, बिंद प्रखंड के कथराही पंचायत के कथराही गांव पूरी तरह से जलमग्न हो गया. जिराइन नदी में अचानक जलस्तर वृद्धि होने के कारण बिंद प्रखंड के कथराही गांव के मिल्की खंधा में बने पुल के पास बने बांध टूट गया. बांध टूटने से नदी का पानी खंधा में प्रवेश कर गया. जिससे लगभग 720 बीघा में लगे धान के फसल पानी में डूब गया. जिराइन नदी में जलस्तर अचानक वृद्धि होने से मिल्की खंधा में बने बिना शटर के पुल के पास बने बांध टूट गया. जलस्तर अचानक बढ़ने के कारण पुल के निकट मिट्टी सरक गया और पानी खंधा में प्रवेश कर गया. यह पहली बार नहीं है की किसान का धान डूबा है।किसानों ने बताया की करीब 10 वर्षों से यही हाल है. जब भी नदी में जल स्तर बढ़ता है. पानी खंधा में प्रवेश कर जाता है इसी को देखते हुए किसानों ने पहले पुल के पास शटर के जगह मिट्टी का बांध बांधा था. लेकिन जल स्तर में वृद्धि होने से बांध पानी का बहाव सह नहीं सका और बांध टूट गया.

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