बिहार के स्कूलों में बदलेगा पूरा सिस्टम, किताब-ड्रेस पर अब अभिभावकों की चलेगी, जबरन वसूली बंद करने की तैयारी

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 15 May 2026 8:40 PM

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बिहार शिक्षा विभाग

Bihar: बिहार के स्कूलों में नई स्कूल मैनेजमेंट कमिटी बनने जा रही है, जिससे अभिभावकों की भूमिका पहले से ज्यादा मजबूत होगी. अब निजी और सरकारी स्कूल किताब, यूनिफॉर्म और फीस के मामले में मनमानी नहीं कर सकेंगे. शिक्षा विभाग ने पारदर्शिता बढ़ाने और अभिभावकों को राहत देने के लिए सख्त नियम लागू किए हैं.

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Bihar: बिहार के स्कूलों में अब पढ़ाई के साथ-साथ प्रबंधन व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव होने जा रहा है. शिक्षा मंत्रालय की नई गाइडलाइन के बाद राज्य के सभी स्कूलों में नई स्कूल मैनेजमेंट कमिटी का गठन किया जायेगा. इस नई व्यवस्था में अभिभावकों की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होगी. स्कूलों को कई अहम फैसले लेने से पहले अब माता-पिता की राय और अनुमति लेनी होगी. इसका सीधा असर निजी और सरकारी दोनों तरह के स्कूलों पर पड़ेगा. शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि कोई भी स्कूल अभिभावकों को किसी खास दुकान, विक्रेता या ब्रांड से किताब, कॉपी, पठन-पाठन सामग्री या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकेगा.

अभिभावक पर दबाव नहीं डाल पाएंगे

अभिभावक अपनी सुविधा और बजट के हिसाब से कहीं से भी किताबें, ड्रेस और जरूरी सामान खरीद सकेंगे. स्कूलों को केवल यूनिफॉर्म का पैटर्न और जरूरी जानकारी अपने सूचना-पट्ट और वेबसाइट पर देनी होगी. बार-बार किताब या ड्रेस का पैटर्न बदलने पर भी रोक रहेगी. अगर किसी वजह से बदलाव जरूरी हुआ तो इसके लिए शिक्षक-अभिभावक संघ की सहमति लेनी होगी.

नई गाइडलाइन के मुताबिक स्कूल अब छात्रों या अभिभावकों पर तय पाठ्यक्रम से बाहर की अतिरिक्त किताबें या सामग्री खरीदने का अनावश्यक दबाव नहीं डाल सकेंगे. कई अभिभावकों की शिकायत थी कि निजी स्कूल गैरजरूरी किताबें और महंगी सामग्री खरीदने के लिए दबाव बनाते हैं. अब ऐसी शिकायतों पर सख्ती होगी.

निजी स्कूलों की फीस व्यवस्था पर भी कड़ा नियंत्रण

शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों को चेतावनी दी है कि फीस बढ़ोतरी मनमाने ढंग से नहीं की जा सकेगी. अगर फीस बढ़ाना जरूरी होगा तो तय नियमों और प्रक्रिया के तहत ही किया जायेगा. पुनर्नामांकन शुल्क यानी री-एडमिशन फीस और दूसरे प्रतिबंधित शुल्क वसूलने पर रोक रहेगी. विभाग ने स्पष्ट कहा है कि छात्रों की पढ़ाई बिना आर्थिक दबाव के जारी रहनी चाहिए.

अब सभी निजी स्कूलों को फीस, किताब, यूनिफॉर्म और अन्य जरूरी शुल्क से जुड़ी पूरी जानकारी स्कूल के नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर सार्वजनिक करनी होगी. इससे अभिभावकों को पहले से पूरी जानकारी मिल सकेगी और छिपे हुए शुल्क या मनमानी पर रोक लगेगी.

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अभिभावकों को मिलेगा सीधा अधिकार

नई स्कूल मैनेजमेंट कमिटी का सबसे बड़ा उद्देश्य स्कूल प्रबंधन में अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाना है. सरकार चाहती है कि बच्चों की पढ़ाई से जुड़े फैसलों में परिवार की सीधी भूमिका हो, ताकि स्कूलों की जवाबदेही बढ़े और शिक्षा व्यवस्था ज्यादा पारदर्शी बने.

शिक्षा विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई निजी स्कूल फीस, किताब और ड्रेस के नाम पर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहे हैं. इसी को देखते हुए यह नई व्यवस्था लागू की जा रही है. सरकार का मानना है कि इससे स्कूलों की मनमानी रुकेगी, अभिभावकों को राहत मिलेगी और बच्चों की पढ़ाई अधिक व्यवस्थित व पारदर्शी माहौल में हो सकेगी.

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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